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प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (Prime Minister Dhan-Dhaanya Krishi Yojana- PMDDKY)

सामान्य परिचय :-

𑇐 PMDDKY Full Form : Prime Minister Dhan-Dhaanya Krishi Yojana
𑇐 PMDDKY का पूरा नाम : प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना
𑇐 भारत सरकार द्वारा पहली बार इस योजना की घोषणा बजट 2025-26 में की गई थी।
𑇐 केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस योजना को मंजूरी 16 जुलाई, 2025 को दी गई थी।
𑇐 इस योजना का औपचारिक शुभारंभ 11 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) में किया गया था।
𑇐 IARI Full Form : Indian Agricultural Research Institute
𑇐 IARI का पूरा नाम : भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान
𑇐 यह योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई है।
𑇐 इस योजना का नोडल मंत्रालय "कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय" (Ministry of Agriculture and Farmers Welfare) है।
𑇐 यह योजना विशेष रूप से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर केंद्रिय है।
𑇐 यह योजना नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित है।
𑇐 जनवरी 2018 में शुरू किए गए आकांक्षी जिला कार्यक्रम का उद्देश्य देश भर के 112 सबसे कम विकसित जिलों का शीघ्र और प्रभावी रूप से रूपांतरण करना है।


मौजूदा योजनाओं का अभिसरण :-

𑇐 यह योजना 11 मंत्रालयों की 36 मौजूदा योजनाओं, अन्य राज्य योजनाओं और निजी क्षेत्र के साथ स्थानीय साझेदारी के समन्वय के माध्यम से लागू की जाएगी। जिसमें प्रमुख योजनाएं निम्नलिखित हैं-
  1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)
  2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
  3. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
  4. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
  5. एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF)
  6. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF)
  7. प्रधानमंत्री-कुसुम योजना (PM-KUSUM)
  8. पशुपालन और मत्स्य पालन योजनाएं
𑇐 कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA & FW) इस पहल के सफल कार्यान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाएगा और संबद्ध मंत्रालयों या विभागों, नीति आयोग, नाबार्ड और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों आदि के साथ मिलकर कार्य करेगा।
𑇐 DA & FW Full Form : Department of Agriculture and Farmers Welfare
𑇐 DA & FW पूरा नाम : कृषि एवं किसान कल्याण विभाग

इस योजना के मुख्य उद्देश्य :-

  1. कृषि उत्पादकता बढ़ाना।
  2. फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने में वृद्धि करना।
  3. पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल कटाई के बाद भंडारण को बढ़ाना।
  4. सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना।
  5. अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऋण की उपलब्धता को सुगम बनाना।

इस योजना की अवधि :-

𑇐 इस योजना की अवधि वित्त वर्ष 2025-26 से शुरू होकर छह वर्ष तक रहेगी।

इस योजना का बजट :-

𑇐 इस योजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा 6 वर्ष की अवधि के लिए प्रतिवर्ष कुल 24,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।


इस योजना में शामिल जिले :-

𑇐 इस योजना में भारत के राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 100 जिले शामिल हैं जिनका चयन तीन प्रमुख संकेतकों के आधार पर किया गया है, जो निम्नलिखित हैं-
  1. कम उत्पादकता
  2. कम फसल सघनता
  3. कम ऋण वितरण
𑇐 भारत के प्रत्येक राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश में जिलों की संख्या शुद्ध फसल क्षेत्र और परिचालन जोतों के हिस्से पर आधारित है। हालांकि, प्रत्येक राज्य से कम से कम 1 जिले का चयन किया गया है।
  • शुद्ध फसल क्षेत्र : किसी दिए गए कृषि वर्ष में फसलों बोई गई भूमि के कुल क्षेत्रफल को संदर्भित करता है, जिसकी गणना केवल एक बार की जाती है, भले ही उस वर्ष एक ही भूमि क्षेत्र पर कई फसलें उगाई गई हों।
𑇐 इस योजना में राजस्थान राज्य के कुल 8 जिले शामिल हैं। जैसे- बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, जैसलमेर, जोधपुर, जालौर, नागौर, पाली


