चौहान वंश (रणथम्भौर के चौहान)

* रणथम्भौर के चौहान-
-सन् 1194 ई. मे पृथ्वीराज चौहान के पुत्र गोविन्दराज ने रणथम्भौर मे चौहान वंश की निव डाली।

* हम्मीर देव चौहान (1282-1301 ई.)-
-हम्मीर देव चौहान के शासन की जानकारी के ग्रंथ-
-(1) हम्मीर महाकाव्य-
-भाषा- संस्कृत
-लेखक- नयनचन्द्र सूरी
-विशेष- इस ग्रंथ मे राजपुतो को सूर्यवंशी बताया है।

-(2) हम्मीर रासो-
-भाषा- राजस्थानी
-लेखक- जौधराज
-विशेष- इस ग्रंथ मे हम्मीर देव चौहान के कोटिय जन यज्ञ व शासन प्रबंध की जानकारी का उल्लेख है।

-(3) हम्मीर रासो-
-भाषा- राजस्थानी
-लेखक- सारंगधर
-विशेष- इस ग्रंथ मे 1301 ई. मे अलाऊद्दीन खिलजी और हम्मीर देव चौहान के मध्य युद्ध की जानकारी व 1301 ई. मे राजस्थान के प्रथम जौहर का उल्लेख है।

-(4) हम्मीर मद मर्दन-
-भाषा- राजस्थानी
-लेखक- जयसिंह सूरी

-(5) हम्मीर हठ-
-भाषा- राजस्थानी
-लेखक- चन्द्रशेखर
-विशेष- इस ग्रंथ के अनुसार अलाऊद्दीन खिलजी और हम्मीर देव चौहान के मध्य विवाद का मुख्य कारण चिमना को माना गया है।

-हम्मीर देव चौहान ने शासन ग्रहण करने के बाद दिगविजय अभियान प्रारम्भ किया।
-हम्मीर देव चौहान ने दिगविजय अभियान के बाद कोटिय जन यज्ञ किया जिसके पुरोहित विश्वरूप थे।
-हम्मीर देव चौहान दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश के दो शासक जलालुद्दीन खिलजी व अलाऊद्दीन खिलजी के समकालीन था।

-जलालुद्दीन खिलजी का रणथम्भौर आक्रमण-
-जलालुद्दीन खिलजी ने जब रणथम्भौर पर आक्रमण किया उस समय रणथम्भौर का शासक हम्मीर देव चौहान  था।
-1291 ई. मे जलालुद्दीन खिलजी के इस आक्रमण के दौरान जलालुद्दीन खिलजी ने रणथम्भौर के सहायक दुर्ग झाईन दुर्ग/झाई दुर्ग पर आक्रमण कर दिया परन्तु रणथम्भौर जिलने मे असफल रहा।
-1292 ई. मे जलालुद्दीन खिलजी ने पुनः रणथम्भौर पर आक्रमण किया और असफल रहा।
-जलालुद्दी खिलजी ने रणथम्भौर दुर्ग के लिए यह कथन कहा कि 'मै ऐसे 10 दुर्गो को भी मुस्लमान के एक बाल के बराबर का महत्त्व नही देता'

-हम्मीर देव चौहान  व अलाऊद्दीन खिलजी के मध्य विवाद के कारण-
-(1) साम्राज्यवादी महत्त्वकांक्षा/साम्राज्यवादी विस्तार निति
-(2) रणथम्भौर दुर्ग का सामरीक महत्त्व
-(3) रणथम्भौर दुर्ग का व्यापारिक मार्ग पर स्थित होना।
-(4) हम्मीर देव चौहान द्वारा अलाऊद्दीन खिलजी के भगोड़े नव मुस्लमान मुहम्मद शाह को शरण देना।

-हम्मीर हठ के अनुसार मुहम्मद शाह और अलाऊद्दीन खिलजी की पत्नी चिमना के मध्य प्रेम संबंध थे।
-अलाऊद्दीन खिलजी ने 1299 ई. मे नुसरत खाँ और उलूग खाँ को एक विशाल सैना देकर भेजा था।
-रणथम्भौर आक्रमण के दौरान अलाऊद्दीन खिलजी ने अपना प्रधान सैनापती उलूग खाँ को नियुक्त किया था।
-रणथम्भौर के सहायक दुर्ग झाईन के दुर्ग पर अधिकार करते समय अलाऊद्दीन खिलजी का प्रिय सैनापती नुसरत खाँ मारा गया था।
-इस घटना के बाद अलाऊद्दीन खिलजी स्वयम् युद्ध भूमी पँहुचे थे।
-अलाऊद्दीन खिलजी ने हम्मीर देव चौहान के विश्वासपात्र सैनापती रणमल, रतिपाल तथा सुजानशाह को अपने पक्ष मे मिलाकर आक्रमण किया।
-11 जुलाई 1301 ई. मे अलाऊद्दीन खिलजी का रणथम्भौर पर अधिकार हो गया था।
-इस युद्ध मे हम्मीर देव चौहान मारा गया था।
-हम्मीर देव चौहान की पत्नी रंगदेवी द्वारा जौहर किया गया जो कि राजस्थान का प्रथम जौहर था। (यह जल जौहर था)
-हम्मीर देव चौहान ने अपने शासन काल मे 17 युद्ध लड़े जिसमे 16 मे विजयी रहा था।
-इस युद्ध मे अलाऊद्दीन खिलजी के साथ इतिहासकार अमीर खुसरो भी था।

No comments:

Post a comment

पोस्ट पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, यदि आपको ये पोस्ट अच्छी लगी तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें और अपना कीमती सुझाव देने के लिए यहां कमेंट करें, पोस्ट से संबंधित आपका किसी भी प्रकार का सवाल जवाब हो तो कमेंट में पूछ सकते है।