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आँख के रोग या नेत्र रोग (Eye Disease)

आँख के रोग या नेत्र रोग

(Eye Disease)


आँख से संबंधित रोग या नेत्र रोग (Eye Disease)-

1. रतौंधी रोग (Night Blindness)

2. निकट दृष्टि दोष (Near Sightedness Error) या मायोपिया (Myopia)

3. दूर दृष्टि दोष (Far Sightedness Error) या हाइपरमेट्रोपिया (Hypermetropia)

4. जरा दृष्टि दोष या प्रेसबायोपिया (Presbyopia)

5. अबिन्दुकता (Astigmatism) या दृष्टिवैषम्य

6. मोतियाबिंद (Cataract)

7. ग्लूकोमा (Glaucoma) या काला पानी या काला मोतिया


1. रतौंधी रोग (Night Blindness)-

➠मनुष्य की आँख के आंतरिक परत या रेटिना में स्थित शलाका (Rod) में रोडोप्सीन पाया जाता है।

➠शलाका में रोडोप्सीन के निर्माण के लिए विटामिन-A आवश्यक होता है।

➠मनुष्य की आँख में रोडोप्सीन रात में या अंधेरे में देखने के लिए आवश्यक होता है।

➠मनुष्य में रतौंधी रोग विटामिन-A की कमी हो जाने के कारण होता है।

➠मनुष्य में विटामिन-A की कमी होने से मनुष्य की आँख में रेटिनिन नहीं बन पाता है, आँख में रेटिनिन नहीं बनने के कारण रोडोप्सीन नहीं बन पाता है और रोडोप्सीन नहीं बनने के कारण मनुष्य की आँख में रतौंधी रोग हो जाता है।

➠मनुष्य की आँख में रतौंधी रोग होने पर दिन में तो अच्छी तरह दिखाई देता है लेकिन रात के समय या अंधेरे में ठीक से दिखाई नहीं देता है।

➠रतौंधी रोग के इलाज के लिए विटामिन-A युक्त फल एवं सब्जियों को सेवन करें।


2. निकट दृष्टि दोष (Near Sightedness Error) या मायोपिया (Myopia)-

➠निकट दृष्टि दोष को मायोपिया भी कहा जाता है। अर्थात् निकट दृष्टि दोष का वैज्ञानिक नाम मायोपिया है।

➠निकट दृष्टि दोष में व्यक्ति की आँख में रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिम्ब (Image) रेटिना पर ना बनके रेटिना से पहले ही बन जाता है।

➠मनुष्य की आँख में सामान्यतः प्रतिबिम्ब रेटिना पर बनता है।

➠व्यक्ति की आँख में प्रतिबिम्ब रेटिना पर ना बनके रेटिना से पहले बनने के कारण व्यक्ति को निकट दृष्टि दोष हो जाता है।

➠मनुष्य की आँख में निकट दृष्टि दोष हो जाने पर निकट की वस्तु तो साफ दिखाई देती है लेकिन दूर की वस्तु साफ दिखाई नहीं देती है।

➠मनुष्य की आँख में निकट दृष्टि दोष को दूर करने के लिए अवतल लैंस (Concave Lens) का उपयोग किया जाता है। अर्थात् अवतल लैंस युक्त चश्मा दिया जाता है।


निकट दृष्टि दोष या मायोपिया का कारण-

1. निकट दृष्टि दोष में मनुष्य की आँख में स्थित उत्तल लेंस का आकार बड़ा हो जाता है।

➠मनुष्य की आँख में स्थित उत्तर लेंस का आकार बड़ा होने के कारण रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिम्ब रेटिना से पहले ही बनता है। जिसके कारण दूर की वस्तु धुंधली दिखाई देती है।

2. मनुष्य की आँख का आकार बड़ा होने के कारण रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिम्ब रेटिना पर ना बनकर रेटिना से पहले ही बन जाता है। जिसेक कारण दूर की वस्तु धंधली दिखाई देती है।


3. दूर दृष्टि दोष (Far Sightedness Error) या हाइपरमेट्रोपिया (Hypermetropia)-

➠दूर दृष्टि दोष को हाइपरमेट्रोपिया भी कहा जाता है। अर्थात् दूर दृष्टि दोष का वैज्ञानिक नाम हाइपरमेट्रोपिया है।

