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आमेर (जयपुर) का कछवाहा वंश

आमेर या जयपुर का कछवाहा वंश


आमेर या जयपुर-

➠आमेर या जयपुर में कछवाहा वंश का शासन था


आमेर के कछवाहा वंश के प्रमुख राजा-

1. दुल्हेराय (दुलहराय)

2. काकिलदेव

3. राजदेव

4. भारमल (1547- 1573 ई.)

5. भगवानदास या भगवंतदास (1573- 1589 ई.)

6. मानसिंह (1589- 1614 ई.)

7. मिर्जा राजा जयसिंह (1621- 1667 ई.)

8. सवाई जयसिंह (1700- 1743 ई.)

9. सवाई ईश्वरीसिंह (1743- 1750 ई.)

10. सवाई माधोसिंह प्रथम (1750- 1768 ई.)

11. सवाई प्रतापसिंह (1778-1803 ई.)

12. सवाई जगतसिंह द्वितीय (1803-1818 ई.)

13. सवाई रामसिंह द्वितीय (1835-1880 ई.)

14. सवाई माधोसिंह द्वितीय (1880-1922 ई.)

15. सवाई मानसिंह द्वितीय (1922- 1947 ई.)


1. दुल्हेराय (दुलहराय)-

➠दुल्हेराय का वास्तविक नाम तेजकरण था।

➠1137 ई. में दुल्हेराय नरवर से राजस्थान आया था।

➠नरवर नामक स्थान मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है।


दौसा-

➠दुल्हेराय ने दौसा के बड़दुर्जरों को हराकर दौसा पर अधिकार कर लिया था।

➠दुल्हेराज ने दौसा पर अधिकार करने के बाद दौसा को अपनी राजधानी बनाया था।

➠कछवाहा वंश की पहली राजधानी दौसा थी।


रामगढ़ (जमवारामगढ़)-

➠दुल्हेराय ने रामगढ़ के मीणाओं को हराकर रामगढ़ पर अधिकार कर लिया था।

➠दुल्हेराय ने रामगढ़ पर अधिकार करने के बाद रामगढ़ को अपनी दूसरी राजधानी बनाया था।

➠कछवाहा वंश की दूसरी राजधानी रामगढ़ थी।

➠दुल्हेराय ने रामगढ़ में अपनी कुल देवी जमवाय माता का मंदिर बनवाया था।

➠कछवाहा वंश की कुल देवी जमवाय माता है।


2. काकिलदेव-

➠1207 ई. में काकिलदेव ने आमेर के मीणाओं को हराकर आमेर पर अधिकार कर लिया था।

➠काकिलदेव ने आमेर (जयपुर) पर अधिकार कर अपनी राजधानी बनाया था।

➠कछवाहा वंश की तीसरी राजधानी आमेर (जयपुर) थी।

➠काकिलदेव ने आमेर (जयपुर) में अंबिकेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया था।


3. राजदेव-

➠राजदेव ने आमेर (जयपुर) में कदमी महल का निर्माण करवाया था।

➠आमेर (जयपुर) के कदमी महल में आमेर के राजाओं का राजतिलक किया जाता था।


4. भारमल (1547- 1573 ई.)-

➠मजनूं खाँ तथा चगताई खाँ नामक दो व्यक्तियों की सहायता से भारमल ने अकबर से मुलाकात की थी।

➠1562 ई. में भारमल ने अकबर की अधिनता स्वीकार कर ली थी।

➠भारमल राजस्थान का पहला राजा था जिसने मुगलों की अधिनता स्वीकार की थी।


हरखाबाई-

➠भारमल ने सांभर में अपनी राजकुमारी हरखाबाई का विवाह मुगल बादशाह अकबर के साथ किया था।

➠हरखाबाई को मरियम उज्जमानी नामक उपाधि दी गई थी।

➠हरखाबाई के बेटे का नाम जहाँगीर था।


5. भगवानदास या भगवंतदास (1573- 1589 ई.)-

➠भगवंतदास ने सरनाल में मिर्जा विद्रोह को दबाया था।

➠भगवंतदास के द्वारा मिर्जा विद्रोह दबाने के कारण अकबर ने भगवंतदास को नगाड़ा तथा झंडा देकर सम्मानित किया था।

➠सरनाल नामक स्थान गुजरात राज्य में स्थित है।

➠मुगल बादशाह अकबर ने भगवंतदास को पंजाब का गवर्नर बनाया था।

➠भगवंतदास 7 वर्ष तक पंजाब का गवर्नर रहा था।


मानबाई-

➠भगवंतदास ने अपनी राजकुमारी मानबाई का विवाह जहाँगीर के साथ किया था।

➠मानबाई को शाह बेगम की उपाधि दी गई थी।

➠मानबाई के बेटे का नाम खुसरो था।

➠जहाँगीर की शराब की आदतों से परेशान होने के कारण मानबाई ने आत्महत्या कर ली थी।


6. मानसिंह (1589- 1614 ई.)-

➠मानसिंह के राजतिलक के समय अकबर ने मानसिंह को 5000 का मनसबदार बनाया था।

➠1605 ई. में अकबर ने मानसिंह को 7000 का मनसबदार बनाया था।

➠नासिर खाँ तथा कतलू खाँ को हराकर मानसिंह ने पूरी के जगन्नाथ मंदिर पर नियंत्रण स्थापित किया था।

➠मुगल बादशाह अकबर ने मानसिंह को काबुल, बंगाल तथा बिहार का गवर्नर बनाया था।

➠महाराष्ट्र में एलिचपुर नामक स्थान पर मानसिंह की मृत्यु हो गयी थी।


काबुल का गवर्नर (1581- 1586 ई.)-

➠अकबर ने मानसिंह को काबुल का गवर्नर बनाया था।

➠मानसिंह 1581 से 1586 तक काबुल का गवर्नर रहा था।

➠मानसिंह ने काबुल में मिर्जा हकीम के विद्रोह को दबाया था।

➠मानसिंह ने काबुल में पांच कबिलों को हराया था इसीलिए मानसिंह ने आमेर के झंडे का रंग पंचरंगा कर दिया था।


बंगाल का गवर्नर-

➠अकबर ने मानसिंह को बंगाल का गवर्नर बनाया था।

➠मानसिंह ने बंगाल में ढ़ाका के राजा केदार को हराया था।

➠मानसिंह बंगाल के ढ़ाका से शिला माता की मूर्ति लेकर आया था।

➠मानसिंह ने शिला माता की मूर्ति को आमेर (जयपुर) में स्थापित करवाया था। अर्थात् मानसिंह ने आमेर में शिला माता का मंदिर बनवाया था।

