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वित्त बाजार

वित्त बाजार

(Finance Market)


वित्त बाजार (Finance Market)-

➠वह बाजार जहा पैसों का लेनदेन किया जाता है बाजार कहलाता है।

➠कंपनी बाजार में पूंजी की व्यवस्था करने के लिए आती है।

➠निवेशक बाजार में निवेश करने के लिए आते है।

बाजार में कंपनी के द्वारा पूंजी की व्यवस्था दो प्रकार से की जा सकती है। जैसे-

1. ऋण लेकर

2. हिस्सेदारी को बेच कर

निवेशक बाजार में दो प्रकार से धन को निवेश कर सकता है। जैसे-

1. ऋण देकर

2. हिस्सेदारी को खरीद कर


1. ऋण-

➠यदि कोई निवेशक बाजार में धन को ऋण पर देता है को उसके बदले निवेशक को ब्याज प्राप्त होता है।

➠बाजार में निवेशक के द्वारा धन को ऋण के माध्यम से निवेश करने पर जोखिम कम होता है।


2. हिस्सेदारी-

➠यदि कोई निवेशक बाजार में धन को किसी कंपनी में हिस्सेदारी के रूप में निवेश करता है तब उस निवेशक को उस कंपनी में निवेश के बदले लाभ व हानी में हिस्सा मिलता है।

➠बाजार में निवेशक के द्वारा धन को हिस्सेदारी के माध्यम से निवेश करने पर जोखिम अधिक होता है।


लिमिटेड कंपनी (Limited Company)-

➠वह कंपनी जिसमें ऋणदाता के अधिकार सीमित होते है। अर्थात् ऋणदाता के द्वारा ऋण की वसूली कंपनी की संपत्ति से की जा सकती है परन्तु मालिक की संपत्ति से नहीं की जा सकती है। ऐसी कंपनियों को लिमिटेड कंपनी कहा जाता है।

लिमिटेड कंपनी तीन प्रकार की होती है। जैसे-

1. एक व्यक्ति कंपनी (One Person Company)

2. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी (Private Limited Company)

3. पब्लिक लिमिटेड कंपनी (Public Limited Company)


1. एक व्यक्ति कंपनी (One Person Company)-

➠One Person Company में कंपनी का सिर्फ एक ही मालिक होता है।


2. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी (Private Limited Company)-

➠प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों में अधिकतम 200 हिस्सेदार हो  सकते है। परन्तु प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के शेयर बाजार में नहीं बेचे जा सकते है।


3. पब्लिक लिमिटेड कंपनी (Public Limited Company)-

➠पब्लिक लिमिटेड कंपनियों के शेयर शेयर बाजार में बेचे जा सकते है।

➠पब्लिक लिमिटेड कंपनी में कितने भी हिस्सेदार हो सकते है।


प्रतिभूति (Security)-

➠वित्त बाजार में जब भी पैसों का लेनदेन किया जाता है तब प्रतिभूति को खरीदा व बेचा जाता है।

➠प्रतिभूति दो प्रकार की होती है। जैसे-

1. हिस्सेदारी (Partnership)- शेयर (Share) (हिस्सेदारी शेयर के माध्यम से बेची व खरीदी जा सकती है।)

2. ऋण (Debt)- बाॅण्ड (Bond) (ऋण बाॅण्ड के माध्यम लिया व दिया जा सकता  है।)


1. शेयर (Share)-

➠शेयर दो प्रकार के होते है। जैसे-

(A) अधिमाान शेयर (Preference Share)

(B) इक्विटि शेयर (Equity Share)


1. शेयर (Share)-

➠शेयर के तहत निवेशक के द्वारा कंपनी में हिस्सेदारी खरीदी जाती है। अर्थात् यदि निवेशक के द्वारा कंपनी के शेयर खरीदे जाते है तब कंपनी को लाभ होता है तो निवेशक को भी लाभ में हिस्सा मिलता है। और यदि कंपनी को नुकसान होता है तो निवेशक या शेयर धारक को भी नुकसान होता है।

