राजकोषीय नीति

राजकोषीय नीति

(Fiscal Policy)


राकोषीय नीति-

➠सरकार की प्राप्तियों और व्यय से संबंधित नीति को राजकोषीय नीति कहते है।


बजट-

➠राजकोषीय नीति को बजट के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है।

➠बजट शब्द को प्रयोग भारतीय संविधान में नहीं किया गया है।

➠बजट एक प्रचलित शब्द है। जिसका वास्तविक अर्थ चमड़े का थैला (बैग) है।

➠भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में 'बजट' के स्थान पर 'वार्षिक वित्तीय विवरण' (Annual Financial Statement) शब्द का प्रयोग किया गया है।

➠बजट लोकसभा में पेश किया जाता है।

➠लोकसभा में बजट भारत के वित्त मंत्री के द्वारा प्रस्तुत या पेश किया जाता है।

➠वर्तमान में बजट फरवरी के पहले कार्य दिवस को प्रस्तुत किया जाता है।

➠2017 से पहले बजट फरवरी के अंतिम कार्य दिवस को प्रस्तुत किया जाता था।


2017 के बाद बजट फरवरी के पहले कार्य दिवस को प्रस्तुत करने से निम्नलिखित लाभ हुए है-

1. वर्तमान में लेखानुदान (Vote on Account) पारित करने की आवश्यकता नहीं होती है।

2. वर्तमान में बजट प्रत्येक वर्ष 31 मार्च से पहले पारित करवा लिया जाता है। जिसके कारण  विकासात्मक गतिविधियों को समय पर शुरू किया जा सकता है।


2017 के बजट में दो अन्य परिवर्तन किये गये थे। जैसे-

1. वर्ष 2017-18 में रेल बजट का विलय आम बजट में कर दिया गया था।

2. योजनागत तथा गैर योजनागत व्यय के भेद को समाप्त कर दिया गया था।


रेल बजट + आम बजट-

➠वर्ष 2017-18 में विवेक देबराॅय समिति की सिफारिश पर रेल बजट को आम बजट में मिलाया गया था।

➠विवेक देबराॅय वर्तमान में भारत में आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष है।


रेल बजट - आम बजट-

➠सन् 1924 में एकवर्थ समिति (Acworth Committee) की सिफारिश पर भारत में रेल बजट को आम बजट से अलग किया गया था क्योंकि उस काल में रेलवे में ब्रिटिश निवेश अधिक था तथा रेल बजट का आकार भी बड़ा था। वर्तमान में ऐसी कोई परिस्थितयां नहीं है।

➠एकवर्थ समिति (Acworth Committee) का गठन 1921 में किया गया था।

➠भारत में वर्तमान में रेल बजट लोक लुभावनि घोषणा करने का मंच बनकर रह गया है जिससे रेलवे का विस्तार, तकनीक तथा सुरक्षा प्रभावित हुई है।

➠भारत में सन् 1924 से 2017 तक रेल वजट तथा आम बजट अलग अलग प्रस्तुत किये जाते थे।


योजनागत व्यय-

➠योजनागत व्यय वह व्यय था जो की पंचवर्षिय योजनाओं को पुरा करने के लिए किया जाता है।

➠वर्ष 2017 में पंचवर्षिय योजनाएं समाप्त कर दी गई है।

➠भारत की अंतिम तथा 12वीं पंचवर्षिय योजना वर्ष 2012 से 2017 तक थी।


बजट का समय-

➠भारत में वर्तमान में लोकसभा में बजट सुबह 11 बजे प्रस्तुत या पेश किया जाता है।

➠भारत में 1999 से पहले लोकसभा में बजट शाम को 5 बजे प्रस्तुत या पेश किया जाता था।

➠1999 के बाद लोकसभा में बजट सुबह 11 बजे प्रस्तुत या पेश किया जाात है।


बजट भाषण-

➠भारत में जब लोकसभा में बजट प्रस्तुत किया जाता है तब सर्वप्रथम बजट भाषण भारत के वित्त मंत्री के द्वारा दिया जाता है।

➠लोकसभा में बजट भाषण के दो भाग होते है जैसे-

1. Part-A

2. Part-B


1. Part-A

➠लोकसभा के भाषण के Part-A में भारत की अर्थव्यवस्था के जुड़ी सामान्य घोषणाये होती है।