➠शिला माता आमेर के कछवाहा वंश की ईष्ट देवी है।


बिहार का गवर्नर-

➠अकबर ने मानसिंह को बिहार का गवर्नर बनाया था।

➠मानसिंह ने बिहार के गिद्धौर क्षेत्र के राजा पूरणमल को हराया था।

➠मानसिंह ने बिहार के गया क्षेत्र के राजा अनंत चेरू को हराया था।

➠मानसिंह ने बिहार के खुर्दा क्षेत्र के राजा रामचन्द्र देव के हराया था।


मानसिंह की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ-

1. नगर

2. किले

3. मंदिर


1. नगर-

(I) अकबर नगर (बंगाल)

(II) मानपुर (बिहार)


(I) अकबर नगर (बंगाल)-

➠मानसिंह ने बंगाल में अकबर नगर की स्थापना की थी।

➠मानसिंह के द्वारा बंगाल में बसाये गये अकबर नगर को वर्तमान में राजमहल के नाम से जाना जाता है।


(II) मानपुर (बिहार)-

➠मानसिंह ने बिहार में मानपुर की स्थापना की थी।


2. किले-

(I) रोहतासगढ़ का किला (बिहार)

(II) आमेर का किला (जयपुर)


(I) रोहतासगढ़ का किला (बिहार)-

➠मानसिंह ने बिहार में रोहतासगढ़ के किले का निर्माण करवाया था।


(II) आमेर का किला (जयपुर)-

➠मानसिंह ने जयपुर में आमेर के किले का निर्माण करवाया था।


3. मंदिर-

(I) भवानी शंकर मंदिर (बैकटपुर, बिहार)

(II) महादेव मंदिर (गया, बिहार)

(III) राधा गोविंद मंदिर (वृंदावन, उत्तर प्रदेश)

(IV) जगत शिरोमणि मंदिर (आमेर)


(I) भवानी शंकर मंदिर (बैकटपुर, बिहार)-

➠मानसिंह ने बिहार के बैकटपुर नामक स्थान पर भवानी शंकर मंदिर का निर्माण करवाया था।


(II) महादेव मंदिर (गया, बिहार)-

➠मानसिंह ने बिहार के गया नामक स्थान पर महादेव मंदिर का निर्माण करवाया था।


(III) राधा गोविंद मंदिर (वृंदावन, उत्तर प्रदेश)-

➠मानसिंह ने उत्तर प्रदेश के वृंदावन नामक स्थान पर राधा गोविंद मंदिर का निर्माण करवाया था।


(IV) जगत शिरोमणि मंदिर (आमेर)-

➠मानसिंह की रानी कनकावती ने अपने बेटे जगतसिंह की याद में जगत शिरोमणि मंदिर का निर्माण करवाया था।

➠जगत शिरोमणि मंदिर का निर्माण राजस्थान के आमेर (जयपुर) नामक स्थान पर करवाया गया था।

➠जगत शिरोमणि मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति है।

➠आमेर के जगत शिरोमणि मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की वही मूर्ति है जिसकी पूजा मीरा बाई चित्तौड़ में करती थी।

➠चित्तौड़ से भगवान श्री कृष्ण की यह मूर्ति मानसिंह लेकर आया था।


मानसिंह के दरबारी विद्वान-

1. पुंडरीक विट्ठल

2. राय मुरारी दास

3. जगन्नाथ


1. पुंडरीक विट्ठल-

➠पुंडरीक विट्ठल आमेर के राजा मानसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠पुंडरीक विट्ठल के द्वारा निम्नलिखित पुस्तके लिखी गई थी।

(I) राग माला

(II) राग मंजरी

(III) राग चंद्रोदय

(IV) नर्तन निर्णय


(I) राग माला-

➠पुंडरीक विट्ठल के द्वारा राग माला नामक पुस्तक लिखी गई थी।


(II) राग मंजरी-

➠पुंडरीक विट्ठल के द्वारा राग मंजरी नामक पुस्तक लिखी गई थी।


(III) राग चंद्रोदय-

➠पुंडरीक विट्ठल के द्वारा राग चंद्रोदय नामक पुस्तक लिखी गई थी।


(IV) नर्तन निर्णय-

➠पुंडरीक विट्ठल के द्वारा नर्तन निर्णय नामक पुस्तक लिखी गई थी।


2. राय मुरारी दास-

➠राय मुरारी दास आमेर के राजा मानसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠राय मुरारी के द्वारा मान प्रकास नामक पुस्तक लिखी गई थी।


3. जगन्नाथ-

➠जगन्नाथ आमेर के राजा मानसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠जगन्नाथ के द्वारा मानसिंह कीर्ति मुक्तावली नामक पुस्तक लिखी गई थी।

➠मानसिंह की उपाधियां-

1. मिर्जा राजा

2. फर्जन्द


1. मिर्जा राजा-

➠आमेर के राजा मानसिंह ने मिर्जा राजा की उपाधि धारण की थी।


2. फर्जन्द-

➠आमेर के राजा मानसिंह ने फर्जन्द की उपाधि धारण की थी।

➠फर्जन्द का अर्थ बेटा होता है।


7. मिर्जा राजा जयसिंह (1621- 1667 ई.)-

➠आमेर (जयपुर) के कछवाहा वंश के राजाओं में सबसे लम्बा शासन काल मिर्जा राजा जयसिंह का था।

➠मिर्जा राजा जयसिंह तीन मुगल बादशाहों के समकालीन था अर्थात् मिर्जा राजा जयसिंह ने जहाँगीर, शाहजहाँ तथा औरंगजेब के साथ कार्य किया था।

➠मुगल बादशाह जहाँगीर ने मिर्जा राजा जयसिंह को महाराष्ट्र के अहमद नगर के मलिक अम्बर के खिलाफ भेजा था।

➠मुगल बादशाह शाहजहाँ ने मिर्जा राजा जयसिंह को मिर्जा राजा की उपाधि दी थी।

➠शाहजहाँ ने मिर्जा राजा जयसिंह को कंधार अभियान पर भेजा था।

➠कंधान अफगानिस्तान मे स्थित एक जगह का नाम है।

➠मुगल बादशाह औरंगजेब ने मिर्जा राजा जयसिंह को शिवाजी के खिलाफ भेजा था।

➠महाराष्ट्र के बुरहानपुर में मिर्जा राजा जयसिंह की मृत्यु हो गई थी।


पुरन्दर की संधि (1665 ई.)-

➠पुरन्दर की संधि 1665 ई. में शिवाजी तथा मिर्जा राजा जयसिंह के मध्य हुई थी।

➠पुरन्दर की संधि में मिर्जा राजा जयसिंह मुगल बादशाह औरंगजेब की तरफ से संधि करने आया था।

