आमेर का कछवाह वंश

* आमेर का कछवाह वंश
-कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार नरवर (ग्वालियर, मध्यप्रदेश) कि निव 826 ई. मे राजा नल के द्वारा रखी गयी थी।
-आमेर के कछवाह वंश के शासक स्वयम् को राम के पुत्र कुश का वंशज मानते है।

* दुल्हराय-
-1137 ई. मे ग्वालियर से आकर दुल्हराय ने दौसा के बड़गुजरो को पराजित किया और कछवाह वंश/ढ़ुंढ़ाड़ वंश की निव रखी थी।
-दुल्हराय ने दौसा के बाद माची पर आक्रमण किया और माची के मीणाओ को पराजित करके माची को अपनी राजधानी बनाया।
-माची का नाम बदलकर रामगढ़ रख दिया।
-इस विजय के उपलक्ष मे दुल्हराय ने माची मे जमुवाय माता का मंदिर का निर्माण करवाया था।
-जमवाय माता आमेर के कछवाह वंश  कि कुल देवी है।
-जमवाय माता को अन्नापूर्णा माता भी कहा जाता है।
-जमुवा (रामगढ़) फुलो के लिए प्रसिद्ध है। तथा इसे ढ़ुंढ़ाड़ का पुष्कर भी कहा जाता है।
-दुल्हराय ने खोह पर भी अधिकार किया और अपनी राजधानी बनाया।

* कोकिल देव-
-कोकिल देव ने 1207 ई.  मे आमेर के मीणाओ को पराजित करके आमेर को अपनी राजधानी बनाया।
-कछवाह वंश की राजधानी आमेर 1207-1727 ई. तक रही थी।
-18 नवम्बर, 1727 को सवाई जयसिंह ने जयपुर की स्थापना कर अपनी राजधानी बनाया।

-आमेर के कछवाह वंश की राजधानीयो का क्रम-
-(1) दौसा
-(2) माची/रामगढ़
-(3) खोह
-(4) आमेर
-(5) जयपुर

-कोकिल के बाद पुर्णमल, भीमदेव और रतनसिंह अल्प समय के लिए शासक बने थे।
-आमेर के कछवाह वंश के शासक पृथ्वीराज कछवाह ने खानवा के युद्ध मे राणा सांगा की और से भाग लिया था।
-पृथ्वीराज कछवाह के पुत्र सांगा ने  सांगानेर बसाया था।

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