➠शेयर में निवेश करने पर निवेशक को अधिक जोखिम होता है।

➠शेयर दो प्रकार के होते है। जैसे-

(A) अधिमान शेयर (Preference Share)

(B) इक्विटि शेयर (Equity Share)


(A) अधिमान शेयर (Preference Share)-

➠अधिमान शेयर धारकों लाभ के वितरण में वरियता दी जाती है।

➠यदि कंपनी ने लाभ कम भी कमाया है तब भी अधिमान शेयर धारकों लाभांश () वितरित किया जाता है।

➠अधिमान शेयर धारकों के पास निर्णन लेने की शक्ति नहीं होती है।


(B) इक्विटि शेयर (Equity Share)-

➠इक्विटि शेयर धारक को लाभ के वितरण में वरियता नहीं दी जाती है।

➠इक्विटि शेयर धारक के पास निर्णन लेने की शक्ति होती है।

➠इक्विटि शेयर धारक ही कंपनी के वास्तविक मालिक होते है।


2. बाॅण्ड (Bond)-

➠बाॅण्ड एक ऋण प्रतिभूति होती है। अर्थात् निवेशक के द्वारा अपना धन ऋण के माध्यम से भी दिया जा सकता है। जिसके बदले निवेशक को ब्याज दिया जायेगा चाहे कंपनी ने लाभ कमाया हो या नहीं कमाया हो।

➠निवेशक के द्वारा धन ऋण के माध्यम से निवेश करने पर जोखिम कह होता है।

➠निवेशक के द्वारा ऋण सरकार को भी दिया जा सकता है तथा निजी क्षेत्र को भी दिया जा सकता है।

➠निवेशक के द्वारा ऋण अल्पकाल के लिए भी दिया जा सकता है तथा दीर्घकाल के लिए भी दिया जा सकता है।

➠अल्पकाल के ऋण की अवधि 1 वर्ष से कम होती है।

➠दीर्घकाल के ऋण की अवधि 1 वर्ष से अधिक होती है।

➠बाॅण्ड दो प्रकार के होते है। जैसे-

(A) सरकार क्षेत्र के बाॅण्ड (Government Sector Bond)

(B) निजी क्षेत्र के बाॅण्ड (Private Sector Bond)


(A) सरकारी क्षेत्र के बाॅण्ड (Government Sector Bond)-

➠सरकारी क्षेत्र में दो प्रकार के बाॅण्ड होते है। जैसे-

(अ) अल्पकालिक (Short Term)

(ब) दीर्घकालिक (Long Term)


(अ) सरकार के अल्पकालिक बाॅण्ड (Government Short Term Bond)-

➠सरकार के द्वारा जारी किये गये अल्पकालिक बाॅण्ड को ट्रेजरी बिल (Treasury Bill) कहा जाता है।

➠ट्रेजरी बिल चार प्रकार के होते है। जैसे-

(I) T-14 (T-14, 14 दिन का ट्रेजरी बिल होता है।)

(II) T-91 (T-91, 91 दिन का ट्रेजरी बिल होता है।)

(III) T-182 (T-182, 182 दिन का ट्रेजरी बिल होता है।)

(IV) T-364 (T-364, 364 दिन का ट्रेजरी बिल होता है।)

➠जितने समय के लिए ऋण लिया जाता है उस समय सीमा को परिपक्वता अवधि (Maturity Period) कहा जाता है।

➠बाॅण्ड को परिपक्वता अवधि (Maturity Period) से पहले खरीदा या बेचा जा सकता है।

➠ट्रेजरी बिल पर कमाये गये लाभ को यील्ड (Yield) कहा जाता है।

➠ट्रेजरी बिल को डिस्काउंट पर जारी किया जाता है। जिससे डिस्काउंट को कम या ज्यादा किया जा सकता है।

