बीकानेर का राठौड़ वंश

👉 बीकानेर का राठौड़ वंश-
✍ संस्थापक- राव बीका
✍ राव बीका और एक जाट नेता नेर/नर के द्वारा बीकानेर के राठौड़ वंश की नींव रखी गई।
✍ राजस्थान का पहला राठौड़ वंश मारवाड़ था।
✍ राजस्थान का दुसरा राठौड़ वंश बीकानेर था।
✍ राजस्थान का तीसरा राठौड़ वंश किशनगढ़ था।



1. राव बीका-
✍ शासन काल- 1465-1504 ई.
✍ राव बीका राव जोधा के पाँचवे पुत्र थे।
✍ राव बीका ने बीकानेर में राठौड़ वंश की नींव करणीमाता के अाशीर्वाद से 1465 ई. में रखी थी।
✍ राव बीका ने 1468 ई. में बीकानेर बसाया तथा बीकानेर को ही अपनी राजधानी बनाया था।

2. राव लूणकरण-
✍ शासन काल- 1505- 1526 ई.
✍ बीठू सूजा ने अपने ग्रंथ "जैतसी रो छंद" में राव लूणकरण को कलियुग का कर्ण कहा है।
✍ 1526 ई. में नारनौल के नवाब के साथ युद्ध करते समय 1526 ई. में राव लूणकरण का निधन हो गया था।

3. राव जैतसी-
✍ शासन काल- 1526-1541 ई.
✍ बीठू सूजा ने अपना ग्रंथ "जैतसी रो छंद" राव जैतसी के काल में लिखा था।
✍ 17 मार्च 1527 को खानवा के युद्ध में राव जैतसी ने अपने पुत्र कल्याणमल को भेजा।
✍ 26 अक्टूबर 1534 को राव जैतसी ने बाबर के पुत्र कामरान पर आक्रमण कर बीकानेर छीन लिया।

👉 पाहेबा/साहेबा का युद्ध-
✍ समय- 1541 ई.
✍ स्थान- पाहेबा (श्री गंगानगर)
✍ मध्य- बीकानरे शासक राव जैतसी तथा मारवाड़ शासक मालदेव
✍ जीत- मालदेव
✍ 26 फरवरी 1542 को मालदेव से युद्ध करते हुए राव जैतसी वीर गति को प्राप्त हुआ।

4. राव कल्याणमल-
✍ शासन काल- 1544-1574 ई.
✍ गिरि सुमेल के युद्ध में शेरशाह सूरी की सहायता राव कल्याणमल द्वारा कि गई।
✍ राव कल्याणमल शेरशाह सूरी के सहयोग से बीकानेर के शासक बने।
✍ 1570 ई. के नागौर दरबार में राव कल्याणमल अपने दोनों पुत्रों (रायसिंह व पृथ्वीराज राठौड़) के साथ उपस्थित हुए।
✍ अकबर की अधीनता स्वीकार करने वाला बीकानेर का प्रथम शासक राव कल्याणमल था। जिसने 1570 ई. में नागौर दरबार में अधीनता स्वीकार की थी।


👉 पृथ्वीराज राठौड़-
✍ पृथ्वीराज राठौड़ राव कल्याणमल का छोटा पुत्र था।
✍ पृथ्वीराज राठौड़ अकबर के नवरत्नों में शामिल था।
✍ पृथ्वीराज राठौड़ ने 1580 ई. में डिंगल भाषा में "बेलि किसन रुक्मणी री" नामक ग्रंथ लिखा।
✍ कवि दुरसा आढ़ा ने "बेलि किसन रुक्मणी री" ग्रंथ को पाँचवाँ वेद तथा 19वाँ पुराण कहा है।