➠निकोलो मनूची ने अपनी पुस्तक Storia Do Mogor (Storio Do Mogor) में पुरन्दर की संधि का वर्णन किया है।

➠निकोल मनूची इटली का निवासी था।


मिर्जा राजा जयसिंह की सांस्कृतिक उपलब्धियां-

➠मिर्जा राजा जयसिंह ने महाराष्ट्र में जयसिंह पुरा नामक नगर की स्थापना की थी।

➠मिर्जा राजा जयसिंह ने आमेर में जयगढ़ किले का निर्माण करवाया था।


जयगढ़-

➠जयगढ़ आमेर (जयपुर) की संकटकालीन राजधानी थी।

➠जयगढ़ के किले को  पहले चील का टोला कहा जाता था।


मिर्जा राजा जयसिंह के दरबारी विद्वान-

1. बिहारी जी

2. रायकवि

3. कुलपति मिश्र


1. बिहारी जी-

➠बिहारी जी मिर्जा राजा जयसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠बिहारी जी के द्वारा बिहारी सतसई नामक पुस्तक लिखी गई थी।


2. रायकवि-

➠रायकवि मिर्जा राजा जयसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠रायकवि के द्वारा जयसिंह चरित्र नामक पुस्तक लिखी गई थी।


3. कुलपति मिश्र-

➠कुलपति मिश्र मिर्जा राजा जयसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠कुलपति मिश्र बिहारी जी का भांजा था।

➠कुलपति मिश्र ने 52 पुस्तके लिखी थी।

➠कुलपति मिश्र के द्वारा लिखी गई पुस्तकों से मिर्जा राजा जयसिंह के दक्षिण अभियान की जानकारी मिलती है।


8. सवाई जयसिंह (1700- 1743 ई.)-

➠आमेर का राजा सवाई जयसिंह 7 मुगल बादशाहों के समकालिन था अर्थात् सवाई जयसिंह ने 7 मुगल शासकों के साथ कार्य किया था।

➠मुगल उत्तराधिकारी संघर्ष में सवाई जयसिंह ने मुअज्जम के खिलाफ आजम का साथ दिया था। मुअज्जम का साथ सवाई जयसिंह के भाई विजय सिंह ने दिया था।

➠मुगल उत्तराधिकारी संघर्ष में मुअज्जम जीत गया था।

➠उत्तराधिकारी संघर्ष में जितने के बाद मुअज्जम बहादुर शाह प्रथम के नाम से राजा बना था।

➠बहादुर शाह प्रथम ने आमेर पर आक्रमण किया था तथा सवाई जयसिंह को राजा के पद से हटाकर विजय सिंह को आमेर का राजा बनाया था।

➠आमेर जितने के बाद बहादुर शाह प्रथम ने आमेर का नाम बदलकर इस्लामाबाद या मोमिनाबाद कर दिया था।

➠1708 ई. में सवाई जयसिंह देबारी समझौते में शामिल हुआ था।

➠सवाई जयसिंह ने भरतपुर के राजा मोहकम सिंह के खिलाफ बदन सिंह का साथ दिया था। तथा बदन सिंह को भरतपुर का राजा बनाया गया था।

➠सवाई जयसिंह ने बदन सिंह को डीग की जागीर तथा बृजराज (ब्रजराज) की उपाधि दी थी।

➠मुगल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीला ने सवाई जयसिंह को राज राजेश्वर की उपाधि दी थी।


सांभर का युद्ध (1709 ई.)-

➠सांभर का युद्ध 1709 ई. में ल़ड़ा गया था।

➠सांभर का युद्ध मुगल सेनापति सैय्यद हुसैन तथा मारवाड़ के राजा अजीत सिंह एवं आमेर के राजा सवाई जयसिंह की संयुक्त सेना के मध्य लड़ा गया था।

➠सांभार के युद्ध में मारवाड़ के राजा अजीत सिंह तथा आमेर के राजा सवाई जयसिंह की संयुक्त सेना ने मुगल सेनापति सैय्यद हुसैन को हरा दिया था।

➠सांभर युद्ध के बाद सवाई जयसिंह ने आमेर पर पुनः अधिकार कर लिया था।

➠सांभर युद्ध के बाद सांभर झील पर मारवाड़ तथा आमेर का संयुक्त अधिकार था।


गंगवाना का युद्ध (1741 ई.)-

➠गंगवाना का युद्ध 1741 ई. में अजमेर के गंगवाना नामक स्थान पर लड़ा गया था।

➠गंगवाना का युद्ध मारवाड़ के राजा अभय सिंह तथा बीकानेर के राजा जोरावर सिंह के मध्य लड़ा गया था।

➠गंगवाना के युद्ध में सवाई जयसिंह ने बीकानेर के राजा जोरावर सिंह का साथ दिया था तथा अभय सिंह को हराया था।


मालवा का गवर्नर-

➠सवाई जयसिंह को तीन बार मालवा का गवर्नर बनाया गया था।


पिलसुद का युद्ध (1715 ई.)-

➠पिलसुद का युद्ध 10 मई 1715 ई. में हुआ था।

➠पिलसुद का युद्ध मराठों तथा सवाई जयसिंह के मध्य लड़ा गया था।

➠सवाई जयसिंह पिलसुद्ध के युद्ध में मुगलों की तरफ से लड़ा था।

➠पिलसुद के युद्ध में सवाई जयसिंह की जीत हुई थी।


मंदसौर का युद्ध (1733 ई.)-

➠मंदसौर का युद्ध 1733 ई. में हुआ था।

➠मंदसौर का युद्ध मराठों तथा सवाई जयसिंह के मध्य लड़ा गया था।

➠सवाई जयसिंह मंदसौर के युद्ध में मुगलों की तरफ से लड़ा था।

➠मंदसौर के युद्ध में मराठों की जीत हुई थी।


रामपुरा का युद्ध (1735 ई.)-

➠रामपुरा का युद्ध 1735 ई. में हुआ था।

➠रामपुरा का युद्ध मराठों तथा सवाई जयसिंह के मध्य लड़ा गया था।

➠सवाई जयसिंह रामपुरा के युद्ध में मुगलों की तरफ से लड़ा था।

➠रामपुरा के युद्ध में मराठों की जीत हुई थी।


धौलपुर समझौता (1741 ई.)-

➠1741 ई. में सवाई जयसिंह ने मराठा पेशवा बालाजी बाजीराव के साथ धौलपुर समझौता किया था।