2. Part-B

➠लोकसभा के भाषण के Part-B में भारत में कर संबंधित परिवर्तनों की घोषणा की जाती है


लोकसभा में भारत के वित्त मंत्री के द्वारा तीन दस्तावेज रखे जाते है जैसे-

1. वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement)

2. वित्त विधेयक (Finance Bill)

3. विनियोग विधेयक (Appropriation Bill)


1. वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement)-

➠लोकसभा में भारत के वित्त मंत्री के द्वारा पेश किये जाने वाले वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) में सरकार की प्राप्तियों तथा व्यय से संबंधित जानकारी होती है।


2. वित्त विधेयक (Finance Bill)-

➠लोकसभा में भारत के वित्त मंत्री के द्वारा पेश किये जाने वाले वित्त विधेयक में कर से संबंधित परिवर्तन करने हेतु जानकारी होती है।


3. विनियोग विधेयक (Appropriation Bill)-

➠लोकसभा में भारत के वित्त मंत्री के द्वारा विनियोग विधेयक संचित निधि से खर्च की अनुमति लेने के लिए पेश किया जाता है।


आर्थिक समीक्षा-

➠भारत में प्रत्येक वर्ष बजट प्रस्तुत करने से एक दिन पहले (31 जनवरी) को लोकसभा में आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत की जाती है।

➠लोकसभा में बजट से पहले प्रस्तुत की जाने वाली आर्थिक समीक्षा भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार के द्वारा तैयार की जाती है।

➠वर्तमान में भारत का मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन है।

➠Chief Economic Advisor to the Government of India- V. Anantha Nageswaran

➠भारत में बजट संबंधित सभी दस्तावेज आर्थिक मामलात के विभाग के द्वारा तैयार किये जाते है।

➠आर्थिक मामलात के विभाग भारत के वित्त मंत्रालय के अधिन कार्य करते है।


जेम्स विल्सन-

➠भारत का पहला बजट सन् 1860 में जेम्स विल्सन (James Wilson) के द्वारा प्रस्तुत या पेश किया गया था।


आर. के. षणमुखम शेट्टी (R. K. Shanmukham Chetty)-

➠स्वतंत्र भारत का पहला बजट नवम्बर 1947 को आर. के. षणमुखम चेट्टी (R. K. Shanmukham Chetty) के द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

➠आर. के. षणमुखम चेट्टी (R. K. Shanmukham Chetty) भारत के प्रथम वित्त मंत्री थे।


बजट की संरचना (Structure of Annual Financial Statement)-

➠भारत में बजट के दो भाग है जैसे-

1. राजस्व (Revenue)

2. पूंजी (Capital)


1. राजस्व (Revenue)-

➠राजस्व के दो भाग है जैसे-

(अ) प्राप्तियां (Receipts)

(ब) व्यय (Expenditure)


(अ) प्राप्तियां (Receipts)-

➠राजस्व की प्राप्तियां वह प्राप्तियां है जिसेस ना तो देनदारियां बढ़ती है और ना ही परिसंपत्तियां घटती है।

➠राजस्व की प्राप्तियों के दो भाग है जैसे-

(A) कर (Tax)

(B) गैर कर (Non Tax)


(A) कर (Tax)-

➠राजस्व की प्राप्तियों में कर के दो भाग है जैसे-

(I) प्रत्यक्ष कर (Direct Tax)

(II) अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)


(B) गैर कर (Non Tax)-

➠राजस्व की प्राप्तियों में गैर कर में निम्नलिखि बिंदु शामिल है।

(I) भारत सरकार के द्वारा बेची गयी बस्तु एवं सेवाएं

(II) भारत सरकार के द्वारा प्राप्त किया गया ब्याज

(III) भारत सरकार के द्वारा प्राप्त किया गया लाभ और लाभांश

(IV) भारत सरकार के द्वारा प्राप्त किया गया अनुदान


(ब) व्यय (Expenditure)-

➠राजस्व का व्यय वह व्यय है जिसेस ना तो परिसंपत्तियां बढ़ती है और ना ही देनदारियां कम होती है।