5. महाराजा रायसिंह-
✍ शासन काल- 1574-1612 ई.
✍ रायसिंह दो मुगल बादशाहों अकबर तथा जहाँगीर की सेवा में रहे।
✍ हिंदु राजाओं में जयपुर के बाद बीकानेर के रायसिंह का प्रभाव मुगल दरबार में रहा।
✍ मुगल दरबार में मानसिंह के बाद सर्वाधिक प्रभाव रायसिंह का था।
✍ जहाँगीर पर सर्वाधिक प्रभाव राजपूत राजा रायसिंह का था।
✍ 1572 ई. में अकबर ने रायसिंह को जोधपुर का प्रशासक नियुक्त किया।
✍ रायसिंह ने 1574 ई. में चन्द्रसेन से सिवाणा का दुर्ग प्राप्त करने हेतु आक्रमण किया परन्तु असफल रहा।
✍ जहाँगीर ने रायसिंह को 5000 का मनसबदार बनाया।
✍ खुसरो के विद्रोह के समय आगरा कि रक्षा का दायित्व रायसिंह को सौंपा गया।
✍ रायसिंह ने बीकानेर में अपने मंत्री क्रमचन्द कि देख-रेख में 1589-1594 ई. में जुनागढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया व रायसिंह प्रशस्ति उत्कीर्ण करवायी।
✍ मुनसी देवी प्रसाद ने रायसिंह को राजपूताना का कर्ण कहा है।
✍ रायसिंह प्रशस्ति का लेखक जैइता नामक जैन मुनी था।
✍ रायसिंह प्रशस्ति संस्कृत भाषा में लिखी गयी है।

6. महाराजा दलपत सिंह-
✍ शासन काल- 1612-1613 ई

7. महाराजा सूरसिंह-
✍ शासन काल- 1613-1631 ई.

8. महाराजा कर्णसिंह-
✍ शासन काल- 1631-1669 ई.
✍ कर्णसिंह ने देशनोक (बीकानेर) में करणीमाता के वर्तमान मंदिर का निर्माण करवाया।
✍ कर्णसिंह को जांगलधर बादशाह की उपाधि दी गई थी। जो की औरंगजेब द्वारा दी गई थी।


9. महाराजा अनूपसिंह-
✍ शासन काल- 1669-1698 ई.
✍ मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा अनूपसिंह को महाराजा व  माही मरातिब कि उपाधि प्रदान की गई।
✍ अनूपसिंह के दरबारी कवि भावभट्ट ने अनूपसिंह संगीत विलास, अनूप संगीत रत्नाकर व अनूपाकुश नामक ग्रंथ कि रचना की।
✍ अनूपसिंह ने संस्कृत भाषा में  अनूपसिंह विवेक, अनूपोदय और कामप्रबोद्ध नामक ग्रंथों की रचना की।

10. महाराजा स्वरूप सिंह-
✍ शासन काल- 1698-1700 ई.

11. महाराजा सुजानसिंह-
✍ शासन काल- 1700-1735 ई.

12. महाराजा जोरावरसिंह-
✍ शासन काल- 1736-1746 ई.

13. महाराजा गजसिंह-
✍ शासन काल- 1746-1787 ई.

14. महाराजा सूरतसिंह-
✍ शासन काल- 1787-1828 ई.
✍ सूरतसिंह ने 1818 ई. में अंग्रेजो के साथ सहायक संधि की।

15. महाराजा रत्नसिंह-
✍ शासन काल- 1828-1851 ई.

16. महाराजा सरदार सिंह-
✍ शासन काल- 1851-1872 ई.

17. महाराजा डूँगरसिंह-
✍ शासन काल- 1872-1887 ई.

18. महाराजा गंगासिंह-
✍ शासन काल- 1887-1943 ई.
✍ गंगासिंह ने 1913 ई. में बीकानेर में प्रजा प्रतिनिधि सभा कि स्थापना की।
✍ गंगासिंह प्रथम विश्व युद्ध के बाद पेरिस शान्ति सम्मेलन में भाग लेने गये।
✍ गंगासिंह के प्रयासो से ही 1921 ई. में नरेन्द्र मण्डल का गठन किया गया।
✍ नरेन्द्र मण्डल का गठन किये जाने के कारण गंगासिंह को चैम्बर आॅफ प्रिंसेज कहा जाता है।
✍ गंगासिंह 1921-1925 ई. तक नरेन्द्र मण्डल के अध्यक्ष रहे थे।
✍ गंगासिंह ने तीनों गोलमेज सम्मेलनों (1930,1931,1932) में भाग लिया था।
✍ 1927 ई. में गंगासिंह ने गंगनहर का निर्माण करवाया था।
✍ छप्पनीया अकाल के समय गंगासिंह बीकानेर के शासक थे।
✍ दूसरे विश्व युद्ध में गंगासिंह ने अपनी ऊँटों कि सेना भेजी जिसे गंगारिसाला कहा जाता है।
✍ महाराजा गंगासिंह को अाधुनिक भारत या राजपूताने का भागीरथ कहा जाता है।

19. महाराजा सार्दूल/सादुल सिंह-
✍ सार्दूल सिंह बीकानेर रियासत का अंतिम शासक था।
✍ आजादी के समय सार्दूल सिंह बीकानेर का शासक था।


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