इस योजना से होने वाले लाभ :-

𑇐 इस योजना के परिणामस्वरूप होने वाले प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं :-
  1. उत्पादकता में वृद्धि
  2. कृषि और संबंद्ध क्षेत्र में मूल्यवर्धन
  3. स्थानीय आजीविका सृजन
  4. घरेलू उत्पादन में वृद्धि
  5. आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) की प्राप्ति।
𑇐 इस योजना से 1.7 करोड़ किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है।

इस योजना का संचालन या कार्यान्वयन रणनीति :-

इस योजना का प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी त्रिस्तरीय कार्यान्वयन संरचना के माध्यम से किया जाएगा जिसमें जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा। जैसे-
  1. जिला स्तर :-
    • जिला स्तर पर जिला कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की योजना तैयार करने एवं उसे लागू करने के लिए चयनित जिलों में से प्रत्येक में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला धन-धान्य कृषि योजना समिति का गठन किया जाएगा।
    • यह समिति किसानों और पंचायत पदाधिकारियों सहित संबंधित हितधारकों के परामर्श से एक जिला कार्य योजना को अंतिम रूप देगी।
    • जिला योजनाएं फसल विविधीकरण, जल और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता, प्राकृतिक और जैविक खेती का विस्तार और टिकाऊ जलवायु-लचीली कृषि को अपनाने जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप होंगी, साथ ही किसानों की आय और ग्रामीण आजीविका किए जाने वाले भौतिक और वित्तीय हस्तक्षेपों का खाका तैयार किया जाएगा।
  2. राज्य स्तर :
    • राज्य स्तर पर, जिला योजनाओं की समीक्षा एवं निगरानी राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य धन-धान्य कृषि योजना समिति द्वारा की जाएगी।
    • राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य धन-धान्य कृषि योजना (DDKY) समिति द्वारा प्रत्येक तिमाही में जिला योजनाओं की व्यापक समीक्षा और निगरानी की जाएगी।
    • जिला योजनाओं में शामिल उपायों को केंद्र और राज्य सरकारों के संबंधित दिशानिर्देशों के अनुसार प्रत्येक योजना की वार्षिक कार्य योजनाओं में शामिल किया जाएगा, ताकि राज्य द्वारा उन्हें प्राथमिकता दी जा सके।
  3. राष्ट्रीय स्तर : राष्ट्रीय स्तर पर दो समितियाँ हैं जैसे-
    1. कार्यकारी समिति : इस समिति की अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री करते हैं।
    2. निगरानी समिति : इस समिति की अध्यक्षता कृषि एवं परिवार कल्याण सचिव करते हैं।
 

इस योजना की निगरानी :-

  1. इस योजना में शामिल प्रत्येक जिले की प्रगति को एक केंद्रीय निगरानी डौशबोर्ड पर 117 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPI, नीति आयोग द्वारा विकसित किया जा रहा है) के माध्यम से मासिक आधार पर ट्रैक किया जाएगा। जिसके माध्यम से प्रत्येक जिले को मासिक रूप से रैंकिंग दी जाएगी।
  2. इस योजना से संबंधित मंत्रालयों या विभागों, नीति आयोग और संबंधित राज्यों की एक केंद्रीय समिति तिमाही आधार पर प्रगति की समीक्षा करेगी जिसकी अध्यक्षता DA & FW सचिव करेंगे।
  3. नीति आयोग पोर्टल पर अपलोड की गई जिला योजनाओं की समीक्षा करेगा और मार्गदर्शन प्रदान करेगा कि योजनाएँ व्यापक और योजना के उद्देश्यों के साथ अच्छी तरह से संरेखित हैं।
  4. केंद्रीय नोडल अधिकारी (CNO) प्रत्येक DDKY में फील्ड विजिट करेंगें और नियमित रूप से जिलों के प्रदर्शन की समीक्षा और निगरानी करेंगे।
  5. केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAU) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAU) को जिले में कृषि के सभी पहलुओं के लिए तकनीकी ज्ञान भागीदार के रूप में प्रत्येक जिले को सौंपा गया है।


अपेक्षित परिणाम :-

इस योजना से इन 100 चयनित जिलों में लक्षित परिणामों में सुधार होने से देश के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों के मुकाबले समग्र औसत में वृद्धि होगी। जैसे-जैसे इन 100 जिलों के संकेतक सुधरेंगे वैसे-वैसे राष्ट्रीय संकेतक स्वतः ही ऊपर की ओर प्रक्षेपवक्र दिखाएंगे।





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