राजस्थान के प्रमुख किसान आंदोलन

1. बिजौलिया किसान आंदोलन-
✍ यह भारत का प्रथम अहिंसात्मक और संगठनात्मक किसान आंदोलन था।
✍ इस आंदोलन को प्रारम्भ करने का श्रय मेवाड़ रियासत को दिया जाता है।
✍ बिजौलिया ठिकाने के संस्थापक अशोक परमार थे जो भरतपुर के जगनेर के रहने वाले थे।
✍ अशोक परमार ने खानवा के युद्ध मे राणा सांगा का साथ दिया था इससे खुश होकर राणा सांगा ने अशोक परमार को बिजौलिया कि उपरमाल जागीर प्रदान कर दी।
✍ उपरमाल जागीर कि सदरमुकाम राजधानी थी।
✍ वर्तमान मे बिजौलिया भीलवाड़ा मे स्थित है।
✍ बिजौलिया मे अधिकांश ( 60% ) किसान धाकड़ जाती के थे।

👉 बिजौलिया किसान आंदोलन के कारण-
✍ दौषपुर्ण भू-राजस्व पद्दती और भू-राजस्व कि वसुलि का गलत तरीका ( लाटा और कूँता )
✍ बिजौलिया मे 84/86 लागबाग लि जाती थी।
✍ किसानो कि कर्जदारी
✍ निःशल्क बेगार

👉 बिजौलिया किसान आंदोलन के कुल तीन चरण थे।

(अ) बिजौलिया किसान आंदोलन का प्रथम चरण-( 1897-1915 तक )
✍ प्रथम चरण मे बिजौलिया किसान आंदोलन का नेतृत्व साधु सिताराम दास के द्वारा किया गया।
✍ 1894 मे जागीदार राव गोविंद दास कि मृत्यु के बाद उसका बेटा किशन सिंह/कृष्ण सिंह नया जागीदार बना।
✍ कष्ण सिंह के काल मे किसानो से 84 प्रकार कि लाग बाग लि जाती थी।
✍ सन् 1897 मे किशन सिंह/कृष्ण सिंह कि शिकायत करने हेतु किसानो ने नानजी पटेल व ठाकरी पटेल को मेवाड़ के राणा फतेह सिंह के पास भेजा।
✍ बिजौलिया किसान अांदोलन के दौरान मेवाड़ का राणा फतेह सिंह था।
✍ किसानो कि शिकायत कि जाँच हेतु महाराणा फतेह सिंह ने हाकिम हुसैन को भेजा था।
✍ सन् 1903 मे किशन सिंह ने एक नई लाग लागू कि जो चवरी कर के नाम से प्रसिद्ध थी जिसके अन्तर्गत प्रत्येक किसान को अपनी बेटी के  विवाह पर 5 रुपये लाग के रुप मे देने होगे।

✍ सन् 1906 मे कृष्ण सिंह कि मृत्यु के बाद उनका पुत्र पृथ्वी सिंह नया जागीदार बना।
✍ पृथ्वी सिंह ने जागीदार बनते हि तलवार बंधि कर नामक एक नई लाग लागू कर दी।
✍ तलवार बंधि कर उतराधिकारी कर था।
✍ एेसी परिस्थितियो मे किसानो ने साधु सिताराम दास, फतहकरण चारण और ब्रह्मदेव से शिकायत कि थी।
✍ जागीदार ने फतहकरण चारण और ब्रह्मदेव को राज्य से बाहर निकाल दिया और साधु सिताराम दास को पुस्तकाल्य कि नौकरी से हटा दिया।
✍ सन् 1914 मे पृथ्वी सिंह कि मृत्यु के बाद उनका पुत्र केशरी सिंह नया जागीदार बना जिसने लाग बाग को यथावत रखा।
✍ सन् 1916 मे साधु सिताराम दास ने उमा जी के खेड़े/ बारीसल गाँव मे किसान पंच बोर्ड कि स्थापना कि थी।