➠राजस्व के व्यय में निम्नलिखित बिंदु शामिल है।

(I) भारत सरकार के द्वारा चुकाया गया ब्याज

(II) भारत सरकार के द्वारा दी गई सब्सिडी

(III) भारत सरकार के संचालन का खर्च

(IV) भारत सरकार के द्वारा सरकारी कर्मचारियों को दिया गया वेतन और पेंशन का खर्च

(V) भारत सरकार के द्वारा दिया गया अनुदान

(VI) भारत सरकार के द्वारा रक्षा पर किया गया खर्च


2. पूंजी (Capital)-

➠पूंजी (Capital) के दो भाग है जैसे-

(अ) प्राप्तियां (Receipts)

(ब) व्यय (Expenditure)


(अ) प्राप्तियां (Receipts)-

➠पूंजीगत प्राप्तियां वह प्राप्तियां है जिसेस या तो देनदारियां बढ़ती है या परिसंपत्तियां कम होती है।

➠पूंजीगत प्राप्तियों के दो भाग है जैसे-

(A) ऋण (Debt)

(B) गैर ऋण (Non Debt)


(A) ऋण (Debt)-

➠पूंजीगत प्राप्तियों में ऋण के दो भाग है जैसे-

(I) आंतरिक ऋण (Internal Debt)

(II) बाहरी ऋण (External Debt)


(B) गैर ऋण (Non Debt)-

➠पूजीगत प्राप्तियों में गैर ऋण के दो भाग है जैसे-

(I) विनिवेश (Disinvestment)

(II) वसुला गया ऋण (Loans Recovered)


(ब) व्यय (Expenditure)-

➠पूंजीगत व्यय वह व्यय है जिससे या तो परिसंपत्तियां बढ़ती है या देनदारियां कम होती है।

➠पूंजीगत व्यय में निम्नलिखित बिंदू शामिल है।

(I) भारत सरकार के द्वारा दिये गये ऋण

(II) भारत सरकार के द्वारा चुकाये गये ऋण

(III) भारत सरकार के द्वारा परिसंपत्तियों का निर्माण जैसे-

➠आधारभुत ढांचा

➠नया P.S.U (Public Sector Undertakings)

➠भारत सरकार के द्वारा रक्षा पर खर्च जैसे- नये विमान खरीदना।


भारत में बजट के घाटे-

1. राजस्व घाटा (Revenue Deficit)

2. प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit)

3. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)

4. प्राथमिक घाटा (Primary Deficit)


1. राजस्व घाटा (Revenue Deficit)-

➠राजस्व के व्यय तथा राजस्व की प्राप्तियों के अंतर को राजस्व घाटा कहा जाता है।

➠राजस्व घाटा = राजस्व का व्यय - राजस्व की प्राप्तियां

➠(Revenue Deficit = Revenue Expenditure - Revenue Receipts)


2. प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit)-

➠प्रभावी राजस्व घाटा = राजस्व घाटा - पूंजी निर्माण के लिए दिये गये अनुदान


3. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)-

➠एक वित्तीय वर्ष में सरकार के द्वारा सर्जित कुल देयताएं अर्थात् एक वित्तीय वर्ष में सरकार के द्वारा लिया गया ऋण (उधार) राजकोषीय घाटा कहलाता है।

➠राजोकोषीय घाटा सबसे प्रमुख घाटा है।

➠राजकोषीय घाटा = (राजस्व का व्यय + पूंजीगत व्यय) - (राजस्व की प्राप्तियां + गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां)

➠राजकोषीय घाटा = कुल व्यय - (राजस्व की प्राप्तियां + ऋणों की वसूली + विनिवेश से प्राप्तियां)

➠यहां कुल व्यय = राजस्व का व्यय + पूंजीगत व्यय

➠यहां ऋणों की वसूली + विनिवेश से प्राप्तियां = गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां

➠भारत में राजकोषीय घाटे के प्रयोग सन् 1997 से किया जा रहा है।

➠भारत में राजकोषीय घाटे का प्रयोग सुखमय चक्रवर्ती समिति की सिफारिश पर किया जा रहा है।

➠कुछ हद तक राजकोषीय घाटा सकारात्मक होता है कियोंकि राजकोषीय घाटे का प्रयोग पूंजीगत खर्चों के लिए किया जा सकता है।

