चौहान वंश (अजमेर के चौहान)

* चौहानो की उत्पती-
1. अग्निकुण्ड का सिद्धांत
2. विदेशी सिद्धांत
3. सूर्यवंशी सिद्धांत-
-पृथ्वीराज विजय (जयानक), हम्मीर महाकाव्य (नयन चन्द्रसुरी), हम्मीर रासो (जोधराज) आदि मे चौहानो को सूर्यवंशी कहा है।
-गोरीशंकर हिराचंद ओझा ने इन्हे सूर्यवंशी माना है।
-गोरीशंकर हिराचंद ओझा सिरोही जिले के रोहिड़ा गाँव के निवासी थे।
-हासि के अभिलेख व अचलेश्वर मंदिर के अभिलेख मे इन्हे चन्द्रवंशी माना है।
4. ब्राह्मण मत का सिद्धांत-
-डॉ. दशरथ शर्मा ने अपनी पुस्तक अर्ली चौहान डायनेस्टी मे तथा बिजौलिया अभिलेख के अनुसार चौहानो को वत्सगौत्रीय ब्राह्मण माना है।
-डॉ. दशरथ शर्मा ने इन्हे वत्सगौत्रीय संतान माना है।

* बिजौलिया अभिलेख-
-बिजौलिया अभिलेख भिलवाड़ा मे श्याम पार्श्वनाथ नाथ मंदिर कि चट्टान के पास स्थित है।
-बिजौलिया अभिलेख 1170 ई. का है। जिसे गुणभद्र/श्रावक लालोक द्वारा
संस्कृत भाषा मे लिखा गया था।
-बिजौलिया अभिलेख के अनुसार चौहानो का संस्थापक वासुदेव चौहान था।

* चौहानो का निवास स्थान-
-डॉ. गोपिनाथ शर्मा ने इन्हे जांगल देश (बिकानेर, उत्तरी मारवाड़, जयपुर) का माना है। परन्तु सर्वमान्य मत सांभर, पुष्कर, सिकर को माना है।

* अजमेर के चौहान-
-अजमेर के चौहानो का संस्थापक वासुदेव चौहान था
-वासुदेव चौहान ने सांभर झील का निर्माण करवाया।
-गोपिनाथ शर्मा के अनुसार 551 ई. मे इस वंश कि निव डाली गयी थी।

1. गुवक-प्रथम-
-इन्होने हर्षनाथ के मंदिर का निर्माण सिकर मे करवाया था।
-चौहानो कि प्रारम्भिक राजधानी अहिच्छत्रपुर (नागौर) थी।

2. गुवक-द्वितिय-
-इनकी पत्नी रूद्राणी/आत्म प्रभा योगिक क्रियाओ मे निपुण थी व प्रतिदिन पुष्कर मे महादेव मंदिर के सामने 1000 दीपक जलाती थी।

3. वाक्पतिराज-
-इनके पास महाराज की उपाधि थी।

4. सिंहराज-
-इनके पास महाराजा धिराज की उपाधि थी।
-यह चौहानो का प्रथम स्वतंत्र शासक था।

5. विग्रहराज द्वितिय-
-इन्होने भड़ोच (गुजरात) मे अपनी कुल देवी आशापुरा माता का मंदिर बनवाया था।
-चौहानो की आराध्य देवी जीण माता है।
-विग्रहराज द्वितिय के शासन कि जानकारी 973 ई. की हर्षनाथ प्रशस्ति मे मिलती है। जो कि विग्रहराज द्वितिय के ही समय कि है।

6. अजयराज (1105-1133 ई.)-
-अजयराज ने 1113 ई. मे अजमेर को बसाकर अपनी राजधानी बनाया।
-पूर्व मे इनकी राजधानी अहिच्छत्रपुर (नागौर) थी।
-अजयराज ने अजमेर बसाया इसका उल्लेख पृथ्वीराज विजय मे है। जो जयानक द्वारा लिखी गई थी।
-अजयराज ने हि गढ़ बिठली पहाड़ी पर अजयमेरू नाम से दुर्ग का निर्माण करवाया।
-वर्तमान मे इस दुर्ग को तारागढ़ कहा जाता है।
-अजयराज ने अपने शासन काल मे चाँदी और ताम्बे के सिक्के जारी करवाये थे।
-अजयराज के चाँदी के सिक्के अजयदेव नाम से प्रसिद्ध हुए थे।
-अजयराज की पत्नी सोमलेखा ने भी चाँदी के सिक्के अपने नाम से ही जारी किये थे।
-अजयराज का शासन काल चौहानो निर्माण काल कहलाता है।
-अजयराज ने शासन के अंतिम दिनो मे राज गद्दी का त्याग कर सन्यास धारण किया।

