गुप्त वंश या गुप्त साम्राज्य

गुप्त वंश
भारत में गुप्त वंश का उदय तीसरी सदी के अन्त में प्रयाग के निकट कौशाम्बी में हुआ था।

1. श्री गुप्त-
➧भारत में गुप्त वंश की स्थापना श्री गुप्त ने की थी इसीलिए श्री गुप्त को गुप्त वंश का संस्थापक कहते है।
➧श्री गुप्त ने अपने राजधानी अयोध्या को ही बनाया था।
➧अयोध्या सरसू नदी के किनारे स्थित है।
➧महाराजा की उपाधि सर्वप्रथम श्री गुप्त ने ही धारण की थी।
➧श्री गुप्त को गुप्तों का आदिराज भी कहते है।

2. घटोत्कच-
➧घटोत्कच श्री गुप्त का पुत्र था।
➧श्री गुप्त के बाद गुप्त वंश का अगला शासक घटोत्कच बना था।

3. चन्द्रगुप्त-I
➧चन्द्रगुप्त प्रथम घटोत्कच का पुत्र था।
➧घटोत्कच के बाद गुप्त वंश का अगला शासक चन्द्रगुप्त प्रथम बना था।
➧महाराजाधिराज की उपाधि सर्वप्रथम चन्द्रगुप्त प्रथम ने ही धारण की थी।
➧गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक चन्द्रगुप्त प्रथम को माना जाता है।

➧राजा रानी के सिक्के-
➧भारत में सर्वप्रथम रानी की याद में सिक्के चलाने वाला पहला शासक चन्द्रगुप्त प्रथम था।
➧चन्द्रगुप्त प्रथम ने अपनी रानी कुमार देवी की याद में सिक्के चलाये थे उन सिक्कों को राजा रानी के सिक्के कहा गया था।

➧गुप्त संवत-
➧गुप्त संवत 319 ई. में चन्द्रगुप्त प्रथम के द्वारा शुरू किया गया था तथा गुप्त संवत को वल्लभी संवत् भी कहते है।

➧गुप्त संवत-
➧शक संवत कुषाण वंश के राजा कनिष्क के द्वारा 78 ई. में शुरू किया गया था।
➧गुप्त संवत तथा शक संवत के बीच 241 वर्षो का अन्तर पाया जाता है।

➧प्रभावती-
➧चन्द्रगुप्त प्रथम की पुत्री का नाम प्रभावती गुप्त था।
➧प्रभावती गुप्त भारत की प्रथम हिंदू महिला शासिका मानी जाती है।

4. समुद्रगुप्त-
➧समुद्रगुप्त चन्द्रगुप्त प्रथम का पुत्र था।
➧समुद्रगुप्त ने कवीराज की उपाधि धारण की थी।
➧समुद्रगुप्त को 100 युद्धों का विजेता भी कहते है।
➧अश्वमेध यज्ञ सर्वप्रथम समुद्रगुप्त ने ही करवाया था।
➧अंग्रेजी इतिहासकार विन्सेंट स्मिथ ने अपनी पुस्तक भारत का प्रारंभिक इतिहास (The Early History of India) में समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा था।
➧समुद्रगुप्त के दरबारी इतिहासकार हरिषेण के द्वारा ही प्रयाग प्रशस्ति लिखी गई है।
➧प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त की प्रशंसा की गई है।

➧एरण अभिलेख-
➧एरण अभिलेख समुद्रगुप्त से संबंधित है।
➧एरण अभिलेख में भारत में पहली बार सत्ती होने के प्रमाण प्राप्त हुआ है।
➧एरण अभिलेख में समुद्रगुप्त के सैनापती भानुगुप्त की पत्नी के द्वारा सत्ती होने का प्रमाण मिलता है।

5. चन्द्रगुप्त-II
➧चन्द्रगुप्त द्वितीय समुद्रगुप्त का पुत्र था।
➧चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपने बड़े भाई रामगुप्त की हत्या करके गुप्त वंश की गद्दी प्राप्त की थी।
➧चन्द्रगुप्त द्वितीय के द्वारा धारण की गई उपाधियां-
1. देवराज/ देवगुप्त
2. परमभागवत
3. विक्रमाद्वित्य
4. शकारी

➧नवरत्न-
➧चन्द्रगुप्त द्वितीय के दरबार में 9 विद्वानों की मण्डली रहती थी जिन्हें नवरत्न कहते थे।
➧चन्द्रगुप्त द्वितीय के दरबारी नवरत्नों में कालिदास, बेतालभट्ट, वराहमिहिर, धन्वन्तरी प्रमुख नवरत्न थे।

➧कालिदास-
➧कालिदास भारत के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार थे।
➧कालिदास को भारत का शेक्सपियर भी कहा जाता है।
➧कालिदास के द्वारा रचित प्रमुख ग्रंथ-
1. रघुवंशम्/ रघुवंश
2. कुमारसंभवम्/ कुमारसंभव
3. मालविकाग्रिमित्रम्
4. अभिज्ञान शाकुंतलम्
5. मेघदूतम्

➧धन्वन्तरी-
➧धन्वन्तरी चन्द्रगुप्त द्वितीय के दरबारी चिकित्सक थे।
➧धन्वन्तरी को भारतीय चिकित्सा का जनक भी कहते है।

➧महरौली स्तंभ-
➧महरौली स्तंभ दिल्ली में स्थित है।
➧महरौली स्तंभ धातु एवं रसायन कला का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। क्योकी महरौली स्तंभ पर आज तक जंग नही लगा है।

➧ताम्रलिप्ति बंदरगाह-
➧ताम्रलिप्ति बंदरगाह गुप्त काल का सुप्रसिद्ध बंदरगाह था।

➧फाह्यान-
➧भारत में आने वाला प्रथम चीनी यात्री फाह्यान ही था।
➧फाह्यान चन्द्रगुप्त द्वितीय के काल में भारत आया था।

➧फो-यू-की-सी
➧फो-यू-की-सी पुस्तक फाह्यान के द्वारा लिखी गई थी।
➧फो-यू-की-सी पुस्तक में गुप्त वंश के इतिहास का पता चलता है।

➧ब्राह्मणों का देश-
➧फाह्यान ने मध्य प्रदेश को ब्राह्मणों का देश कहा था।

➧कौड़ियां-
➧फाह्यान के अनुसार भारत या गुप्त काल में लेन देन या व्यापार के रूप में सर्वाधिक उपयोग कौड़ियों का ही होता था।

➧विक्रम संवत-
➧विक्रम संवत 57 ई. में चन्द्रगुप्त द्वितीय के द्वारा शुरू किया गया था।

6. कुमारगुप्त-
➧कुमारगुप्त को परमभट्टारक तथा महेन्द्रा द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है।
➧गुप्त शासकों में सर्वाधिक अभिलेख कुमार गुप्त के ही है।

➧नालंदा विश्वविद्यालय-
➧नालंदा विश्वविद्यालय विश्व का प्रथम आवासीय विश्वविद्यालय था।
➧नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना कुमारगुप्त ने की थी।
➧नालंदा विश्वविद्यालय बिहार की राजगीर नामक स्थान पर स्थित है।
➧नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध शिक्षा के लिए प्रसिद्ध था।

7. विष्णुगुप्त-
➧विष्णुगुप्त गुप्त वंश का अंतिम शासक था।

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