➠कोरोना काल में लोकडाउन के कारण भारत में राजकोषीय घाटा 9% से अधिक हो गया था।

➠वर्ष 2021-22 में राजकोषीय घाटा 6.7% था।

➠वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.5% रखा गया है।


बजट घाटा (Budget Deficit)-

➠राजकोषीय घाटे से पहल भारत में बजट घाटे का प्रयोग किया जाता था।

➠बजट घाटा = कुल व्यय - कुल प्राप्तियां

➠Budget Deficit = Total Expenditure - Total Receipts

➠बजट घाटे को पूरा करने के लिए सरकार के द्वारा तदर्थ ट्रेजरी बिल जारी किये जाते थे तथा RBI के द्वारा नये नोट छाप लिये जाते थे।

➠वर्तमान में बजट घाटे की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।

➠वर्तमान में बजट घाटा शून्य होता है।


4. प्राथमिक घाटा (Primary Deficit)-

➠प्राथमिक घाटा = राकोषीय घाटा - चुकाया गया ब्याज

➠Primary Deficit = Fiscal Deficit - Interest Paid

➠प्राथमिक घाटा इस बात की ओर संकेत करता है की वर्तमान ऋण का कितना भाग पूराने ब्याज चुकाने के लिए किया जा रहा है।


घाटे का वित्तयन (Deficit Financing)-

➠घाटे को पूरा करने के लिए निम्नलिखित स्रोतों का प्रयोग किया जाता है।

1. कर राजस्व में वृद्धि की जाती है।

2. घाटे का मौद्रिकरण (नये नोट छाप लेना)

3. ऋण में वृद्धि करना।


➠सरकार के द्वारा कुछ घाटा जानबुझ कर रखा जाता है। जिससे की आधारभूत ढांचे का निर्माण किया जा सके तथा बाजार में मांग को बढ़ाया जा सके।

➠सरकार के द्वारा कुछ घाटा जानबुझ कर रखने की अनधारणा J.M. Keynes नामक अर्थशास्त्री के द्वारा दी गई थी।


अधिक राजकोषीय घाटे के प्रभाव-

1. ऋण भार आने वाली पीढ़ी पर हस्तांतरित हो जाता है। जिससे भविष्य की पीढ़ी अपनी विकासात्मक महत्वकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पाती है।

2. यदि ऋण विदेशों से लिया जाता है तब देश की सम्प्रभूता प्रभावित हो सकती है।

3. अधिक राजकोषीय घाटे से देश ऋण जाल में फस सकता है। ऋण जाल का अर्थ है पूराने ऋणों को चुकाने के लिए नये ऋण लेना।

4. विदेशी ऋणों का भूगतान विदेशी मुद्रा में किया जाता है जिससे विदेशी मुद्रा भण्डार कम होने लगता है। या विदेशी मुद्रा भण्डार प्रभावित होता है।

5. यदि ऋण देश के अन्दर से लिया जाता है तब निजी क्षेत्र के लिए ऋण की उपलब्धता कम हो जायेगी। निजी क्षेत्र के लिए ऋण की उपलब्धता कम होने पर निजी निवेश प्रभावित होगा।

6. अधिक राजकोषीय घाटे का अर्थ है की सरकार के द्वारा खर्च अधिक किया जा रहा है तथा अधिक खर्च से मुद्रास्फीति बढ़ने लगती है।

7. अधिक राजकोषीय घाटे का अर्थ है की देश का राजकोषीय प्रबंधन अच्छा नहीं है देश का राजकोषीय प्रबंधन अच्छा नहीं होने से अर्थव्यवस्था की विश्वनियता कम होती है तथा विदेशी निवेश प्रभावित होता है।

8. यदि घाटे का मौद्रिकरण किया जाता है तब बाजार में तरलता बढ़ जाती है बाजार में तरलता बढ़ने से मुद्रा का मूल्य कम होने लगता है।

9. राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए सरकार के द्वारा पूंजीगत खर्चों को कम कर दिया जाता है। पूंजीगत खर्चे कम करने से आधारभूत ढांचा प्रभावित होता है।

10. सरकार के द्वारा राजस्व कर को बढ़ाने के लिए कर दरों को बढ़ा दिया जाता है। यदि प्रत्यक्ष करों को बढ़ाया जाता है तब निवेश प्रभावित होता है। यदि अप्रत्यक्ष करों को बढ़ाया जाता है तब मुद्रास्फीति में वृद्धि होती है। कर दरों को बढ़ाने से सदेव राजस्व कर में वृद्धि नहीं होती है। राजस्व कर तथा कर की दर को Laffer curve के माध्यम से दर्शाया जाता है।

