राजस्थान की प्रमुख ख्यात

ख्यात- राजस्थान के वे ग्रंथ या साहित्य जिनमें राजा के दैनिक जीवन की घटनाओं का उल्लेख या वर्णन होता है ख्यात कहलाते है। ख्यात राजस्थानी भाषा में गद्य में लिखा गया साहित्य है। लगभग सभी ख्यात लेखक दरबार के चारण या भाट होते थे। परन्तु मुहणोत नैणसी इसका अपवाद माना जाता है।

1. मुहणौत नैणसी री ख्यात- इस ख्यात का लेखक मुहणौत नैणसी है। मुहणौत नैणसी जोधपुर के राजा जसवंत सिंह का दीवान था। मुहणौत नैणसी री ख्यात राजस्थान की सबसे प्राचीन ख्यात है। मुहणौत नैणसी री ख्यात की भाषा मारवाड़ी व डिंगल भाषा है। मुंशी देवी प्रसाद ने मुहणौत नैणसी को राजपूताना का अबुल-फजल कहा है। (अबुल-फजल का जन्म राजस्थान के नागौर में हुआ था। अबुल-फजल अकबर ने नवरत्नों में शामिल फारसी इतिहासकार था।) मुहणौत नैणसी री ख्यात में राजपूतों की 36 शाखाओं का वर्णन किया गया है। मुहणौत नैणसी री ख्यात को जोधपुर का गजेटियर कहा जाता है।

2. बांकीदास री ख्यात (जोधपुर राज्य की ख्यात)- इस ख्यात का लेखक बांकीदास है। बांकीदास जोधपुर के महाराजा मानसिंह का दरबारी कवि था। बांकीदास री ख्यात में राजस्थान में कन्या वध रोकने के बारे में वर्णन किया गया है। बांकीदास री ख्यात में बीकानेर के शासक रतनसिंह के द्वारा प्रयाग (गया) तीर्थ स्थल पर कन्या वध रोकने की शपथ का वर्णन किया गया है। बांकीदास री ख्यात को जोधपुर राज्य री ख्यात भी कहा जाता है।

3. दयालदास री ख्यात (बीकानेर के राठौडों की ख्यात)- इस ख्यात के लेखक दयालदास है। दयालदास बीकानेर के शासक रतनसिंह का दरबारी था। दयालदास री ख्यात में बीकानेर के राठौड़ शासकों की जानकारी मिलती है। दयालदास री ख्यात को बीकानेर के राठौड़ों की ख्यात भी कहा जाता है।

4. मुण्डियार री ख्यात (राठौड़ों की ख्यात)- मुण्डियार री ख्यात में मुगल शासकों की मारवाड़ की कन्याओं से विवाह की जानकारी मिलती है। मुण्डियार री ख्यात को राठौड़ों की ख्यात भी कहा जाता है।

5. मारवाड़ रा परगना री विगत- इस ख्यात के लेखक मुहणौत नैणसी है। मारवाड़ रा परगना री विगत राजस्थान की सबसे बड़ी ख्यात है। मारवाड़ रा परगना री विगत को राजस्थान का गजेटियर कहा जाता है।

आईने अकबरी (आइन-ए-अकबरी)- यह ग्रंथ अबुल-फजल के द्वारा लिखा गया है। अबुल-फजल के आईने अकबरी ग्रंथ की तुलना मुहणौत नैणसी की मारवाड़ रा परगना री विगत ख्यात से की जाती है।


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