(ब) बिजौलिया किसान आंदोलन का दुसरा चरण-( 1916-1922 तक )
✍ सन् 1916 मे साधु सिताराम दास ने बिजौलिया किसान आंदोलन कि बागडोर विजय सिंह पथिक को सौंप दी।
✍ इस समय विजय सिंह पथिक, क्रांतिकारी रास बिहारी बोस, सचिनानंद संथाल के संगठन मे कार्य कर रहे थे।
✍ विजय सिंह पथिक को रास बिहारी बोस ने सशस्त्र क्रांति सन् 1915 के लिए राजस्थान खरवा के ठाकुर गोपाल सिंह खरवा के यहा भेजा परन्तु गोपाल सिंह खरवा व विजय सिंह पथिक पकड़े गये।
✍ विजय सिंह पथिक को कैद करके अजमेर के टाेडगढ़ दुर्ग मे बंद किया
✍ जैल से फरार होने के बाद भुपसिंह ने अपना नाम बदल कर विजय सिंह पथिक रखा।
✍ विजय सिंह का वास्तविक नाम भुपसिंह था।
✍ भुपसिंह का जन्म सन् 1873 मे उतरप्रदेश के बुलंद शहर के गुढ़ावरी मे हुआ तथा यह जाती से गुर्जर थे।
✍ जैल से फरार होने के बाद भुपसिंह ने चितोड़गढ़ के ओछड़ी गाँव मे विधा प्रचारणी सभा का गठन किया।

✍ इस समय साधु सिताराम दास, माणिक्य लाल वर्मा, प्रेमचंद भील और भवरलाल सराफ विजय सिंह पथिक से भेट कर विजय सिंह पथिक को बिजौलिया किसान आंदोलन का नेतृत्व सौप दिया।
✍ विजय सिंह पथिक ने किसानो को पंचायतो के माध्यम से गठित करने के आदेश दिये और दुसरे विश्व युद्ध मे चंदा देने से मना कर दिया।
✍ सन् 1917 मे विजय सिंह पथिक ने बेरिसाल गाँव मे उमाजी के खेड़े मे उपरमाल पंच बोर्ड कि स्थापना हरियाली अमावस्या के दिन किया।
✍ इस पंच बोर्ड का सरपंच/अधयक्ष मुन्ना पटेल/ मुन्ना लाल पटेल को बनाया गया।
✍ इसी समय साधु सिताराम दास और प्रेमचंद भील को पकड़ कर जैल मे बंद कर दिया।
✍ इन्हे छुड़ाने के लिए बाल गंगाधर तिलक ने महाराणा फतेह सिंह को पत्र लिखा।
✍ बाल गंगाधर तिलक ने बिजौलिया किसान आंदोलन मे अप्रत्यक्ष रुप से भाग लिया था।
✍ बिजौलिया किसान आंदोलन के दौरान माणिक्य लाल वर्मा द्वारा रचित गीत पंछिड़ा ने किसानो को प्रोत्साहित किया।
✍ विजय सिंह पथिक ने कानपुर से छपने वाले समाचार पत्र प्रताप के माध्यम से इस आंदोलन को समस्त उतरी भारत मे फैला दिया।
✍ प्रताप समाचार पत्र का सम्पादन गणेश शंकर विधार्थी करते थे।

👉 बिजौलिया किसान आंदोलन के लेख निम्न समाचार पत्रो मे भी छापे गये।
(1) प्रयाग से अभ्युदय समाचार पत्र
(2) कलक्ता से विश्व मित्र समाचार पत्र
(3) महाराष्ट्र से मराठा समाचार पत्र (अग्रेजी भाषा) व केसरी समाचार पत्र (मराठी भाषा) इन दोनो समाचार पत्रो के सम्पादक बाल गंगाधर तिलक थे।
✍ इस आंदोलन के दौरान गाँधी जी ने अपने निजि सचिव भुला देसाई को विजय सिंह पथिक को बुलाने हेतु मेवाड़ भेजा।
✍ परिणाम स्वरूप विजय सिंह पथिक सन् 1920 मे नागपुर अधिवेशन मे भाग लेने के लिए पँहुचे।
✍ सन् 1919 मे वर्धा (महाराष्ट्र) मे राजस्थान सेवा संघ कि स्थापना कि
✍ बिजौलिया किसान आंदोलन मे किसानो कि तरफ से राजस्थान सेवा संघ ने प्रतिनिधित्व किया था।
✍ राजस्थान सेवा संघ का प्रधान कार्यालय सन् 1921 मे विजय सिंह पथिक ने अजमेर मे बनाया था।


👉 राजस्थान सेवा संघ के निर्देशन मे 2 समाचार पत्र निकाले गए
✍ राजस्थान केसरी व नवीन राजस्थान ये दोनो समाचार पत्र अजमेर से राजस्थान सेवा संघ द्वारा प्रकासित किये जाते थे।