➠दूर दृष्टि दोष में व्यक्ति की आँख में रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिम्ब रेटिना पर ना बनके रेटिना से दूर बनता है। सामान्यतः मनुष्य की आँख में प्रतिबिम्ब रेटिना पर बनता है।

➠व्यक्ति की आँख में प्रतिबिम्ब रेटिना पर ना बनके रेटिना से दूर बनने के कारण व्यक्ति को दूर दृष्टि दोष हो जाता है।

➠मनुष्य की आँख में दूर दृष्टि दोष हो जाने पर दूर की वस्तु तो साफ दिखाई देती है। लेकिन पास की वस्तु साफ दिखाई नहीं देती है।

➠मनुष्य की आँख में दूर दृष्टि दोष को दूर करने के लिए उत्तल लैंस (Convex Lens) का उपयोग किया जाता है। अर्थात् उत्तल लैंस युक्त चश्मा दिया जाता है।


दूर दृष्टि दोष या हाइपरमेट्रोपिया का कारण-

1. दूर दृष्टि दोष में मनुष्य की आँख में स्थित उत्तल लेंस का आकार छोटा हो जाता है।

➠मनुष्य की आँख में स्थित उत्तर लेंस का आकार छोटा होने के कारण रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिम्ब रेटिना से दूर बनता है। जिसके कारण पास की वस्तु धुंधली दिखाई देती है।

2. मनुष्य की आँख का आकार छोटा होने के कारण रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिम्ब रेटिना पर ना बनकर रेटिना से दूर बनता है। जिसेक कारण पास की वस्तु धंधली दिखाई देती है।


4. जरा दृष्टि दोष या प्रेसबायोपिया (Presbyopia)-

➠जरा दृष्टि दोष मनुष्य की आँख में होने वाला रोग है।

➠जरा दृष्टि दोष मनुष्य में सामान्यतः वृर्द्धावस्था में होने वाला रोग है।

➠जरा दृष्टि दोष में रोगी को पास की वस्तु तथा दूर की वस्तु दोनों ही साफ दिखाई नहीं देती है। अर्थात् जरा दृष्टि दोष में रोगी को पास तथा दूर की वस्तु धुंधली दिखाई देती है।

➠जरा दृष्टि दोष में रोगी के इलाज के लिए द्विफोकसी लेंस युक्त चश्मा दिया जाता है।

➠जरा दृष्टि दोष में रोगी के इलाज के लिए दिये जाने वाला द्विफोकसी लेंस (Bifocal Lens) युक्त चश्मा में लेंस का ऊपरी भाग ऋमात्मक होता है तथा लेंस का निचला भाग धनात्मक होता है।


5. अबिन्दुकता (Astigmatism) या दृष्टिवैषम्य-

➠अबिन्दुकता एक दृष्टि दोष है।

➠अबिन्दुकता को ही दृष्टिवैषम्य कहा जाता है।

➠अबिन्दुकता को एस्टिग्मेटिज्म भी कहा जाता है।

➠अबिन्दुकता रोग में मनुष्य की आँख के काॅर्निया की आकृति गोलीय नहीं होती है।

➠मनुष्य की आँख के काॅर्निया की आकृति गोलीय नहीं होने के कारण जिस व्यक्ति को क्षैतिज दिशा में तो साफ दिखाई देता उसे उर्ध्व दिशा में साफ दिखाई नहीं देता है। और जिस व्यकित को उर्ध्व दिशा में साफ दिखाई देता है तो क्षैतिज दिशा में साफ दिखाई नहीं देता है। इसी रोग को अबिन्दुकता कहा जाता है।

➠मनुष्य की आँख में अबिन्दुकता या दृष्टिवैषम्य रोग होने पर अबिन्दुकता या दृष्टिवैषम्य रोगी को बेलनाकार लेंस (Cylindrical Lens) युक्त चश्मा दिया जाता है।


6. मोतियाबिंद (Cataract)-

➠सामान्यतः मनुष्य की आँख का लेंस लचिला और पारदर्शी होता है लेकिन मनुष्य की आँख के लेंस पर कैल्शियम (Calcium) का जमाव हो जाने के कारण आँख का लेंस कठोर (Hard) और अपारदर्शी (Non Transparent) होने लगता है। इसीलिए व्यक्ति किसी भी वस्तु को साफ या स्पष्ट नहीं देख पाता है।