सवाई जयसिंह की सांस्कृति उपलब्धियां-

➠सवाई जयसिंह ने अश्वमेध यज्ञ करवाया था।

➠सवाई जयसिंह के द्वारा करवाये गये अश्वमेध यज्ञ का पुरोहित पुंडरीक रत्नाकर था।

➠दीपसिंह कुम्भाणी ने अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा पकड़ा था।


1. स्थापत्य कला

2. साहित्य कला

3. चित्रकला


1. स्थापत्य कला-

(I) जयपुर

(II) नाहरगढ़ का किला (जयपुर)

(III) चंद्र महल या सिटी पैलेस (जयपुर)

(IV) सिसोदिया रानी का महल (जयपुर)

(V) जल महल (जयपुर)

(VI) गोविन्द देव जी मंदिर (जयपुर)

(VII) हरमाड़ा नहर (जयपुर)

(VIII) जंतर मंतर


(I) जयपुर-

➠जयपुर की स्थापना सवाई जयसिंह के द्वारा करवायी गई थी।

➠जयपुर की स्थापना 18 नवम्बर 1727 ई. में की गई थी।

➠जयपुर शहर के वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य थे।

➠जयपुर शहर की स्थापना में पुर्तगाली ज्योतिषी जेवियर डि सिल्वा की सहायता ली गई थी।

➠जयपुर को केन्टन शहर तथा बगदाद शहर की तर्ज पर बसाया गया था अर्थात् जयपुर को केन्टन शहर तथा बगदाद शहर की तरह बसाया गया था।

➠केन्टन चीन का एक शहर है तथा बगदाद इराक का एक शहर है।

➠जयपुर को 9 वर्गों के सिद्धान्त पर बसाया गया था।

➠जयपुर भारत का पहला आधुनिक एवं नियोजित शहर है। अर्थात् जयपुर को प्लानिंग के साथ व्यवस्थित रूप से बसाया गया है।

➠बादल महल जयपुर की पहली इमारत थी।

➠बादल महल को पहले शिकार होदी कहा जाता था।

➠बख्तराम शाह की पुस्तक बुद्धि विलास से जयपुर की स्थापना की जानकारी मिलती है।

➠जयपुर कछवाहा वंश की चौथी राजधानी थी।

➠2019 ई. में युनेस्को ने जयपुर को विश्व विरासत सूची में शामिल किया था।


(II) नाहरगढ़ का किला (जयपुर)-

➠नाहरगढ़ का किला मराठों के खिलाफ सुरक्षा के लिए बनाया गया था।

➠नाहरगढ़ किले का निर्माण जयपुर के राजा सवाई जयसिंह के द्वारा जयपुर में करवाया गया था।

➠नाहरगढ़ किले को जयपुर का पहरेदार कहा जाता था।

➠नाहरगढ़ किले का पहले नाम सुदर्शनगढ़ रखा गया था। अर्थात् नाहरगढ़ किले का दूसरा नाम सुदर्शन गढ़ है।


(III) चंद्र महल या सिटी पैलेस (जयपुर)-

➠चन्द्र महल का निर्माण जयपुर के राजा सवाई जयसिंह के द्वारा जयपुर में करवाया गया था।

➠चंद्र महल का वर्तमान नाम या नया नाम सिटी पैलेस है। अर्थात् चंद्र महल को सिटी पैलेस कहा जाता है।


(IV) सिसोदिय रानी का महल (जयपुर)-

➠जयपुर के राजा सवाई जयसिंह के द्वारा अपनी रानी चंद्र कंवर के लिए जयपुर में महल का निर्माण करवाया था। जिसे सिसोदिय रानी का महल कहा जाता है।


(V) जल महल (जयपुर)-

➠जल महल सवाई जयसिंह के द्वारा बनवाया गया था।

➠जल महल जयपुर की मानसागर झील में स्थित है।

➠जल महल में सवाई जयसिंह के द्वारा करवाये गये अश्वमेध यज्ञ के ब्राह्मणों को ठहराया गया था।


(VI) गोविन्द देव जी मंदिर (जयपुर)-

➠गोविन्द देव जी मंदिर का निर्माण सवाई जयसिंह ने जयपुर में करवाया था।

➠गोविन्द देव जी मंदिर गौड़ीय सम्प्रदाय (गोडीय सम्प्रदाय) से संबंधित है।

➠जयपुर के राजा खुद को गोविन्द देव जी का दीवान मानते थे।


(VII) हरमाड़ा नहर (जयपुर)-

➠हरमाड़ा नहर का निर्माण सवाई जयसिंह के द्वारा जयपुर में करवाया गया था।

➠जयपुर में पेयजल की आपूर्ति के लिए हरमाड़ा नहर का निर्माण करवाया गया था।


(VIII) जंतर मंतर-

➠सवाई जयसिंह के द्वारा 5 जंतर मंतर का निर्माण करवाया गया था। जैसे-

(A) जंतर मंतर (दिल्ली)

(B) जंतर मंतर (जयपुर, राजस्थान)

(C) जंतर मंतर (उज्जैन, मध्य प्रदेश)

(D) जंतर मंतर (मथुरा, उत्तर प्रदेश)

(E) जंतर मंतर (काशी, वाराणसी, उत्तर प्रदेश)


(A) जंतर मंतर (दिल्ली)-

➠दिल्ली में जंतर मंतर का निर्माण जयपुर के राजा सवाई जयसिंह के द्वारा करवाया गया था।

➠दिल्ली का जंतर मंतर सबसे पहला जंतर मंतर है।


(B) जंतर मंतर (जयपुर, राजस्थान)-

➠जयपुर में जंतर मंतर का निर्माण जयपुर के राजा सवाई जयसिंह के द्वारा करवाया गया था।

➠जयपुर का जंतर मंतर सबसे बड़ा जंतर मंतर है।

➠2010 में यूनेस्को ने जयपुर के जंतर मंतर को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया था।


(C) जंतर मंतर (उज्जैन, मध्य प्रदेश)-

➠मध्य प्रदेश के उज्जैन में जंतर मंतर का निर्माण जयपुर के राजा सवाई जयसिंह के द्वारा करवाया गया था।