➠ट्रेजरी बिल केवल केन्द्र सरकार के द्वारा ही जारी किया जा सकता है।

➠ट्रेजरी बिल राज्य सरकार के द्वारा जारी नहीं किया जा सकता है।


(ब) सरकार के दीर्घकालिक बाॅण्ड (Government Long Term Bond)-

➠सरकार के द्वारा जारी किये गये दीर्घकालिक बाॅण्ड को G-Sec कहा जाता है।

➠सरकार के द्वारा जारी किये गये दीर्घकालिक बाॅण्ड को गिल्ट एज्ड सिक्योरिटीज (Gilt Edge Securities) भी कहा जाता है। क्योंकि सरकार के दीर्घकालिक बाॅण्ड सबसे अधिक विश्वसनिय होते है।


Junk Bond-

➠वे बाॅण्ड जिनकी विश्वसनियता सबसे कम होती है। Junk Bond कहलाते है।

➠विश्वसनियता निर्धारित करने के लिए क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों (Credit Rating Agency) के द्वारा क्रेडिट रेटिंग जारी की जाती है। जैसे-

(I) Standard and Poor (S&P) Credit Rating Agency

(II) Moody's Credit Rating

(III) Fitch Rating


(B) निजी क्षेत्र के बाॅण्ड (Private Sector Bond)-

➠निजी क्षेत्र में दो प्रकार के बाॅण्ड होते है। जैसे-

(अ) अल्पकालिक (Short Term)

(ब) दीर्घकालिक (Long Term)



(अ) निजी क्षेत्र के अल्पकालिक बाॅण्ड (Private Sector Short Term Bond)-

➠निजी क्षेत्र के अल्पकालिक बाॅण्ड तीन प्रकार के होते है। जैसे-

(I) वाणिज्यिक पत्र (Commercial Paper)

(II) जमा प्रमाण पत्र (Certificate of Deposit)

(III) वाणिज्यिक बिल (Commercial Bill)


(I) वाणिज्यिक पत्र (Commercial Paper)-

➠वाणिज्यिक पत्र बाॅण्ड सामान्यतः नई कंपनी के द्वारा जारी किया जाता है।

➠नई कंपनी के द्वारा वाणिज्यिक पत्र बाॅण्ड जारी करने का मुख्य उद्देश्य कंपनी के शुरुआती खर्चों को पूरा करना होता है।

➠वाणिज्यिक पत्र बाॅण्ड को ब्रिज लोन (Bridge Loan) भी कहा जाता है।


(II) जमा प्रमाण पत्र (Certificate of Deposit)-

➠काॅर्पोरेट (Corporate) से बैंक के द्वारा अल्पकालिक ऋण लिया जाता है। जिसके बदले जमा प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।


(III) वाणिज्यिक बिल (Commercial Bill)-

➠यदि किसी कंपनी के द्वारा वस्तु की खरीद की जाती है तब उस वस्तु के भुगतान के लिए वाणिज्यिक बिल जारी किया जाता है।


(ब) निजी क्षेत्र के दीर्घकालिक बाॅण्ड (Private Sector Long Term Bond)-

➠निजी क्षेत्र के द्वारा जारी किया गया दीर्घकालिक बाॅण्ड डिबेंचर (Debenture) कहलाता है।

➠डिबेंचर (Debenture) दो प्रकार का होता है। जैसे-

(I) परिवर्तनीय डिबेंचर (Convertible Debenture)

(II) अपरिवर्तनीय डिबेंचर (Non Convertible Debenture)


(I) परिवर्तनीय डिबेंचर (Convertible Debenture)-

➠परिवर्तनीय डिबेंचर वह बाॅण्ड होते है जिनको एक निश्चित समय के बाद शेयर (Equity) में परिवर्तित किया जा सकता है।

➠भारत में परिवर्तित डिबेंचर को प्रचारित धीरुभाई अंबानी के द्वारा किया गया था।


(II) अपरिवर्तनीय डिबेंचर (Non Convertible Debenture)-

➠जब बाॅण्ड (डिबेंचर) को शेयर (Equity) में परिवर्तित नहीं किया जा सके उस बाॅण्ड या डिबेंचर को अपरिवर्तनीय डिबेंचर कहा जाता है।


कुछ अन्य  बाॅण्ड-

1. जीरो कूपन बाॅण्ड (Zero Coupon Bond)

2. मसाला बाॅण्ड (Masala Bond)