✍ ब्रिटिश सरकार ने बिजौलिया किसान आंदोलन कि समस्याओ कि जाँच हेतु न्याय मुर्ति बिंदुलाल भट्टाचार्य कि अध्यक्षता मे एक अायोग गठन किया गया।
✍ इस आयोग ने किसानो के पक्ष मे अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कि थी।
✍ 4 फरवरी 1922 को ए.जी.जी. रोबर्ट हाॅलैण्ड स्वंय बिजौलिया पहुचे 11 फरवरी 1922 को रोबर्ट हाॅलैण्ड को अथक प्रयासो से किसानो और जागीरदारो को मध्य समझौता हुआ।

👉 इस समझौते के अनुसार-
✍ 84 लाग-बाग को घटाकर 35 लाग-बाग कर दी गई।
✍ इस आंदोलन के दौरान जिन किसानो को जैल मे बंद किया गया था उन्हे रिहा कर दिया गया।
✍ इस समझौते मे किसानो की तरफ से राजस्थान सेवा संघ की और से प्रतिनिधित्व माणिक्य लाल वर्मा और रामनारायण चौधरी आदि उपस्थित हुए।

(स) बिजौलिया किसान आंदोलन का तीसरा चरण-( 1923-1941 तक )
✍ 10 सितम्बर 1923 को बेगू किसान आंदोलन के दौरान विजय सिंह पथिक को कैद कर लिया गया।
✍ माणिक्य लाल वर्मा, जमनालाल बजाज के साथ 1929 मे विजय सिंह पथिक के मतभेद हो गये जिस कारण विजय सिंह पथिक इस आंदोलन से अलग हो गया।
✍ तीसरे चरण का नेतृत्व जमनालाल बजाज और हरिभाऊ उपाध्याय के द्वारा किया गया।
✍ 21 अप्रेल 1931 को माणिक्य लाल वर्मा ने गाँधी जी की तकनीक पर इस सत्याग्रह को प्रारम्भ किया।
✍ 1941 ई. मे तीन व्यक्तियो ( 1. मेवाड़ के पोलिटिक्ल एजेंट-विलिक्सन, 2. मेवाड़ राजस्व मंत्री-मोहनलाल, 3. मेवाड़ प्रधानमंत्री-वी.राघवाचार्य )  कि मध्यस्ता के कारण यह आंदोलन समाप्त हो गया।
✍ राजस्थान मे किसान आंदोलन का जनक साधु सीताराम दास था।
✍ भारत मे किसान आंदोलन का जनक विजय सिंह पथिक था।
✍ आंदोलन के दौरान विजय सिंह पथिक को महात्मा की संज्ञा प्रदान की गई।
✍ यह आंदोलन भारत मे सबसे लम्बी अवधि ( 44 वर्षो ) तक चलने वाला किसान आंदोलन था।

2. बेगू किसान आंदोलन-
✍ वर्तमान मे बेगू भीलवाड़ा मे है जो प्रारम्भ मे मेवाड़ रियासत के अधिन था।
✍ बेगू किसान आंदोलन बिजौलिया किसान आंदोलन से प्रभावित था।
✍ बेगू के किसानो से 25 प्रकार की लाग-बाग ली जाती थी।
✍ लगान की दर ऊँची होने के कारण और गलत भू-राजस्व की लाग-बाग व्यवस्था के कारण बेगू के किसानो ने भीलवाड़ा मे मैनाल के भैरूकुण्ड मे एक विशाल किसान सम्मेलन हुआ और इसी घटना से बेगू किसान आंदोलन का प्रारम्भ माना जाता है।
✍ इस आंदोलन का नेतृत्व विजय सिंह पथिक के कहने पर राजस्थान सेवा संघ के मंत्री रामनारायण चौधरी द्वारा किया गया।
✍ रामनारायण चौधरी ने किसानो की ओर से दी गई मांगे रखी-
1. किसान फसलो का कुँता नही करवाएंगे।
2. किसान नये भूमी बंदोबस्त के आधार पर ही कर देंगे।