(D) जंतर मंतर (मथुरा, उत्तर प्रदेश)-

➠उत्तर प्रदेश के मथुरा में जंतर मंतर का निर्माण जयपुर के राजा सवाई जयसिंह के द्वारा करवाया गया था।


(E) जंतर मंतर (काशी, वाराणसी, उत्तर प्रदेश)-

➠उत्तर प्रदेश के काशी (वाराणसी) में जंतर मंतर का निर्माण जयपुर के राजा सवाई जयसिंह के द्वारा करवाया गया था।


2. साहित्य-

➠सवाई जयसिंह ने जयसिंह कारिका नामक ज्योतिष ग्रंथ लिखा था।

➠जयपुर के राजा सवाई जयसिंह ने मुहम्मद शाह रंगीला पर जीज-ए-मुहम्मदशाही नामक नक्षत्र सारणी तैयार करवायी थी।


3. चित्रकला-

➠सवाई जयसिंह ने सूरत खाना नामक चित्रकला विभाग की स्थापना की थी।


सवाई जयसिंह के दरबारी विद्वान-

1. पुंडरीक रत्नाकर

2. पण्डित जगन्नाथ

3. केवलराम

4. नयन चन्द्र मुखर्जी

5. मुहम्मद मेहरी

6. मुहम्मद शरीफ


1. पुंडरीक रत्नाकर-

➠पुंडरीक रत्नाकर सवाई जयसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠पुंडरीक रत्नाकर के  द्वारा जयसिंह कल्पद्रुम नामक पुस्तक लिखी गई थी।


2. पण्डित जगन्नाथ-

➠पण्डित जगन्नाथ सवाई जयसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠पण्डित जगन्नाथ के द्वारा सिद्धान्त सम्राट तथा सिद्धान्त कौस्तुभ नामक पुस्तकों की रचना की गई थी।

➠पण्डित जगन्नाथ के द्वारा यूक्लिड ज्यामिति नामक पुस्तक का संस्कृत भाषा में अनुवाद किया था।


3. केवलराम-

➠केवलराम सवाई जयसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠केवलराम के द्वारा लोगरिथम नामक पुस्तक का संस्कृत भाषा में अनुवाद किया गया था।


4. नयन चन्द्र मुखर्जी-

➠नयन चन्द्र मुखर्जी सवाई जयसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠नयन चन्द्र मुखर्जी के द्वारा ऊकर नामक अरबी ग्रंथ का संस्कृत भाषा में अनुवाद किया गया था।


5. मुहम्मद मेहरी-

➠मुहम्मद मेहरी सवाई जयसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠मुहम्मद मेहरी को विदेशों से पुस्तके लाने के लिए भेजा गया था।


6. मुहम्मद शरीफ-

➠मुहम्मद शरीफ सवाई जयसिंह का दरबारी विद्वान था।

➠मुहम्मद शरीफ को विदेशों से पुस्तके लाने के लिए भेजा गया था।


सवाई जयसिंह के द्वारा किये गये सामाजिक सुधार-

➠सवाई जयसिंह ने जयपुर में सत्ती प्रथा को नियंत्रित किया था।

➠सवाई जयसिंह ने जयपुर में बाल विवाह को नियंत्रित किया था।

➠सवाई जयसिंह ने विधवा विवाह को प्रोत्साहन दिया था।

➠सवाई जयसिंह ने अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन दिया था।

➠सवाई जयसिंह ने साधु संतो को गृहस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया था या प्रोत्साहन दिया था।

➠साधु संतो के लिए सवाई जयसिंह ने उत्तर प्रदेश के मथुरा के पास वैरागपुर नामक गाँव बसाया था।

➠सवाई जयसिंह ने ब्राह्मणों के आपसी भेदभाव को समाप्त किया था।


देबारी समझौता (1708 ई.)-

➠1708 ई. के देबारी समझौते के अनुसार सवाई जयसिंह के बेटे माधोसिंह को जयपुर का राजा होना चाहिए था लेकिन सवाई जयसिंह ने अपने बेटे ईश्वरी सिंह को जयपुर का राजा बनाया था।

➠माधोसिंह तथा ईश्वरी सिंह के बीच जयपुर की राजगद्दी के लिए दोनों भाईयों में उत्तराधिकारी संघर्ष हुआ था।

➠ईश्वरी सिंह सवाई जयसिंह की रानी सूरज कंवर का बेटा था।

➠माधोसिंह सवाई जयसिंह की रानी चंद्र कंवर का बेटा था।


9.सवाई ईश्वरीसिंह (1743- 1750 ई.)-


राजमहल का युद्ध (1747 ई.)-

➠राजमहल का युद्ध 1747 ई. में टोंक में हुआ था।

➠राजमहल नामक स्थान राजस्थान के टोंक जिले में स्थित है।

➠राजमहल का युद्ध सवाई ईश्वरीसिंह तथा सवाई माधोसिंह प्रथम के बीच हुआ था।

➠राजमहल के युद्ध में सवाई ईश्वरीसिंह का साथ भरतपुर के राजा सूरजमल ने दिया था।

➠राजमहल के युद्ध में सवाई माधोसिंह प्रथम का साथा मेवाड़ का राजा जगत सिंह द्वितीय, बूंदी का राजा उम्मेद सिंह, कोटा का राजा दुर्जन साल तथा मराठे थे।

➠राजमहल के युद्ध में सवाई ईश्वरीसिंह की जीत हुई थी।


ईसरलाट या सरगासूली (जयपुर)-

➠राजमहल के युद्ध की जीत की याद में सवाई ईश्वरीसिंह ने जयपुर में ईसरलाट का निर्माण करवाया था।

➠ईसरलाट का नया नाम सरगासूली है।

➠ईसरलाट जयपुर में स्थित 7 मंजिला स्तम्भ है।


बगरू का युद्ध (1748 ई.)-

➠बगरू राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित जगह का नाम है।

➠बगरू का युद्ध 1748 ई. जयपुर के बगरू नामक स्थान पर हुआ था।

➠बगरू का युद्ध सवाई ईश्वरीसिंह तथा सवाई माधोसिंह प्रथम के मध्य लड़ा गया था।

➠बगरू के युद्ध में सवाई ईश्वरीसिंह के साथ भरतपुर का राजा सूरजमल था।

➠बगरू के युद्ध में सवाई माधोसिंह प्रथम का साथा मेवाड़ का राजा जगत सिंह द्वितीय, बूंदी का राजा उम्मेद सिंह, कोटा का राजा दुर्जन साल तथा मराठे थे।