7. अर्णोराज (1133-1155 ई.)-
-अर्णोराज की प्रारम्भिक समस्याए-
-(1) भारत मे तुर्क अाक्रमणो को रोकना/तुर्क आक्रमण से राज्य को बचाना।
-(2) चालुक्य शासक कुमारपाल का प्रभाव समाप्त करना।
-(3) चौहान साम्राज्य का विस्तार करना।

-अर्णोराज प्रथम चौहान शासक था जिसने  तुर्क आक्रमणकारियो को पराजित किया।

-अन्नासागर झील-
-अर्णोराज ने तुर्क विजय के उपलक्ष मे अन्नासागर झील का निर्माण करवाया।
-यह झील जन्द्रा नदी के पानी को रोक कर बनाई गयी थी।
-यह झील तारागढ़ और नाग पहाड़ के मध्य स्थित है।

-अर्णोराज व चालुक्य शासक कुमारपाल-
-अर्णोराज ने चालुक्य शासक कुमारपाल पर आक्रमण किया।
-यह युद्ध आबू के नजदीक हुआ जिसमे कुमारपाल विजयी हुआ।
-पराजित होने के बाद अर्णोराज ने अपनी पुत्री जल्हन देवी का विवाह कुमारपाल के साथ किया।
-इस विवाह का उल्लेख प्रबंध कोश/प्रबंध चिन्तामणी मे मिलता है।

-अर्णोराज ने जैन धर्म के खरतगच्छ जैन को भूमी दान मे दी थी।

विशेष-भारत मे सर्वप्रथम भूमी दान सातवाहन वंश (गोतमी पुत्र सातकरण) द्वारा किया गया था।
विशेष- भारत मे सर्वाधिक भूमी दान गुप्त काल मे दिया गया था।

-अर्णोराज ने पुष्कर मे वराह मंदिर का निर्माण करवाया।
-अर्णोराज के पास जयवराह नामक उपाधि थी। जिसको अपने ताम्बे के सिक्को पर अंकित करवाया।
-अर्णोराज के पुत्र जगदेव ने इनकी हत्या 1155 ई. मे कर दी।
-जगदेव चौहानो का पितृहन्ता कहलाता है।

8. विग्रहराज-चतुर्थ (1158-1163 ई.)-
-विग्रहराज-चतुर्थ बिसलदेव के नाम से जाना जाता है।
-विग्रहराज-चतुर्थ ने दिल्ली पर अधिकार किया उस समय दिल्ली का शासक तवर तौमर था।
-दिल्ली पर अधिकार करते समय विग्रहराज-चतुर्थ द्वारा जयचन्द के पिता विजयचन्द की हत्या कर दि गयी।
-विग्रहराज-चतुर्थ के समय इस विजय का उल्लेख पृथ्वीराज विजय मे मिलता है।
-विग्रहराज-चतुर्थ ने गजनी के शासक अमीर खुसरव शाह को पराजित किया और पंजाब, मुल्तान, हिसार पर अधिकार कर लिया।
-गजनी  विजय का उल्लेख ललितराज विग्रह मे मिलता है।
-विग्रहराज-चतुर्थ के दरबारी कवि सोमदेव के द्वारा ललितराज विग्रह नाट्क कि रचना कि गई जो की संस्कृत भाषा मे है।
-विग्रहराज-चतुर्थ प्रथम चौहान शासक है। जिसने दिल्ली पर अधिकार किया था।
-नरपती नाल्ह द्वारा विग्रहराज-चतुर्थ पर बिसलदेव रासो लिखा गया।
-विग्रहराज-चतुर्थ के शासन कि जानकारी/राज्य विस्तार शिवालेख अभिलेख मे मिलता है।
-विग्रहराज-चतुर्थ द्वारा टोंक मे बिसलपुर नगर/कस्बा बसाया गया जो कि वर्तमान मे टोडारायसिंह नगर कहलाता है।
-विग्रहराज-चतुर्थ ने टोंक मे ही बिसलपुर बांध का निर्माण करवाया।