➠मनुष्य की आँख के लेंस पर कैल्शियम का जमाव हो जाने के कारण व्यक्ति को धुंधला दिखाई देता है जिसे मोतियाबिंद कहा जाता है। अर्थात् मोतियाबिंद में रोगी को निकट की वस्तु तथा दूर की वस्तु दोनों ही धुंधली दिखाई देती है।

➠मोतियाबिंद के इलाज के लिए मोतियाबिंद के रोगी को लेंस प्रत्यारोपण (Lens Transplantation) के द्वारा आँख में स्थित कठोर लेंस को हटाकर कृत्रिम लेंस (Artificial Lens) लगाया जाता है।


7. ग्लूकोमा (Glaucoma) या काला पानी या काला मोतिया-

➠ग्लूकोमा मनुष्य की आँख में होने वाला एक रोग है।

➠ग्लूकोमा को काला पानी भी कहा जाता है।

➠ग्लूकोमा को काला मोतिया भी कहा जाता है।

➠जब मनुष्य की आँख में जलीय द्रव का निर्माण अत्यधिक होने लगे या आँख में जलीय द्रव कम निकलता हो तो मनुष्य की आँख में जलीय द्रव की मात्रा बढ़ जाती है।

➠मनुष्य की आँख में जलीय द्रव की मात्रा बढ़ जाने के कारण आँख में अंत नेत्रिय दाब बढ़ जाता है।

➠मनुष्य की आँख में अंत नेत्रिय दाब बढ़ जाने के कारण प्रारम्भ में आँख में दर्द होता है और बाद में आँख की काॅर्निया क्षतिग्रस्त हो जाता है काॅर्निया क्षतिग्रस्त (Damage) होने के बाद रेटिना क्षतिग्रस्त हो जाती है। और अंत में व्यक्ति अंधा हो जाता है।

➠मनुष्य की आँख में अंत नेत्रिय दाब बढ़ने के कारण आँख की काॅर्निया तथा रेटिना का क्षतिग्रस्त होना ही ग्लूकोमा कहलाता है।


आँख के अपवर्तनांक दोष (Refractive Errors of Eye)-

➠मनुष्य की आँख के अपवर्तनांक दोष में निम्नलिखित रोग शामिल है।

1. निकट दृष्टि दोष (Near Sightedness Error) या मायोपिया (Myopia)

2. दूर दृष्टि दोष (Far Sightedness Error) या हाइपरमेट्रोपिया (Hypermetropia)

3. जरा दृष्टि दोष या प्रेसबायोपिया (Presbyopia)

4. अबिन्दुकता (Astigmatism) या दृष्टिवैषम्य


लेंस की समायोजन क्षमता या समंजन क्षमता (Power of Accommodation of the Lens)-

➠मनुष्य की आँख में स्थित लेंस की वह क्षमता है जिसके द्वारा आँख में स्थित लेंस अपनी मोटाई में परिवर्तन करके अपनी फोकस दूरी को बदलता रहता है। या फोकस दूरी को कम या ज्यादा कर सकता है लेंस की इसी क्षमता को ही लेंस की समायोजन क्षमता या समंजन क्षमता कहा जाता है।

➠सिलियरी बाॅडी के कार्य के द्वारा ही मनुष्य की आँख में लेंस की फोकस दूरी कम या ज्यादा होती है।

➠मनुष्य की आँख में लेंस की समायोजन क्षमता या समंजन क्षमता के कारण निकट की वस्तु तथा दूर की वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना पर बन जाता है।

➠मनुष्य की आँख में लेंस की समायोजन क्षमता या समंजन क्षमता के कारण जब दूर की वस्तु को देखते है तब आँख में स्थित लेंस की मोटाई कम हो जाती है। आँख में स्थित लेंस की मोटाई कम होने से लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है और दूर की वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना पर बन जाता है।

➠मनुष्य की आँख में लेंस की समायोजन क्षमता या समंजन क्षमता के कारण जब निकट की वस्तु को देखते है तब आँख में स्थित लेंस की मोटाई बढ़ जाती है। आँख में स्थित लेंंस की मोटाई बढ़ जाने से लेंस की फोकस दूरी कम हो जाती है और निकट की वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना पर बन जाता है।

➠मनुष्य की आँख में स्थित लेंस के मोटाई में परिवर्तन करने के गुण को लेंस की समायोजन क्षमता या समंजन क्षमता कहते है।


आँख (Eye) की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

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