➠बगरू के युद्ध में सवाई माधोसिंह प्रथम की जीत हुई थी।

➠बगरू युद्ध जीतने के बाद सवाई ईश्वरीसिंह ने सवाई माधोसिंह प्रथम को पांच परगने दिये गये थे।

➠बगरू युद्ध के बाद उम्मेद सिंह को बूंदी का राजा मान लिया गया था।

➠बगरू युद्ध के बाद मराठों को युद्ध हरजाना दिया गया था।

➠बगरू युद्ध के बाद मराठों ने सवाई ईश्वरीसिंह को युद्ध हरजाने के लिए परेशान किया था।

➠मराठों के द्वारा युद्ध हरजाने के लिए परेशान करने के कारण सवाई ईश्वरीसिंह ने आत्महत्या कर ली थी।

➠सवाई ईश्वरीसिंह राजस्थान का एकमात्र ऐसा राजा है जिसने मराठों से परेशान होकर आत्महत्या की थी।


10. सवाई माधोसिंह प्रथम (1750- 1768 ई.)-

➠1751 ई. में सवाई माधोसिंह प्रथम ने जयपुर में मराठों का कत्लेआम करवाया था।


कांकोड का युद्ध (1759 ई.)-

➠कांकोड राजस्थान के टोंक जिले में स्थित जगह का नाम है।

➠कांकोड का युद्ध 1759 ई. टोंक के कांकोड नामक स्थान पर हुआ था।

➠कांकोड का युद्ध सवाई माधोसिंह प्रथम तथा मराठों के बीच हुआ था।

➠कांकोड के युद्ध में सवाई माधोसिंह प्रथम ने मराठों को हरा दिया था।


भटवाड़ाका युद्ध (1761 ई.)-

➠भटवाड़ा राजस्थान के बारा जिले में स्थित जगह का नाम है।

➠भटवाड़ा का युद्ध 1761 ई. में बारा के भटवाड़ा नामक स्थान पर लड़ा गया था।

➠भटवाड़ा का युद्ध जयपुर के राजा सवाई माधोसिंह प्रथम तथा कोटा के राजा शत्रुशाल के मध्य लड़ा गया था।

➠भटवाड़ा के युद्ध में शत्रुशाल की जीत हुई थी।

➠भटवाड़ा के युद्ध में कोटा के राजा शत्रुशाल की तरफ से सेनापति कोटा का जालिम सिंह झाला था।


माधोसिंह की सांस्कृतिक उपलब्धियां-

1. सवाई माधोपुर (राजस्थान)

2. शीतला माता मंदिर (चाकसू, जयपुर)

3. मोती डूंगरी महल (जयपुर)


1. सवाई माधोपुर-

➠जयपुर के राजा सवाई माधोसिंह प्रथम ने 1763 ई. में सवाई माधोपुर नगर की स्थापना की थी।


2. शीतला माता मंदिर (चाकसू, जयपुर)-

➠जयपुर के राजा सवाई माधोसिंह प्रथम ने जयपुर के चाकसू में शीतला माता के मंदिर का निर्माण करवाया था।


3. मोती डूंगरी महल (जयपुर)-

➠जयपुर के राजा सवाई माधोसिंह प्रथम ने जयपुर में मोती डूंगरी महल का निर्माण करवाया था।


11. सवाई प्रतापसिंह (1778-1803 ई.)-

➠जयपुर का राजा सवाई प्रतापसिंह ब्रजनिधि नाम से कविताएँ लिखता था।

➠सवाई प्रतापसिंह की कविताओं के संग्रह को ब्रजनिधि ग्रंथावली कहा जाता है।

➠सवाई प्रतापसिंह का काव्य गुरू गणपति भारती था।

➠सवाई प्रतापसिंह के शासन काल में जयपुर में तमाशा लोक नाट्य लोकप्रिय हुआ था।

➠तमाशा नामक लोक नाट्य के लिए बंशीधर भट्ट को महाराष्ट्र से जयपुर बुलाया गया था।

➠सवाई प्रतापसिंह के दरबार में 22 कलाकार (विद्वान) थे।

➠सवाई प्रतापसिंह के दरबार के 22 कलाकारों या विद्वानों को गंधर्व बाईसी या प्रताप बाईसी कहा जाता था।

➠सवाई प्रतापसिंह ने 22 कलाकारों या विद्वानों के लिए गुणीजन खाना नामक विभाग बनवाया था।


चाँद खाँ-

➠चाँद खाँ सवाई प्रतापसिंह का संगीत गुरू था।

➠सवाई प्रतापसिंह ने चाँद खाँ को बुद्ध प्रकाश की उपाधि दी थी।

➠चाँद खाँ के द्वारा स्वर सागर नामक पुस्तक लिखी गई थी।


तुंगा का युद्ध- (1787 ई.)-

➠तुंगा का युद्ध 1787 ई. में जयपुर लालसोट के पास तुंगा नामक स्थान पर लड़ा गया था।

➠तुंगा के युद्ध में जयपुर के राजा सवाई प्रतापसिंह तथा मराठों के बीच लड़ा गया था।

➠तुंगा के युद्ध में मराठों की तरफ से सेनापति महादजी सिंधिया युद्ध लड़ने आये थे।

➠तुंगा के युद्ध में सवाई प्रतापसिंह ने मराठों को हरा दिया गया था।


पाटन का युद्ध (1789 ई.)-

➠पाटन का युद्ध 1789 ई. में सीकर जिले के पाटन नामक स्थान पर लड़ा गया था।

➠पाटन का युद्ध जयपुर के राजा सवाई प्रतापसिंह एवं जोधपुर के राजा विजयसिंह की संयुक्त सेना तथा मराठों के मध्य लड़ा गया था। अर्थात् पाटन का युद्ध जयपुर तथा मारवाड़ की संयुक्त सेना तथा मराठों के बीच लडा गया था।

➠पाटन के युद्ध में मराठों का सेनापति डी.बोई था।

➠डी.बोई फ्रांसीसी नागरिक था।

➠पाटन के युद्ध में मराठों की जीत हुई थी।


मालपुरा का युद्ध (1800 ई.)-

➠मालपुरा का युद्ध 1800 ई. में टोंक जिले के मालपुरा नामक स्थान पर लड़ा गया था।

➠मालपुरा का युद्ध जयपुर के राजा सवाई प्रतापसिंह एवं जोधपुर के राजा भीमसिंह की संयुक्त सेना तथा मराठों के मध्य लड़ा गया था। अर्थात् पाटन का युद्ध जयपुर तथा मारवाड़ की संयुक्त सेना तथा मराठों के बीच लडा गया था।

