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मालवा का परमार वंश

 मालवा का परमार वंश


मालवा (Malwa)-

➠मालवा में परमार वंश का शासन था।

➠मालवा के परमारो का उत्पत्ति स्थल भी आबू ही था।

➠मालवा की राजधानी पहले धार नगरी को बनाया गया था बाद में धार नगरी से बदलकर राजधानी उज्जैन को बनाया गया तथा उज्जैन से बदलकर राजधानी फिर से धार नगरी को बनाया गया था।

➠मालवा क्षेत्र में मालव नामक जाति के निवास करने कारण इस क्षेत्र को मालवा कहा जाने लगा था।


मालवा के परमार वंश के प्रमुख राजा-

1. कृष्णराज (Krishnaraj)

2. मुंज परमार (Munj Parmar)

3. सिंधुराज (Sindhuraj)

4. भोज परमार (Bhoja Parmar)


1. कृष्णराज (Krishnaraj)-

➠कृष्णराज का अन्य नाम उपेन्द्र (Upendra) है।

➠कृष्णराज के बेटे डम्बर सिंह (Dumbar Singh) ने वागड़ में परमार राज्य की स्थापना की थी।


2. मुंज परमार (Munj Parmar)-

➠मुंज परमार ने मेवाड़ के शक्ति कुमार पर आक्रमण किया था।

➠मेवाड़ पर आक्रमण के समय मुंज परमार ने आहड़ को तोड़ दिया था तथा चित्तौड़ के किले पर अधिकार कर लिया था इस जानकारी का उल्लेख हस्तिकुंडी अभिलेख में किया गया है।

➠मुंज परमार कर्नाटक के चालुक्य राजा तैलप द्वितीय (Teilap-II) के खिलाफ लड़ता हुआ मारा गया था।


मुंज परमार के दरबारी विद्वान-

1. हलायुध (Halayudha)

2. पद्मगुप्त (Padmagupta) या परिमल (Parimal)- पद्मगुप्त को ही परिमल कहा जाता है।

3. धनंजय (Dhananjaya)

4. धनपाल (Dhanpal)


मुंज परमार के दरबारी विद्वानों के द्वारा लिखी गई पुस्तके-

1. अभिधान रत्नमाला (Abhidhana Ratna Mala)- यह पुस्तक हलायुध के द्वारा लिखी गई थी। 

2. नवसाहसांक चरित (Navsahsank Charit)- यह पुस्तक पद्मगुप्त या परिमल के द्वारा लिखी गई थी।

3. दशरूपकम् (Dasharupakam)- यह पुस्तक धनंजय के द्वारा लिखी गई थी।

4. तिलकमंजरी (Tilakmanjari)- यह पुस्तक धनपाल के द्वारा लिखी गई थी।


मुंज परमार की उपाधि-

➠परमार वंश के राजा मुंज परमार को कवि वृष (Kavi Vrish) की उपाधि दी गई थी।


3. सिंधुराज (Sindhuraj)-

➠सिंधुराज मुंज परमार का छोटा भाई था।

➠सिंधुराज को नवसाहसांक (Navsahsank) नाम की उपाधि दी गई थी।


4. भोज परमार (Bhoja Parmar)-

➠भोज परमार ने चित्तौड़ में त्रिभुवन नारायण (Tribhuwan Narayan) मंदिर का निर्माण करवाया था।

➠त्रिभुवन नारायण मंदिर भगवान शिव का मंदिर है।

➠भोज परमार ने नागदा के पास भोजसर झील (Bhojsar Lake) का निर्माण करवाया था।

➠भोजसर झीस राजस्थान के उदयपुर जिल में स्थित है।

➠भोज परमार ने अपनी राजधानी धार नगरी (मालवा, मध्य प्रदेश) में सरस्वती कंठाभरण नामक संस्कृत पाठशाला का निर्माण करवाया था।

➠बाद में तुर्कों ने सरस्वती कंठाभरण पाठशाला को तोड़ दिया तथा इसके स्थान पर कमालमौला  मस्जिद का निर्माण करवाया था।

➠सरस्वती कंठाभरण पाठशाला की दिवारों पर भोज परमार की पुस्तक कूर्म शतक तथा पारिजात मंजरी की पंक्तियां लिखवायी गई थी।

➠पारिजात मंजरी नामक पुस्तक की रचना मदन ने की थी।

➠मदन मालवा के राजा अर्जुनवर्मा का दरवारी विद्वान था।


भोज परमार के द्वारा लिखी गई पुस्तके-

1. शृंगार मंजरी कथा (Sringar Manjari Katha)

2. कूर्म शतक (Kurma Shatak)- यह पुस्तक प्राकृत भाषा में लिखी गई है।


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