सिरोही के चौहान

👉 सिरोही के चौहान (चौहान वंश)-
✍ प्राचीन साहित्य में सिरोही को अर्बुद प्रदेश कहा गया है।
✍ कर्नल जैम्स टाॅड के अनुसार सिरोही का मूल नाम शिवपुरी था।
✍ मध्यकालीन भारत में सिरोही में परमारों का राज्य था जिसकी राजधानी चंद्रावती थी।




👉 लुम्बा-
✍ लुम्बा ने 1311 ई. में आबु और चंद्रावती को परमारो से छीनकर अपनी स्वतंत्रता स्थापित की।
✍ लुम्बा के द्वारा 1311 ई. में चौहानों की देवड़ा शाखा की स्थापना की गई।
✍ लुम्बा को सिरोही के चौहानों का अादिपुरुष कहा जाता है।

👉 अखैराज देवड़ा प्रथम-
✍ उपनाम- उड़ना अखैराज (तेज गति से आक्रमण करने के कारण)
✍ अखैराज देवड़ा प्रथम ने 1527 ई. में हुए खानवा के युद्ध में महाराणा साँगा का साथ दिया।

👉 सिरोही-
✍ स्थापना- 1425 ई.
✍ संस्थापक- सहासमल
✍ सहासमल ने सिरोही को अपनी राजधानी बनायी।
✍ 1823 ई. में सिरोही के शासक शिवसिंह ने ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि की जो की अंग्रेजो (ईस्ट इंडिया कंपनी) की सहायक संधि स्वीकार करने वाली अंतिम रियासत सिरोही थी।
✍ सिरोही रियासत का राजस्थान में एकीकरण विलय दो चरणों में किया गया।
✍ 26 जनवरी 1950 को  आबु और देलवाड़ा को छोड़कर सिरोही को राजस्थान में मिलाया गया।
✍ 1 नवम्बर 1956 को आबु और देलवाड़ा को राजस्थान में शामिल कर राजस्थान का एकीकरण पुरा किया गया।


No comments:

Post a Comment

कृपया कमेंट में कोई भी लिंक ना डालें