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रणथम्भौर दुर्ग (सवाईमाधोपुर, राजस्थान)

श्रेणी-
रणथम्भौर दुर्ग दुर्गों की गिरि श्रेणी, वन श्रेणी तथा ऐरण श्रेणी तीनों श्रेणियों में आता है।

स्थान-
रणथम्भौर दुर्ग राजस्थान राज्य के सवाईमाधोपुर जिले की थंभौर पहाड़ी पर स्थित है।

प्राचीन नाम (वास्तविक नाम)-
रणथम्भौर दुर्ग का प्राचीन नाम या वास्तविक नाम रणस्तम्भपुर (रन्तःपुर) है जिसका अर्थ है रण की घाटी में स्थित नगर।

उपनाम या अन्य नाम-
रणथम्भौर दुर्ग का उपनाम या अन्य नाम दुर्गा धिराज है।

निर्माता-
रणथम्भौर दुर्ग का निर्माण रणथम्भन देव (रणथम्मन देव) के द्वारा करवाया गया था।

कथन-
रणथम्भौर दुर्ग के बारे में अबुल फजल ने यह कथन कहा है कि "अन्य सब दुर्ग नंगे है जबकि यह दुर्ग बख्तरबंद है।" तथा रणथम्भौर दुर्ग के बारे में जलालुद्दीन ने भी कथन कहा है कि "मैं ऐसे 10 दुर्गों को मुसलमान के एक बाल के बराबर भी नहीं समझता"। रणथम्भौर दुर्ग के बारे में अमीर खुसरो ने  यह कथन कहा है कि "कुफ्र का गढ़ इस्लाम का घर हो गया है।"

कहावत-
"सिंह सुवन, सत पुरुष वचन, कदली फल एकबार, तिरिया तेल, हम्मीर हठ चढे ना दूजी बार" यह कहावत रणथम्भौर दुर्ग के शासक हम्मीर देव चौहान की हठ एवं प्रण के बारे में राजस्थान में प्रसिद्ध है।

दर्शनिय स्थल-
रणथम्भौर दुर्ग में स्थित दर्शनिय स्थल निम्नलिखित है। जैसे-
1. त्रिनेत्र गणेश जी का मंदिर
2. सुपारी महल
3. जौहरा भौहरा महल
4. जोगी महल
5. 32 खम्भो की छतरी या न्याय की छतरी
6. हम्मीर महल
7. हम्मीर कचहरी
8. रानीहाड़ तालाब
9. कुत्ते की छतरी

1. त्रिनेत्र गणेश जी का मंदिर-
त्रिनेत्र गणेश जी का मंदिर राजस्थान राज्य के सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर दुर्ग में स्थित है। त्रिनेत्र गणेश जी का मंदिर राजस्थान का एकमात्र ऐसा गणेश जी का मंदिर है जहां पर गणेश जी के मुख की पूजा की जाती है। राजस्थान में शादी विवाह के शुभ अवसर पर पहला निमंत्रण त्रिनेत्र गणेश जी के मंदिर में ही भेजा जाता है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को (गणेश चतुर्थी को) राजस्थान के त्रिनेत्र गणेश जी के मंदिर में मेला भरता है।

राजस्थान में स्थित अन्य गणेश जी के मंदिर-
  • खड़े गणेश जी का मंदिर
  • नृत्य गणेश जी का मंदिर
  • बाजना गणेश जी का मंदिर
  • सिंह पर सवार गणेश जी का मंदिर
खड़े गणेश जी का मंदिर-
खड़े गणेश जी का मंदिर राजस्थान राज्य के कोटा जिले में स्थित है।

नृत्य गणेश जी का मंदिर-
नृत्य गणेश जी का मंदिर राजस्थान राज्य के अलवर जिले में स्थित है।

बाजना गणेश जी का मंदिर-
बाजना गणेश जी का मंदिर राजस्थान राज्य के सिरोही जिले में स्थित है।

सिंह पर सवार गणेश जी का मंदिर-
सिंह पर सवार गणेश जी का मंदिर राजस्थान राज्य के बीकानेर जिले में स्थित है।