-विग्रहराज-चतुर्थ और चालुक्य शासक कुमारपाल-
-विग्रहराज-चतुर्थ चौहानो का प्रथम शासक था जिसने चालुक्य शासक कुमारपाल को पराजित करके नागौर, पाली, जालौर और सिरोही पर अधिकार कर लिया।

-विग्रहराज-चतुर्थ को पृथ्वीराज विजय के रचियता जयानक ने अपने ग्रंथ मे कवि बांध्व कि उपाधि प्रदान कि है।
-विग्रहराज-चतुर्थ ने हरिकेली नाट्क लिखा।
-विग्रहराज-चतुर्थ ने सरस्वती कण्ठाभरण विधालय कि स्थापना अजमेर मे करवायी।
-इसी विधालय कि दिवार पर हरिकेली नाट्क कि कुछ पंक्तिया अंकित है।
-सरस्वती कण्ठाभरण विधालय को मोहमद गौरी के सैनापती कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा तोड़कर अढ़ाई दिन का झौपड़ा बनवाया गया।
-अढ़ाई दिन का झौपड़ा राजस्थान कि प्रथम मुस्लिम मस्जिद है।

विशेष- भारत कि प्रथम मुस्लिम मस्जिद कुव्वलत-उल-इस्लाम मस्जिद दिल्ली मे स्थित है। जो कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा बनवायी गई थी।

9. पृथ्वीराज चौहान/पृथ्वीराज-तृतीय (1177-1192 ई.)

-पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1166 ई. मे गुजरात के अन्हिलपाटन मे हुआ।
-पृथ्वीराज चौहान के पिता का नाम सोमेश्वर और माता का नाम कर्पुरी देवी था।
-कर्पुरी देवी दिल्ली के शासक अनंगपाल तौमर कि पुत्री थी।

-पृथ्वीराज चौहान की उपाधिया-
-(1) राय पिथौरा (राय पिथौरा का अर्थ-दुर्गो का रक्षक/अंतिम हिंदु सम्राट)
-(2) दल पुंगल (दल पुंगल का अर्थ-विश्व विजेता)

-पृथ्वीराज चौहान कि संरक्षिका उनकी माता कर्पुरी देवी थी।
-पृथ्वीराज चौहान का प्रधानमंत्री कैमास/कदमदास था।
-पृथ्वीराज रासो चन्द्रवरदायी द्वारा लिखा गया था। जबकी पृथ्वीराज विजय जयानक द्वारा लिखि गई थी।
-शासक बनते ही पृथ्वीराज चौहान ने दिगविजय अभियान प्रारंभ किया।

-पृथ्वीराज चौहान की विजय-
-पृथ्वीराज चौहान ने अपने प्रधानमंत्री कैमास कि सहायता से नागार्जुन व भण्डानको का विद्रोह दबाया।

-महोबा के चन्देलो पर विजय 1182 ई.-
-पृथ्वीराज चौहान ने 1182 ई. मे महोबा के चन्देल शासक परमारदि देव पर आक्रमण किया और परमारदि देव के दो विश्वास पात्र सैनापती आल्हा और उदल मारे गये।
-यह युद्ध रात्री मे लड़ा गया था।

-नागौर युद्ध 1184 ई.-
-यह युद्ध चालुक्य शासक भीम द्वितिय तथा पृथ्वीराज चौहान के मध्य हुआ जिसमे पृथ्वीराज चौहान कि जीत होती है।
-इस युद्ध मे भीम द्वितिय की तरफ से जगदेव प्रतिहार द्वारा युद्ध लड़ा गया।
-जगदेव प्रतिहार भीम द्वितिय का प्रधानमंत्री था।
-इस युद्ध के बाद दोनो राजाओ के मध्य संधि हुई।