👉 इस आंदोलन के अन्य कारण-
✍ किसानो की फसलो को जागीदारो द्वारा जला दिया जाता था।
✍ चारागाह क्षेत्र मे पशुओ को जागीदारो द्वारा चराने नही देना।
✍ किसानो पर जागीदारो द्वारा अमानविय अत्याचार।
✍ बेगू के ठाकुर अनुप सिंह ने किसानो की मांग को मानकर उनके साथ एक सम्मान जनक समझौता 1922-23 मे किया परन्तु इस समझौते को राणा फतेह सिंह ने समाप्त कर दिया और इस समझौते को बोल्शेविक क्रांति की संज्ञा दी।

👉 विशेष- मेनशेविक और बोल्शेविक रूस की क्रांति के दो दल थे बोल्शेविक क्रांतिकारी दल जबकी मेनशेविक उदारवादी दल था।

👉 बेगू किसान आंदोलन के अन्य तथ्य-
✍ बेगू किसान आंदोलन कि जाँच हेतु कमीश्नर ट्रेन्च की अध्यक्षता मे 1922 ई. मे ट्रेन्च आयोग का गठन किया गया।
✍ ट्रेन्च आयोग ने बेगू कि 25 लाग-बाग से केवल 4 लाग-बाग को ही दोषपुर्ण बताया।
✍ ट्रेन्च आयोग की रिपोर्ट का विरोध करने के लिए 13 जुलाई 1923 को गोविंदपुरा गाँव मे किसानो का एक विशाल सम्मेलन हुआ इस सम्मेलन पर कमीश्नर ट्रेन्च के आदेश पर गोलिया चलाई गई जिसमे रूपा जी व कृपा जी नामक दो किसान शहीद हो गए।
✍ इस घटना के बाद विजय सिंह पथिक बेगू पँहुचे परन्तु 10 सितम्बर 1923 को विजय सिंह पथिक को गिरफदार कर लिया गया और यह आंदोलन असफल रहा।
✍ इस आंदोलन मे सर्वाधिक गुर्जर जाति ने भाग लिया।

3. बूंदी किसान आंदोलन- (1922-23)
✍ बूंदी किसान आंदोलन मे महिलाओ का नेतृत्व अंजना चौधरी द्वारा किया गया।
✍ बूंदी का नित्यानन्द स्वामी स्थाई किसान नेता था जिसने किसानो मे जन जागृती जागृत की थी।
✍ 17 फरवरी 1929 को विजय सिंह पथिक राॅबर्ट हाॅलेण्ड से मिले और किसानो के लिए एक समान जनक समझौता करवाया।
✍ बूंदी किसान आंदोलन का नेतृत्व भवरलाल सोनी द्वारा किया गया था।
✍ बूंदी किसान आंदोलन को बरड़ किसान आंदोलन भी कहा जाता है।

👉 डाबी काण्ड-
✍ 2 अप्रेल 1923 को बूंदी के डाबी गाँव मे किसानो ने एक सभा का आयोजन किया।
✍ इस सभा पर  पुलिश अधिक्षक इकराम हुसैन के आदेश पर सैनिको द्वारा गोलिया चलाई गई जिसमे नानक जी भील और देविलाल गुर्जर शहीद हो गये।
✍ जिस समय नानक जी भील को गोली लगी उस समय नानक जी भील विजय सिंह पथिक द्वारा रचित झण्डा गीत गा रहे थे।
✍ इकराम हुसैन को राजस्थान का जनरल डायर कहा जाता है।
✍ माणिक्य लाल वर्मा ने नानक जी भील कि याद मे अर्जी शीर्षक नामक एक गीत लिखा।

4. अलवर किसान आंदोलन-
✍ यह किसान आंदोलन तीन चरणो मे सम्पन हुआ।
(अ) नीमू चाणा किसान आंदोलन।
(ब) मेव किसान आंदोलन।
(स ) 1941-47 के मध्य प्रजामण्डल के दौरान उदारवादी आंदोलन।