2. सुपारी महल-
सुपारी महल राजस्थान राज्य के सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर दुर्ग में स्थित है।

3. जौहरा भौहरा महल-
जौहरा भौहरा महल राजस्थान राज्य के सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर दुर्ग में स्थित है।

4. जोगी महल-
जोगी महल राजस्थान राज्य के सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर दुर्ग में स्थित है।

5. 32 खम्भो की छतरी (न्याय की छतरी)-
32 खम्भो की छतरी राजस्थान राज्य के सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर दुर्ग में स्थित है। 32 खम्भो की छतरी को न्याय की छतरी भी कहते है।

6. हम्मीर महल-
हम्मीर महल राजस्थान राज्य के सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर दुर्ग में स्थित है।

7. हम्मीर कचहरी-
हम्मीर कचहरी राजस्थान राज्य के सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर दुर्ग में स्थित है।

8. रानीहाड़ तालाब-
रानीहाड़ तालाब राजस्थान राज्य के सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर दुर्ग में स्थित है।

9. कुत्ते की छतरी-
कुत्ते की छतरी राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले के रणथम्भौर दुर्ग में स्थित है। यह कुत्ते की छतरी राजस्थान की एकमात्र कुत्ते की छतरी है।

प्रवेश द्वार-
रणथम्भौर दुर्ग के मुख्य दरवाजे या प्रवेश द्वार को नौलखा दरवाजा कहा जाता है।

राजस्थान में नौलखा नाम से प्रसिद्ध अन्य प्रमुख स्थल-
  • नौलखा महल
  • नौलखा किला
  • नौलखा झील
  • नौलखा बावड़ी
नौलखा महल-
नौलखा महल राजस्थान राज्य के चित्तौड़गढ़ जिले के चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित है।

नौलखा किला-
नौलखा किला राजस्थान राज्य के झालावाड़ जिले में स्थित है।

नौलखा झील-
नौलखा झील राजस्थान राज्य के बूंदी जिले में स्थित है।

नौलखा बावड़ी-
नौलखा बावड़ी राजस्थान राज्य के डूंगरपुर जिले में स्थित है।

झाईन दुर्ग-
रणथम्भौर दुर्ग या रणथम्भौर के किले की कुंजी झाईन दुर्ग को कहा जाता है।

युद्ध-
रणथम्भौर दुर्ग या रणथम्भौर के किले पर 1301 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने रणथम्भौर दुर्ग पर आक्रमण किया था। इस आक्रमण के दौरान रणथम्भौर दुर्ग का शासक हम्मीर देव चौहान था। इस युद्ध के दौरान हम्मीर देव चौहन वीरगति को प्राप्त हो गया। 11 जुलाई 1301 में हम्मीर देव चौहान की पत्नी रंगदेवी (रंगादेवी) के नेतृत्व में रणथम्भौर दुर्ग में स्थित पद्मला तालाब में कूदकर जल जौहर किया गया। यह जौहर राजस्थान इतिहास का पहला जौहर माना जाता है। तथा यह जल जौहर राजस्थान इतिहास का एकमात्र जल जौहर माना जाता है। रणथम्भौर युद्ध के दौरान अलाउद्दीन खिलजी के साथ इतिहासकार अमीर खुसरो भी था।

युद्ध का कारण-
हम्मीर देव चौहान के द्वारा अलाउद्दीन खिलजी के विद्रोही सेनापती मुहम्मद शाह को सरण प्रदान करना माना जाता है। अर्थात् अलाउद्दी खिलजी के सेनापती मुहम्मद शाह तथा अलाउद्दीन खिलजी की पत्नी चिमना के बीच प्रेम प्रसंग था तथा मुहम्मद शाह व चिमना को हम्मीर देव चौहान के द्वारा शरण प्रदान करना ही युद्ध का कारण बना।

युद्ध हारने का कारण-
रणथम्भौर दुर्ग पर 1301 ईस्वी में हुए युद्ध को हारने का प्रमुख कारण हम्मीर देव चौहान के दो विश्वासघाती सेनापती रणमल व रति पाल को माना जाता है।

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