चित्तौड़गढ़ दुर्ग (चित्तौड़गढ़, राजस्थान)

👉 चित्तौड़गढ़ दुर्ग - महत्त्वपूर्ण तथ्य-



✍ चित्तौड़गढ़ दुर्ग दुर्गो की गिरी श्रेणी में आता है।
✍ चित्तौड़गढ़ दुर्ग की ऊंचाई 1810 फिट है।
✍ चित्तौड़गढ़ दुर्ग का कुल क्षेत्रफल 28 वर्ग किलोमीटर है।
✍ क्षेत्रफल कि दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा दुर्ग चित्तौड़गढ़ दुर्ग है।
✍ चित्तौड़गढ़ दुर्ग की परिधि 13 किलोमीटर है।
✍ चित्तौड़गढ़ दुर्ग राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है।
✍ चित्तौड़गढ़ दुर्ग की आकृति व्हेल मछली के समान है।
✍ चित्तौड़गढ़ दुर्ग का वास्तविक नाम चित्रकुट दुर्ग है।
✍ चित्तौड़गढ़ दुर्ग मेसा के पठार पर स्थित है।
 चित्तौड़गढ़ दुर्ग गंभीरी तथा बेड़च नदियो के संगम या किनारे पर स्थित है।
 श्यामल दास कि पुस्तक वीर विनोद के अनुसार चितौड़गढ़ दुर्ग का निर्माण 7 वी शताब्दी मे चित्रांगद/चित्रांगन मौर्य ने करवाया था।
✍ चित्तौड़गढ़ दुर्ग का आधुनिक निर्माता महाराणा कुंम्भा था।
 चितौड़गढ़ दुर्ग मे कुल 7 दरवाजे है जिनमे से प्रथम दरवाजा पाण्डनपोल व अंतिम दरवाजा राम पोल के नाम से जाना जाता है।
 गढ़ तो चितौड़गढ़ है बाकी सब गढ़ेया है।
✍ राजस्थान का यह एकमात्र दुर्ग है जिसके अन्दर कृषि कि जाती है।
✍ यह राजस्थान का सबसे बड़ा लिविंग फोर्ट/रिहायसि दुर्ग है।
✍ चित्तौड़गढ़ दुर्ग के उपनाम-
1. राजस्थान का गौरव
2. गढ़ो का सिरमौर
3. मालवा का प्रवेश द्वार
4. दक्षिणी राजस्थान का प्रवेश द्वार

👉 बप्पा रावल-
✍ बप्पा रावल का वास्तविक नाम कालभोज था।
✍ बप्पा रावल के गुरु का नाम हारित ऋषि था।
✍ बप्पा रावल के इष्ट देव एकलिंग जी थे।
✍ बप्पा रावल का समाधि स्थल नागदा में है।
✍ नागदा चितौड़गढ़/मेवाड़ कि प्रथम राजधानी थी।
✍ 734 ई. मे बप्पा रावल ने अपने गुरु हारित ऋषि के वरदान से चितौड़गढ़ दुर्ग पर आक्रमण किया तथा यहा के शासक मानमोरी को प्राजीत कर इस दुर्ग पर अधिकार किया।

👉 दर्शनिय स्थल-
1. विजय स्तम्भ-
✍ विजय स्तम्भ का निर्माता महाराणा कुंम्भा ने सन् 1440 से1448 के बीच करवाया था।
✍ विजय स्तम्भ के वास्तुकार जैता, नापा, पोमा, पूँजा थे।
✍ विजय स्तम्भ की ऊँचाई 120 फिट है।
✍ विजय स्तम्भ कुल 9 मंजिला इमारत है।
✍ विजय स्तम्भ में कुल 157 सिढ़िया स्थित है।
✍ फगर्युसन के द्वारा विजय स्तम्भ की तुलना रोम के टार्जन से की गई है।
✍ विजय स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुंम्भा ने सारंगपुर/मालवा विजय के उपलक्ष मे करवाया था।
✍ सारंगपुर/मालवा युद्ध 1437 ई. मे महाराणा कुंम्भा व महमूद खिलजी के मध्य हुआ था जिसमे महाराणा कुंम्भा विजय हुई।
✍ राजस्थान पुलिस व माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का प्रतिक चिन्ह विजय स्तम्भ से लिया गया है।
✍ भारत सरकार ने 15 अगस्त 1949 को विजय स्तम्भ के नाम पर 1 रुपये की डाक टिकट जारी कर रखी है।
✍ विजय स्तम्भ के उपनाम-
1. हिन्दू देवी देवताओ का अजायब घर
2. भारतीय मुर्तिकला का विश्व कोष
3. राजस्थानी मुर्तिकला का अनमोल खजाना
4. विष्णु ध्वज (विजय स्तम्भ पर भगवान विष्णु कि मुर्ति होने के कारण)
5. विष्णु स्तम्भ