(अ) नीमू चाणा किसान आंदोलन
✍ सन् 1922 मे अलवर के महाराजा जयसिंह ने इजारा पद्धति के अन्तर्गत भू-राजस्व को बढ़ा दिया।
✍ इजारा पद्धति सर्वप्रथम किर्नवालिस ने लागू की थी पहली बार यह पद्धति सन् 1876 मे लागू हुई थी।
✍ माधवसिंह और गोविंद नामक किसानो द्वारा इसकी सिकायत क्षेत्रीय महासभा दिल्ली को कि गई और इसके विरूद्ध पुकार नामक समाचार पत्र मे लेख छपवाये।
✍ 14 मई 1925 को किसानो ने अलवर जिले कि बानसूर तहसिल मे नीमूचाणा गाँव मे एक विशाल सभा का आयोजन किया।
✍ इस विशाल सभा पर कमांडर छाजूसिंह के आदेश पर गोलिया चलाई गई जिसमे लगभग 156 किसान मारे गये।
✍ महात्मा गाँधी ने इस हत्याकाण्ड को दौहरा डायर शाही कि संज्ञा दी।
✍ गाँधी जी ने इस हत्याकाण्ड को जलियावाला बाग हत्याकाण्ड से झगन्य काण्ड बताया है।
✍ राजस्थान सेवा संघ ने इस हत्याकाण्ड कि जाँच करवाई और 31 मई 1925 को अजमेर से छपने वाले समाचार पत्र तरूण राज मे अपनी रिपोर्ट प्रकाशित कि।
✍ रामनारायण चौधरी ने व्यक्तिगत रूप से इस हत्याकाण्ड कि जाँच कि और इसे नीमू चाणा हत्याकाण्ड कि संज्ञा दी।
✍ लाहौर से छपने वाले समाचार पत्र रियासत मे इस हत्याकाण्ड को जलियावाला बाग हत्याकाण्ड भी कहा है।
✍ इस नीमू चाणा हत्याकाण्ड का असली दोषी पंजाब पुलिश का अधिकारी गोपालदास था।
✍ 18 नवम्बर 1925 को किसानो और महाराजा जयसिंह के मध्य समझौता हुआ जिसमे महाराजा जयसिंह ने किसानो कि सभी मांगो स्वीकार कर ली और यह आंदोलन समाप्त हो गया।

(ब) मेव किसान आंदोलन
✍ मेव किसान आंदोलन मे जन जागृती मोहमद अली द्वारा सन् 1932 मे अजुमन-ए-खादी-मुल इस्लाम नामक संस्था से जागृत कि गई।
✍ सन् 1932 मे हरियाणा के गुड़गाँव के यासिन अली के द्वारा मेव जाति मे जन जागृती जागृत कि गई।

5. मारवाड़ किसान आंदोलन
✍ मारवाड़ राजपुताने कि सबसे बड़ी रियासत थी।
✍ यहा पर किसानो को तीन प्रकार के शासन का विरोद्ध करना पड़ा।
(1) राजा
(2) अंग्रेज
(3) जागीदार
✍ सन् 1915 मे मारवाड़ मे राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक जागृती लाने के लिए मरूधर मित्र हितकारणी सभा का गठन किया गया और यह मुल रूप से राजनैतिक संगठन था।
✍ सन् 1920-21 मे मारवाड़ मे तोल आंदोलन प्रारम्भ किया गया। 
✍ सन् 1920 मे भ्रष्ट नोकरशाही और अराजकता के विरूद्ध चांदमल खुराना/सुराणा ने मारवाड़ सेवा संघ कि स्थापना कि।
✍ सन् 1923 मे जयनारायण व्यास द्वारा मारवाड़ हितकारणी सभा का गठन हुआ।
✍ जो मारवाड़ सेवा संघ का हि परिवर्तित नाम था।
✍ इस मारवाड़ हितकारणी सभा का अध्यक्ष चांदमल खुराना/सुराणा को बनाया गया।
✍ इस सभा के माध्यम से जयनारायण व्यास ने लगान कि ऊँची दर, बेगार के विरूद्ध व मारवाड़ कि आर्थिक स्थिति के लिए जन साधारण को जागृत किया।
✍ मारवाड़ हितकारणी सभा के विरोध मे सन् 1924 मे राजभक्त देश हितकारणी सभा का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष किशनलाल बोपाना थे।
✍ जयनारायण व्यास ने यंग इण्डिया समाचार पत्र के माध्यम से मारवाड़ शीर्षक नाम से आंदोलन जारी रखा।
✍ मारवाड़ हितकारणी सभा द्वारा किसानो को जागृत करने के लिए दो पत्रिकाए निकाली गई।
(1) पोपा बाई की पोल।
(2) मारवाड़ की अवस्था।
✍ सन् 1931 मे मारवाड़ युथ लीग कि स्थापना कि गई।
✍ सन् 1938 मे मारवाड़ लोक परिषद का गठन काया गया।
✍ मारवाड़ लोक परिषद को मारवाड़ मे किसान आंदोलन कि जननी माना जाता है।
✍ मारवाड़ मे जन जागृती का जनक जयनारायण व्यास को माना जाता है।
✍ दिसम्बर 1938 मे गुजरात के हरिपुरा मे कांग्रेस का अधिवेशन हुआ और इस अधिवेशन मे यह तय किया गया कि कांग्रेस राजपुताना कि रियासतो के आंदोलन का समर्थन करेगी।
✍ इस अधिवेशन कि अध्यक्षता सुभाष चन्द्र बोस ने कि थी।
✍ 28 मार्च 1942 को मारवाड़ लोक परिषद के द्वारा समस्त मारवाड़ मे उतरदायी सरकार दिवस मनाने कि घोषणा कि गई।
✍ 13 मार्च 1947 को डिडवाना ( नागौर ) के डाबड़ा गाँव मे किसानो कि सभा पर सरकार द्वारा गोलिया चलई गई जिसमे अनेक लोग मारे गये।
✍ डाबड़ा काण्ड कि आलोचना निम्न समाचार पत्रो मे कि गई।
(1) वन्दे मातृम समाचार पत्र (मुम्बई)
(2) हिन्दुस्तान टाईमस समाचार पत्र (दिल्ली)
(3) प्रजा सेवक समाचार पत्र (जोधपुर)
(4) लोकवाणी समाचार पत्र (जयपुर)
✍ डाबड़ा समेलन का आयोजन मथुरादास द्वारा किया गया।
✍ 6 मार्च 1949 को मारवाड़ टेंनेसी एक्ट पारित हुआ जिसमे किसानो को जमीनो का मालिना हक दे दिया गया व इसी के साथ ये आंदोलन समाप्त हो गया।