11. राजकोषीय प्रबंधन खराब होने के कारण क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के द्वारा क्रेडिट रेटिंग को कम कर दिया जाता है। क्रेडिट रेटिंग कम होने के कारण ऋण मिलना और भी मुश्किल हो जाता है।


राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के उपाय-

1. राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation)

2. शून्य आधारित बजट (Zero Based Budget)

3. आउटकम बजट (Outcome Budget)

4. जेंडर बजट (Gender Budget)


1. राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation)-

➠राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए राजस्व का अधिकतमीकरण, व्यय का युक्तिकरण तथा ऋण के बेहतर प्रबंधन का प्रयोग किया जाता है। राजकोषीय घाटे को कम करने की इस प्रक्रिया को राजकोषीय समेकन कहा जाता है।

➠राजकोषीय समेकन के दो भाग है जैसे-

(अ) राजस्व का अधिकतमीकरण (Revenue Maximization)

(ब) व्यय का युक्तिकरण (Expenditure Rationalization)


(अ) राजस्व का अधिकतमीकरण (Revenue Maximization)-

(I) कर में सुधार करना जैसे- GST

(II) काले धन के विरुद्ध कार्यवाही करना

(III) गैर कर राजस्व में वृद्धि करना

(IV) विनिवेश को बढ़ाना

(V) सरकारी परिसंपत्तियों को किराये पर देना जैसे- राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline- NMP)


(ब) व्यय का युक्तिकरण (Expenditure Rationalization)-

(I) बेहतर ऋण प्रबंधन करना जिससे की कम ब्याज दर पर ऋण की व्यवस्था की जा सके।

(II) सब्सिडी का बेहतर लक्ष्यीकरण किया जाना चाहिए।

(III) सब्सिडी को पहुचाने में लगने वाले खर्च को कम किया जाना चाहिए जैसे- प्रत्यक्ष लाभ का हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer- DBT)

(IV) सरकार के संचालन के खर्च को कम किया जाना चाहिए। सरकारी कर्मचारियों के वेत्तन तथा पेंशन को युक्तिसंगत किया जाना चाहिए।

(V) पूंजीगत खर्चों को कम करने के लिए सार्वजनिक निजी साझेदारी (Public Private Partnership- PPP) का प्रयोग किया जाना चाहिए। सार्वजनिक निजी साझेदारी को PPP Model भी कहा जाता है।


FRBM Act, 2003-

➠FRBM का पूरा नाम- Fiscal Responsibility and Budget Management Act, 2003

➠FRBM का पूरा नाम- राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003

➠राकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 पारित किया गया था।

➠राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम वर्ष 2003 में पारित किया गया था।

➠राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के अनुसार वर्ष 2006 के बाद सरकार सीधे RBI से ऋण नहीं ले सकती है।

➠राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के तहत भारत का वित्त मंत्री के द्वारा बजट के साथ संसद में तीन दस्तावेज पेश या प्रस्तुत किये जाने चाहिए। जैसे-

1. मध्यम अवधि का राजकोषीय नीति का वक्तव्य (Medium Term Fiscal Policy Statement- MTFPS)

2. राजकोषीय नीति रणनीति वक्तव्य (Fiscal Policy Strategy Statement- FPSS)

3. बृहद आर्थिक रूपरेखा विवरण (Macro Economic Framework Statement- MEFS)


FRBM Act, 2003 के मुख्य उद्देश्य-

1. राजकोषीय प्रबंधन को दक्ष, प्रभावी तथा पारदर्शी बनाना।

2. राजकोषीय अनुसासन स्थापित करना।

3. सरकार के राजस्व व्यय तथा ऋण का बेहतर प्रबंधन करना।

4. राजकोषीय नीति व मौद्रिक नीति में बेहतर समन्वय स्थापित करना।

5. अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाना।

6. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था की विश्वनियता को बढ़ाना।

7. राजकोषीय जवाबदेहीता को सुनिश्चित करना।


FRBM Act, 2003 के लक्ष्य-

➠राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के द्वारा राजकोषीय घाटा 3% तथा राजस्व घाटा 0% का लक्ष्य रखा गया था। राजकोषीय उत्तरदायित्व और प्रबंधन अधिनियम, 2003 के द्वारा इस लक्ष्य को वर्ष 2008-09 में पूरा करना है।