-पृथ्वीराज चौहान व कन्नौज के राजा जयचन्द के मध्य संबंध-
-इनके मध्य विवाद के कारण
-(1) दिल्ली पर अधिकार करने हेतु दोनो के मध्य संबंध तनावपुर्ण थे।
-(2) साम्राज्यवादी महत्त्वाकांक्षा
-(3) पृथ्वीराज रासो/चन्द्रवरदायी के अनुसार दोनो शासको के मध्य विवाद का कारण कन्नौज के राजा जयचन्द की पुत्री संयोगीता थी।

-पृथ्वीराज चौहान व मौहमद गौरी के मध्य विवाद के कारण-
-(1) साम्राज्यवादी निति/साम्राज्य विस्तारवादी निति
-(2) विग्रहराज-चतुर्थ द्वारा पंजाब, मुल्लतान, हिसार पर अधिकार किया जो पूर्व मे गजनवी के अधिन थे
-(3) 1186 ई. मे मौहमद गौरी ने पंजाब पर अधिकार कर लिया जो विवाद का कारण बना।

-तराईन का प्रथम युद्ध 1191 ई.-
-तराईन हरियाणा के करनाल जिले मे स्थित है।
-यह युद्ध पृथ्वीराज चौहान तथा मौहमद गौरी के मध्य हुआ जिसमे पृथ्वीराज चौहान की जीत होती है।
-इस युद्ध मे पृथ्वीराज चौहान की सैना का नेतृत्व दिल्ली का गवर्नर गोविन्दराज कर रहा था।
-1191 ई. के तराईन के युद्ध मे पृथ्वीराज चौहान द्वारा भागती हुई मौहमद गौरी की सैना पर आक्रमण न करना पृथ्वीराज चौहान की बड़ी राजनैतिक भुल थी।

-तराईन का द्वितीय युद्ध 1192 ई.-
-यह युद्ध पृथ्वीराज चौहान तथा मौहमद गौरी के मध्य होता है। जिसमे मौहमद गौरी कि जीत होती है।
-इस युद्ध मे भी पृथ्वीराज चौहान का सैनापती दिल्ली का गवर्नर गोविन्दराज था।
-मौहमद गोरी का सैनापती कुतुबुद्दीन ऐबक था।
-इस युद्ध मे पृथ्वीराज चौहान को कैद कर लिया गया।
-पृथ्वीराज रासो/चन्द्रवरदायी के अनुसार पृथ्वीराज चौहान को गजनी ले जाया गया। जहा शब्दभेदि बाण चलाकर पृथ्वीराज चौहान व मोहमद गौरी की हत्या हो गयी।
-पृथ्वीराज चौहान की हत्या हरियाणा के सिरसा मे कि गई।
-पृथ्वीराज चौहान के बाद अजमेर पर उनके बेटे गोविन्दराज का अधिकार हो गया। और इनके चाचा हरिराज ने गोविन्दराज को अजमेर से निकाल दिया।
-गोविन्दराज ने 1194 ई. मे रणथम्भोर मे चौहान वंश की निव डाली
-पृथ्वीराज चौहान का मकबरा अफगानिस्तान मे है। तथा पृथ्वीराज चौहान का स्मार्क तारागढ़ दुर्ग मे है।
-1192 मे मौहमद गौरी के साथ सुफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भारत आये।
-पृथ्वीराज चौहान के समय मे ही अजमेर मे ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने अपनी खानकाह (पूजा स्थल/आराध्य स्थल) स्थापित की।
-पृथ्वीराज चौहान के समय संस्कृत कण्ठाभरण विधालय मे 85 विषयो मे अध्यापन का कार्य किया जाता था।

-तराईन के द्वितीय युद्ध का महत्त्व-
-भारत मे मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना हो गई।

-पृथ्वीराज चौहान के दरबारी कवि-
-(1) चन्द्रवरदायी
-(2) जयानक
-(3) विश्वरूप
-(4) भाव भट्ट/पृथ्वी भट्ट
-(5) जनारदन
-(6) वागिश्वर

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