➠मालपुरा के युद्ध में मराठों का सेनापति दौलत राव सिंधिया था।

➠मालपुरा के युद्ध में मराठों की जीत हुई थी।


सवाई प्रतापसिंह की सांस्कृतिक उपलब्धियां-

1. हवामहल (जयपुर, राजस्थान)


1. हवामहल (जयपुर, राजस्थान)-

➠हवामहल का निर्माण जयपुर के राजा सवाई प्रतापसिंह के द्वारा करवाया गया था।

➠हवामहल का निर्माण (स्थापना) 1799 ई. में करवाया गया था।

➠हवामहल का वास्तुकार उस्ताद लालचन्द्र (लाल चन्द उस्ता) था।

➠हवामहल की आकृति भगवान श्री कृष्ण के मुकुट के समान है।

➠हवामहल 5 मंजिला इमारत है।

➠हवामहल में निम्नलिखित 5 मंजिले है-

(I) शरद मंदिर (प्रथम मंजिल)

(II) रतन मंदिर (दूसरी मंजिल)

(III) विचित्र मंदिर (तीसरी मंजिल)

(IV) प्रकाश मंदिर (चौथी मंजिल)

(V) हवा मंदिर (पांचवी मंजिल)

➠हवामहल में 365 खिड़कियां है।

➠हवामहल में 953 झरोखे है।

➠हवामहल से रानियां तीज एवं गणगौर की सवारियां देखती थी।


संगीत सम्मेलन-

➠जयपुर के राजा सवाई प्रतापसिंह के द्वारा जयपुर में संगीत सम्मेलन का आयोजन करवाया गया था।

➠सवाई प्रतापसिंह के संगीत सम्मेलन का अध्यक्ष देवर्षि बृजपाल भट्ट (देवर्षि भट्ट बृजपाल) था।

➠सवाई प्रतापसिंह के संगीत सम्मेलन में शामिल होने वाले सभी सदस्यों के द्वारा 'राधा गोविन्द संगीत सार' नामक पुस्तक लिखी गई थी।


चित्रकला-

➠सवाई प्रतापसिंह का शासन काल जयपुर चित्रकला का स्वर्णकाल था।

➠सवाई प्रतापसिंह ने जयपुर में चित्रकला स्कूल की स्थापना की थी।

➠लालचन्द नामक चित्रकार ने जयपुर की चित्रकला स्कूल में पशुओं की लड़ाई के चित्र बनाये थे।


12. सवाई जगतसिंह द्वितीय (1803-1818 ई.)-

➠सवाई जगतसिंह द्वितीय ने 1818 ई. में अंग्रेजों से संधि कर ली थी।


सर कपूर (नर्तकी)-

➠जयपुर के राजा सवाई जगतसिंह द्वितीय का सर कपूर से संबंध होने के कारण सवाई जगतसिंह द्वितीय को जयपुर का बदनाम शासक भी कहा जाता है।

➠सर कपूर एक नर्तकी थी।

➠सवाई जगतसिंह द्वितीय की प्रेमिका रस कपूर शासन कार्यों में हस्तक्षेप करती थी इसीलिए रस कपूर को जयपुर के नाहरगढ़ किले में नजर बंद कर दिया गया था।


13. सवाई रामसिंह द्वितीय (1835-1880 ई.)-

➠सवाई रामसिंह द्वितीय जयपुर के राजा सवाई जयसिंह तृतीय का बेटा था।

➠सवाई रामसिंह द्वितीय जयपुर का राजा था।

➠सवाई रामसिंह द्वितीय का शासन काल 1835 ई. से 1880 ई. तक था।

➠सवाई रामसिंह द्वितीय कम उमर में ही जयपुर का राजा बना था इसीलिए रिजेन्सी कौंसिल के अध्यक्ष मेजर जाॅन लुडलो को सवाई रामसिंह द्वितीय का संरक्षक बनाया गया था। अर्थात् सवाई रामसिंह द्वितीय के कम उमर में राजा बनने के कारण मेजर जाॅन लुडलो की देखरेख में शासन चलाया गया था।

➠सवाई रामसिंह द्वितीय के शासन काल में जाॅन लुडलो के द्वारा जयपुर में सत्ती प्रथा पर रोक लगायी गई थी।

➠सवाई रामसिंह द्वितीय के शासन काल में जाॅन लुडलो के द्वारा जयपुर में समाधि प्रथा पर रोक लगायी गई थी। 

➠सवाई रामसिंह द्वितीय के शासन काल में जाॅन लुडलो के द्वारा जयपुर में कन्या वध पर रोक लगायी गई थी।

➠सवाई रामसिंह द्वितीय के शासन काल में जाॅन लुडलो के द्वारा जयपुर में मानव व्यापार (कन्या क्रय-विक्रय) पर रोक लगायी गई थी।

➠सवाई रामसिंह द्वितीय ने 1857 ई. की क्रांति में अंग्रेजों का साथ दिया था इसीलिए अंग्रेजों ने सवाई रामसिंह द्वितीय को सितार-ए-हिन्द की उपाधि दी थी


मदरसा-ए-हुनरी-

➠1857 ई. में राज्य में कला एवं संस्कृति के विकास के लिए सवाई रामसिंह द्वितीय ने जयपुर में मदरसा-ए-हुनरी नामक संस्थान की स्थापना की थी।

➠1886 ई. में सवाई माधोसिंह द्वितीय ने मदरसा-ए-हुनरी का नाम बदलकर महाराजा स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स (Maharaja School of Arts and Crafts) कर दिया गया था।

➠1988 ई. में मदरसा-ए-हुनरी का नाम बदलकर राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट्स (Rajasthan School of Art and Crafts) कर दिया गया था।

➠मदरसा-ए-हुनरी को वर्तमान में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट्स (Rajasthan School of Art and Crafts) के नाम से जाना जाता है।


कन्या विद्यालय (जयपुर)-

➠1866 ई. में कांति चंद्र मुखर्जी की सलाह पर सवाई रामसिंह द्वितीय ने जयपुर में कन्या विद्यालय की स्थापना की थी।