➠वर्ष 2008-09 में राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सका इसीलिए लक्ष्य की समय सीमा को बढ़ाकर वर्ष 2012 कर दिया गया था।

➠वर्ष 2012 में भी यह लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सका था इसीलिए इस लिक्ष्य की समय सीमा को  बढ़ाकर वर्ष 2015 कर दिया गया था। तथा राजस्व घाटे के स्थान पर प्रभावि राजस्व घाटे को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया था।

➠वर्ष 2015 में भी यह लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सका था इसीलिए इस लक्ष्य की समय सीमा को बढ़ाकर वर्ष 2018 कर दिया गया था।


FRBM Review Committee (FRBM समीक्षा समिति)-

➠राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन समीक्षा समिति का गठन वर्ष 2016 में किया गया था।

➠राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन समीक्षा समिति का अध्यक्ष N.K. Singh को बनाया गया था।

➠N.K. Singh 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष भी है।

➠वर्तमान में भारत में 15वां वित्त आयोग चल रहा है।

➠राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन समीक्षा समिति को N.K. Singh समिति भी कहा जाता है।


FRBM समीक्षा समिति की मुख्य सिफारिशें-

1. राजकोषीय घाटा 2.5% तथा राजस्व घाटा 0.8% होना चाहिए।

2. राजकोषीय घाटा तथा राजस्व घाटे का यह लक्ष्य वर्ष 2023 तक प्राप्त किया जाना चाहिए।

3. राजकोषीय घाटा तथा राजस्व घाटे के इस लक्ष्य में 0.5% का विचलन किया जा सकता है। राजकोषीय घाटा तथा राजस्व घाटे में के इस लक्ष्य विचलन को एस्केप क्लॉज (Escape Clause) कहा गया है।

4. राजकोषीय घाटा तथा राजस्व घाटे के इस लक्ष्य में 0.5% का विचलन निम्नलिखित परिस्थितियों में किया जा सकता है जैसे-

(I) युद्ध की स्थित में

(II) राष्ट्रीय आपदा आने पर

(III) कृषि को भारी नुकसान होने पर

(IV) अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक सुधार की स्थित में

5. सरकार के राजकोषीय प्रबंधन पर नजर रखने के लिए एक स्वतंत्र राजकोषीय परिषद का गठन किया जाना चाहिए।

6. ऋण और GDP का अनुपात 60% होना चाहिए जिसमें केन्द्र सरकार का ऋण 40% तथा राज्य सरकार का ऋण 20% होना चाहिए।

7. एक नया व्यापक राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम बनाया जाना चाहिए।


2. शून्य आधारित बजट (Zero Based Budget)-

➠पारंपरिक बजट में सिर्फ नये खर्चों की समीक्षा की जाती है पूराने खर्चों की समीक्षा नहीं की जाती है।

➠शून्य आधारित बजट में नये तथा पूराने सभी खर्चों की समीक्षा की जाती है।

➠शून्य आधारित बजट से अनावश्यक खर्चों को कम किया जा सकता है। तथा रोजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने में मदत मिलती है।

➠सन् 1986 में विज्ञान एवं तकनीक विभाग के द्वारा शून्य आधारित बजट को पहली बार अपनाया गया था।

➠शून्य आधारित बजट की मुख्य चुनौती यह है की इसमें समय अत्यधिक लगता है। इसीलिए शून्य आधारित बजट को आंशिक रूप से ही अपनाया गया है।


3. आउटकम बजट (Outcome Budget)-

➠आउटकम बजट को वर्ष 2005 में शुरू किया गया था।

➠आउटकम बजट के तहत प्रत्येक खर्च के सामने एक भौतिक लक्ष्य रखा जाता है। तथा खर्च की समीक्षा भौतिक लक्ष्य के आधार पर की जाती है। जिससे कारण व्यय की प्रभावशिलता को बढ़ाया जा सकता है।


4. जेंडर बजट (Gender Budget)-

➠जेंडर बजट के माध्यम से महिलाओं तथा बच्चों के लिए किये जाने वाले व्यय को अलग से दर्शाया जाता है।


जेंडर बजट के लाभ-

1. जेंडर बजट से सरकार की संवेदनशीलता का पता लगता है।

2. जेंडर बजट सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।

3. महिलाओं तथा बच्चों की मुद्दों के प्रति जन जागरूकता बढ़ती है।

4. महिला और बाल सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है।

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