वर्षा ऋतु (राजस्थान की जलवायु)

👉 राजस्थान में वर्षा ऋतु (राजस्थान की जलवायु)-

👉 वर्षा ऋतु-
✍ वर्षा ऋतु का समय- मध्य जून से सितम्बर तक

👉 राजस्थान में वर्षा-
✍ राजस्थान में अधिकांश वर्षा दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान में होती है।
✍ राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा बंगाल की खाड़ी के मानसून से होती है।

👉 मानसून-
✍ मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के मौसिन शब्द से हुई है।
✍ अरबी भाषा के मौसिन शब्द का अर्थ मौसम होता है।

👉 हिप्पोकस या हिप्पोलस-
✍ विश्व में सर्वप्रथम मानसून का खोजकर्ता अरबी नाविक (यात्री) हिप्पोलस को माना जाता है।

👉 बांसवाड़ा-
✍ राजस्थान में मानसून सर्वप्रथम 16 जून (15 जून से 20 जून के बीच) को बांसवाड़ा जिले में प्रवेश करता है। इसीलिए बांसवाड़ा को मानसून का प्रवेश द्वार भी कहते है।

👉 राजस्थान में औसत वर्षा-
✍ राजस्थान में औसत वर्षा- 57.7 सेंटीमीटर
✍ अजमेर में औसत वर्षा- 57.7 सेंटीमीटर

👉 जुलाई-
✍ राजस्थान में जुलाई के महीने में सर्वाधिक वर्षा होती है।

👉 झालावाड़-
✍ राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला जिला झालावाड़ है।
✍ झालावाड़ में वार्षिक 150 सेंटीमीटर वर्षा होती है।

👉 जैसलमेर-
✍ राजस्थान में सबसे कम वर्षा वाला जिला जैसलमेर है।
✍ जैसलमेर में वार्षिक 15 से 20 सेंटीमीटर वर्षा होती है।

👉 माऊंट आबू (सिरोही)-
✍ राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान सिरोही जिले का माऊंट आबू है।

👉 सम गांव (जैसलमेर)-
✍ राजस्थान में सबसे कम वर्षा वाला स्थान जैसमेर का सम गांव है।

👉 दक्षिणी-पश्चिमी मानसून-
✍ राजस्थान में वर्षा ऋतु को दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के नाम से पुकारा जाता है।
✍ राजस्थान में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून को दो भागो में बाटा गया है। जैसे-
1. अरब सागर वाला मानसून
2. बंगाल की खाड़ी वाला मानसून

1. अरब सागर वाला मानसून-
✍ राजस्थान में सर्वप्रथम अरब सागर वाला मानसून प्रवेश करता है।
✍ राजस्थान में अरब सागर वाला मानसून सर्वप्रथम बांसवाड़ा जिले में प्रवेश करता है।
✍ राजस्थान के दक्षिणी हिस्से जैसे- डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर तथा बांसवाड़ा जिलों में अरब सागर वाले मानसून से ही वर्षा होती है।

👉 पुरवा या पुरवाई-
✍ राजस्थान में बंगाल की खाड़ी के मानसून से चलने वाली पूर्वी पवनों को पुरवा या पुरवाई कहते है।

2. बंगाल की खाड़ी वाला मानसून-
✍ राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा बंगाल की खाड़ी वाले मानसून से होती है।
✍ राजस्थान में बंगाल की खाड़ी वाला मानसून सर्वप्रथम हाड़ौती प्रदेश (कोटा, बारा, बूंदी, झालावाड़) में प्रवेश करता है।

👉 राजस्थान में अकाल-
✍ कर्नल जेम्स टाॅड ने राजस्थान के अकालो को प्राकृतिक रोग की उपाधि दी है।

👉 राजस्थान में अकाल पड़ने के प्रमुख कारण-
✍ राजस्थान में अनियमित तथा अपर्याप्त वर्षा का होना।
✍ अरावली का विस्तार।
✍ मरुस्थल का विस्तार।
✍ वनस्पति का अभाव।
✍ पवनों की दिशा।

👉 राजस्थान के प्रसिद्ध अकाल-

1. चालीसा अकाल-
✍ समय- विक्रम संवत 1840 (1783 ई.)

2. पंतकाल अकाल-
✍ समय- विक्रम संवत 1869 (1812 ई.)

3. सहसा भदुसा अकाल-
✍ समय- विक्रम संवत 1899 (1842 ई.)

4. त्रिकाल अकाल-
✍ समय- विक्रम संवत- 1925 (1869 ई.)

5. छप्पनिया अकाल-
✍ समय- विक्रम संवत 1956 (1899 ई.)
✍ छप्पनिया अकाल के दौरान मेेवाड़ के लोगो ने खेजड़ी वृक्ष की लकड़ी (छोडे) खाकर अपना जीवन व्यतीत किया था।

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