➠सवाई रामसिंह द्वितीय के द्वारा जयपुर में स्थापित करवाया गया कन्या विद्यालय राजस्थान का पहला कन्या विद्यालया था। अर्थात् राजस्थान की किसी भी रियासत में यह पहला कन्या विद्यालय था।


महाराजा काॅलेज (जयपुर)-

➠जयपुर के राजा सवाई रामसिंह द्वितीय ने जयपुर में महाराजा काॅलेज की स्थापना की थी।


संस्कृत काॅलेज (जयपुर)-

➠जयपुर के राजा सवाई रामसिंह द्वितीय ने जयपुर में संस्कृत काॅलेज की स्थापना की थी।


जाॅर्ज एडवर्ड पंचम-

➠1868 ई. में ब्रिटिश शासक जार्ज एडवर्ड पंचम के जयपुर आगमन के समय सवाई रामसिंह द्वितीय जयपुर में गुलाबी रंग (गेरुआ रंग) करवाया था।

➠जाॅर्ज एडवर्ड पंचम ने जयपुर को गोल्डन बर्ड कहा था।


अलबर्ट हाॅल संग्रहालय, जयपुर (1868 ई.)-

➠1868 ई. में सवाई रामसिंह द्वितीय ने प्रिंस अलबर्ट के जयपुर आगमन के समय जयपुर में अलबर्ट हाॅल संग्रहालय की स्थापना की थी।

➠1868 ई. में अलबर्ट हाॅल संग्रहालय की नींव प्रिंस अलबर्ट के द्वारा रखी गई थी।

➠अलबर्ट हाॅल संग्रहालय का वास्तुकार स्टीवन जैकब (Steven Jacob) था।

➠अलबर्ट हाॅल संग्रहालय राजस्थान का प्रथम संग्रहालय है।


स्टेलनी रीड (Stanley Reed)-

➠स्टेलनी रीड के द्वारा Royal Towns of India नामक पुस्तक लिखी गई थी।

➠स्टेलनी रीड ने अपनी पुस्तक Royal Towns of India में जयपुर को पिंक सिटी (Pink City) कहा था।


रामगढ़ बाँध (जयपुर)-

➠सवाई रामसिंह द्वितीय ने जयपुर में रामगढ़ बाँध का निर्माण करवाया था।

➠रामगढ़ बाँध राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित है।


रामनिवास बांग (जयपुर)-

➠सवाई रामसिंह दितीय ने जयपुर में रामनिवास बांग बनवाया था।

➠रामनिवास बांग राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित है।


रामप्रकाश थियेटर (जयपुर)-

➠सवाई रामसिंह द्वितीय ने जयपुर में रामप्रकाश थियेटर का निर्माण करवाया था।

➠रामप्रकाश थियेटर राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित है।


रूपा बढारण केस (रूपा बडारण मामला)-

➠रूपा बडारण मामला जयपुर के राजा सवाई जयसिंह तृतीय की मृत्यु से संबंधित था।

➠ब्लैक तथा ऑलविज नामक दो अंग्रेज अधिकारी रूपा बढ़ारण केस की जाँच कर रहे थे।

➠जयपुर की जनता ने ब्लैक तथा ऑलविज नामक दो अंग्रेज अधिकारियों पर हमला कर दिया था। इस हमले में ब्लैक नामक अंग्रेज अधिकारी को मार दिया गया था।


14. सवाई माधोसिंह द्वितीय (1880-1922 ई.)-

➠सवाई माधोसिंह द्वितीय जयपुर का राजा था।

➠सवाई माधोसिंह द्वितीय का शासन काल 1880 ई. से 1922 ई. तक था।

➠माधोसिंह द्वितीय को बब्बर शेर कहा जाता है।

➠सवाई माधोसिंह द्वितीय ने अपनी 9 दासियों के लिए जयपुर के नाहरगढ़ में 9 एक जैसे महलों का निर्माण करवाया था।

➠सवाई माधोसिंह द्वितीय ने बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (Banaras Hindu University- B.H.U.) की स्थापना के लिए महन मोहन मालवीय को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी थी।

➠1904 ई. में सवाई माधोसिंह द्वितीय ने जयपुर में डाक व्यवस्था की शुरुआत की थी।

➠राजस्थान में पहली बार डाक व्यवस्था की शुरुआत माधोसिंह द्वितीय के द्वारा ही शुरू की गई थी। अर्थात् सवाई माधोसिंह द्वितीय के द्वारा शुरू की गई डाक व्यवस्था राजस्थान की किसी भी रियासत में पहली बार शरू की गई डाक व्यवस्था थी।


मुबारक महल (जयपुर)-

➠सवाई माधोसिंह द्वितीय ने जयपुर में मुबारक महल का निर्माण करवाया था।


15. सवाई मानसिंह द्वितीय (1922- 1947 ई.)-

➠सवाई मानसिंह द्वितीय जयपुर का राजा था।

➠सवाई मानसिंह द्वितीय का शासन काल 1922 ई. से 1947 ई. तक था।

➠सवाई मानसिंह द्वितीय आमेर या जयपुर के कछवाह वंश का अंतिम शासक था।

➠सवाई मानसिंह द्वितीय भारत की आजादी के समय जयपुर का राजा था।

➠सवाई मानसिंह द्वितीय 1949 ई. से 1956 ई. तक राजस्थान के राजप्रमुख के पद पर था।

➠सवाई मानसिंह द्वितीय राजस्थान का प्रथम राजप्रमुख था।

➠सवाई मानसिंह द्वितीय राजस्थान का अंतिम राजप्रमुख था।

➠सवाई मानसिंह द्वितीय राजस्थान का एकमात्र राजप्रुमख था।


गायत्री देवी (रानी)-

➠सवाई मानसिंह द्वितीय की रानी का नाम गायत्री देवी था।

➠गायत्री देवी 1962 ई. में आम चुनाव जीतकर लोकसभा सदस्य बनी थी।

➠गायत्री देवी ने 1962 में स्वतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ा था।

➠गायत्री देवी राजस्थान से पहली महिला लोकसभा सदस्य थी।

➠गायत्री देवी की आत्मकथा The Princess Remembers है।

➠गायत्री देवी की मृत्यु 29 जुलाई 2009 को हुई थी।


मिर्जा इस्माइल (प्रधानमंत्री)-

➠मिर्जा इस्माइल सवाई मानसिंह-II का प्रधानमंत्री था।

➠मिर्जा इस्माइल को आधुनिक जयपुर का निर्माता कहा जाता है।

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