2. किर्ति स्तम्भ-
✍ निर्माण- सन् 1170 मे जैन धर्म के व्यापारी बघेरवाल जीजा जैन ने करवाया
✍ ऊँचाई- 75 फिट
✍ मंजिला- 7
✍ समर्पित- यह स्तम्भ भगवान आदीनाथ को समर्पित है
✍ जैन किर्ति स्तम्भ शिलालेख लिखने कि सुरूआत कवि अत्री ने कि थी लेकिन इसको पुरा उनके पुत्र महेश ने किया था

👉 चितौड़गढ़ दुर्ग के प्रसिद्ध मंदिर-
1. मीरा बाई का मंदिर
2. कुंभ स्वामी मंदिर
3. सतबीस देवरी मंदिर (27 छोटे-छोटे जैन मंदिरो का समुह)
4. तुलजा माता मंदिर- यह मंदिर पृथ्वीराज सिसोदिया के बेटे बनवीर ने बनवाया था तथा तुलजा माता मराठा शासक शिवाजी कि अराध्य देवी मानी जाती है
5. कालिका माता मंदिर- इस मंदिर का निर्माण मौर्य वंश के राजा मानमौरी ने करवाया था तथा यह मंदिर राजस्थान मे भगवान सूर्य का सबसे प्राचीनतम मंदिर है
6. श्रृंगार चवरी- यह मंदिर जैन धर्म के 16 वे तिर्थकर शांतिनाथ का मंदिर है जिसका निर्माण वेलका ने करवाया था
7. समिद्धेश्वर का मंदिर- यह मंदिर राजा भोज के द्वारा बनवाया गाया था जिसका जीर्णोधार (पुनः निर्माण) महाराणा मोकल ने करवाया था इसिलिए इस मंदिर को मोकल जी का मंदिर भी कहते है

👉 चितौड़गढ़ दुर्ग कि प्रसिद्ध छतरीया-
(1) रैदास कि छतरी (रैदास/रविदास मीराबाई के गुरू)
(2) कल्ला जी कि छतरी
(3) जयमल व फत्ता कि छतरी

👉 चितौड़गढ़ दुर्ग कि प्रसिद्ध हवेलिया-
(1) जयमल व फत्ता कि हवेली
(2) सलूम्बर कि हवेली
(3) भामाशाह कि हवेली

👉 चितौड़गढ़ दुर्ग के प्रसिद्ध महल-
(1) गोरा व बादल महल
(2) फत्तह प्रकाश महल
(3) कुंम्भा महल-
✍ कुंम्भा महल को 9 कोठा महल तथा नवलखा महल के नाम से जाना जाता है।
✍ कुंम्भा महल मे राणा सांगा के पुत्र उदयसिंह का जन्म हुआ था जिसको पृथ्वीराज सिसोदिया का पुत्र बनवीर जान से मारना चाहता था।
✍ उदयसिंह कि धाय माँ श्रीमती पन्ना ने बनवीर से उदयसिंह को बचाते हुए अपने पुत्र चन्दन का बलीदान दिया था इसिलिए राजस्थान मे पन्ना धाय स्वामी भक्ती के लिए प्रसिद्ध है।
✍ पृथ्वीराज सिसोदिया को उड़णिया राजकुमार कहते है।

👉 चितौड़गढ़ दुर्ग के साके-
✍ चितौड़गढ़ दुर्ग में सर्वाधिक साके हुए है।
✍ चित्तौड़गढ़ दुर्ग में कुल तीन साके हुए है।

👉 केशरीया- युद्ध मे राजा का शहीद होना
👉 जौहर- युद्ध मे रानीयो का शहीद होना
👉 साका- केशरीया व जौहर होना

👉 चित्तौड़गढ़ दुर्ग के प्रमुख साके-


1. चित्तौड़गढ़ दुर्ग का पहला साका-

✍ प्रथम साके के दौरान 1303 ई. मे अलाउद्दीन खिलजी तथा चितौड़गढ़ के शासक रावल रतनसिंह के बीच युद्ध हुआ जिसमे अलाऊद्दीन खिलजी कि जीत होती है।