6. बीकानेर रियासत मे किसान आंदोलन
✍ बीकानेर किसान आंदोलन का मुख्य कारण आबीयाना कर (जल कर) था।
✍ गंग नहर के पानी को लेकर किसानो आंदोलन किया गया था जिसमे महाराजा गंगा सिंह ने जागीदारो को समर्थन किया।
✍ गंग नहर का निर्माता गंगा सिंह हि था जिन्होने सन् 1925 मे इस नहर कि निव रखी थी।
✍ इस नहर का सुभारम्भ अकटुबर 1927 को किया गया।
✍ गंग नहर के क्षेत्र के किसानो ने जमीदार एसोसियसन का गठन किया।
✍ बीकानेर किसान आंदोलन का सर्वप्रथम विरोध सन् 1937 मे जीवनराम  के द्वारा किया गया था।
✍ यह विरोध लगान कि गलत दर व बैगार प्रथा के विरूद्ध था जिसमे जीवनराम का साथ प्रजामण्डल द्वारा भी दिया गया।
✍ दुधवा खारा (चरू) मे किसान आंदोलन का नेतृत्व सन् 1945 मे हनुमान सिंह द्वारा किया गया।
✍ इस समय जागीदार सुरजमल था व राजा शार्दुलसिंह था।

👉 कागड़ा काण्ड-
✍ कागड़ा रतनगढ़ का एक छोटा सा गाँव है जहा सन् 1946 मे अकाल के बावजुद भी जागीदारो ने जबरन भूमी कर वसुल किया।
✍ किसानो द्वारा विरोध किये जाने पर गोलिया चलाई गई जीस कारण ही 6 जुलाई 1946 को बीकानेर दिवस मनाया गया।
✍ कागड़ा काण्ड कि घटना के बाद ही बीकानेर दिवस 6 जुलाई 1946 को मनाया गया।
✍ सन् 1948 मे बीकानेर लोक मण्डल कि स्थापना कि गई।

👉 किसान आंदोलनो के अन्य तथ्य-
✍ जकात आंदोलन को शेखावाटी किसान आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है।
✍ शेखावाटी किसान आंदोलन का नेतृत्व रामनारायण चौधरी के द्वारा किया गया था।
✍ सन् 1931 मे क्षेत्रीय किसान जाट महासभा का गठन किया गया।
✍ सन् 1934 मे देशराज के नेतृत्व मे सीकर किसान आंदोलन के दौरान जाट प्रजापत महायज्ञ किया गया।
✍ 21 जुन 1934 को जयसिंहपुरा  हत्याकाण्ड हुआ था।
✍ 25 मार्च 1935 को खुड़ी गाँव कि घटना हुई थी।

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