✍ चितौड़गढ़ का प्रथम साका राजस्थान का सबसे बड़ा व सबसे पवित्र अग्नि जौहर माना जाता है।
✍ राणा रतनसिंह के 2 विश्सनिय सैनापती गौरा व बादल शहीद हो जाते है।
✍ गौरा व बादल रानी पद्मिनी के चाचा व भतीजा थे।

👉 खिज्राबाद- अलाऊद्दीन खिलजी ने चितौड़ दुर्ग पर अधिकार कर इसका परिवर्तित नाम खिज्राबाद रखा था तथा अपने पुत्र खिज्र खाँ को यहा का शासक नियुक्त किया था

👉 रानी पद्मिनी-
✍ रानी पद्मिनी मूल रूप से सिहली द्वीप की निवासी थी।
✍ सिहली द्वीप का नया नाम श्रीलंका है।
✍ रानी पद्मिनी के पिता का नाम राजा गंधर्व सैन तथा माता का नाम चम्पावती था।
✍ चितौड़गढ़ आक्रमण के पिछे अलाऊद्दीन खिलजी का मुख्य उद्देश्य सम्राज्यवाद निति तथा रानी पद्धमिनी को प्राप्त करना था।

👉 चेतन भगत-
✍ चितौड़गढ़ आक्रमण के दौरान चेतन भगत नाम के सैनिक ने हि रावल रतनसिंह के साथ विश्वास घात किया था।

👉 अमीर खुसरो-
✍ अमीर खुसरो के उपनाम-
1. तोता-ए-हिंद/भारतीय तोता
2. तबला तथा वीणा का जनक
✍ अमीर खुसरो प्रसिद्ध सुफि संत शेख निजामुद्दीन ओलिया का शिष्य था।
✍ निजामुद्दीन ओलिया की दरगाह दिल्ली मे स्थित है।
✍ दिल्ली के 7 सुलतानो का काल देखने वाले गुरु व शिष्य निजामुद्दीन ओलिया व अमीर खुसरो थे।
✍ चितौड़गढ़ के प्रथम युद्ध का आखो देखा वर्णन अमीर खुसरो ने अपने ग्रंथ खजाइन-उल-फतह/तारीख-ए-अलाई मे किया था

2. चित्तौड़गढ़ दुर्ग का दुसरा साका-
✍ चितौड़गढ़ के दुसरे साके के दौरान 1534 ई. मे गुजरात के शासक बहादुर शाह तथा राणा सांगा कि विधवा पत्नी रानी कर्मावती के बीच युद्ध हुआ जिसमे बहादुर शाह कि जीत होती है
✍ इस युद्ध मे बहादुर शाह का सैनापती रूमी खाँ था
✍ राजमाता कर्मावती ने सहायता हेतु मुगल शासक हुमायु को राखी भेजी थी लेकिन हुमायु समय पर नही पहुच पाया था

👉 रावत बाघसिंह-
✍ रावत बाघसिंह प्रतापगढ़ के शासक थे जिन्होने इस युद्ध के दौरान रानी कर्मावती कि सहायता कि थी।

3. चित्तौड़गढ़ दुर्ग का तीसरा साका-
✍ इस साके के दौरान 1567 मे अकबर तथा राणा सांगा के पुत्र उदयसिंह के बीच युद्ध हुआ जिसमे अकबर कि जीत होती है
✍ चितौड़गढ़ का तीसरा युद्ध लड़ने से पहले महाराणा उदयसिंह चितौड़गढ़ छोड़कर गोगुंदा चले गये थे
✍ जयमल व फत्ता उदयसिंह के सैनापती थे जो इस युद्ध मे शहीद हो जाते है

👉 फुल कवर-
✍ ये फत्ता सिसोदिया कि रानी थी जिनके नेतृत्व मे अन्य राजपुत रानीयो ने जौहर किया था

👉 आगरा का किला-
✍ चितौड़गढ़ जितने के बाद अकबर ने जयमल राठौड़ तथा फत्ता सिसोदिया कि मुर्तिया आगरा के किले के सामने लगवायी थी तथा बीकानेर के राजा रायसिंह ने इन मुर्तियो को आगरा से हटाकर बीकानेर के किले मे लगवायी थी

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