3. हुण्डी (Hundi)


1. जीरो कूपन बाॅण्ड (Zero Coupon Bond)-

➠वह बाॅण्ड जिसे डिस्काउंट पर जारी किया जाता है जीरो कूपन बाॅण्ड कहलाता है।

➠जीरो कूपन बाॅण्ड की ब्याज दर को कूपन दर (Coupon Rate) कहा जाता है।


2. मसाला बाॅण्ड (Masala Bond)-

➠मसाला बाॅण्ड विदेशों में जारी किये जाते है।

➠विदेशों में मसाला बाॅण्ड की कीमते रुपये में रखी जाती है।


3. हुण्डी (Hundi)-

➠भारत में हुण्डी का प्रयोग स्वतंत्रता से पहले किया जाता था।

➠भारत में सर्राफ नामक व्यापारी के द्वारा हुण्डी को जारी किया जाता था।

➠हुण्डी का प्रयोग धन को एक जगह से दुसरी जगह भेजने के लिए किया जाता था।


पूंजी बाजार (Capital Market)-

पूंजी बाजार दो प्रकार का होता है। जैसे-

1. प्राथमिक बाजार (Primary Market)

2. द्वितीयक बाजार (Secondary Market)


1. प्राथमिक बाजार (Primary Market)-

➠जब किसी कंपनी के द्वारा पहली बार प्रतिभूतियां जारी की जाती है तब उन प्रतिभूतियों को जारी करने के लिए प्राथमिक बाजार का प्रयोग किया जाता है। अर्थात् पहली बार किसी कंपनी के द्वारा प्रतिभूतियां प्राथमिक बाजार में जारी की जाती है।

➠प्राथमिक बाजार का कोई निश्चित नाम या स्थान नहीं होता है।

➠किसी भी कंपनी के द्वारा पहली बार प्रतिभूतियां जारी करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रियाओं का प्रयोग किया जाता है जैसे-

1. इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (Initial Public Offering- IPO)

2. फॉलो ऑन पब्लिक ऑफरिंग (Follow on Public Offering- FPO)

3. राइट्स इश्यू (Right Issue)


1. इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (Initial Public Offering- IPO)-

➠आईपीओ का अर्थ है प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम या प्रथम सार्वजनिक प्रस्ताव अथवा इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग

➠जब भी किसी कंपनी के द्वारा अपने शेयर पहली बार शेयर बाजार में जारी किये जाते है तब वह कंपनी आईपीओ (IPO) के माध्यम से अपने शेयर शेयर बाजार में जारी करती है।

➠किसी भी कंपनी के द्वारा अपना IPO लाने के लिए SEBI  की अनुमति की आवश्यकता होती है।


2. फॉलो ऑन पब्लिक ऑफरिंग (Follow on Public Offering- FPO)-

➠IPO जारी करने के कुछ समय बाद यदि कोई कंपनी अपने कुछ अतिरिक्त शेयर शेयर बाजार में जारी करना चाहती है तब वह कंपनी एफपीओ (FPO) के माध्यम से अपने कुछ अतिरिक्त शेयर शेयर बाजार में जारी कर सकती है।


3. राइट्स इश्यू (Right Issue)-

➠राइट्स इश्यू (Right Issue) सामान्यतः पुरानी कंपनियों के द्वारा ही जारी किया जाता है।

➠IPO तथा FPO के बाद भी यदि कोई कंपनी अपने कुछ अतिरिक्त शेयर शेयर बाजार में जारी करना चाहती है तब वह कंपनी राइट्स इश्यू (Right Issue) के माध्यम से अपने कुछ अतिरिक्त शेयर शेयर बाजार में जारी कर सकती है।

➠राइट्स इश्यू (Right Issue) के माध्यम से जारी किये गये शेयर उन्ही शेयर धारकों को दिये जायेगे जिन शेयर धारकों ने पहले से उसी कंपनी के शेयर खरीद रखे है।


शेयर कैपिटल के प्रकार (Type of Share Capital)-

1. अधिकृत पूँजी (Authorized Capital- ऑथराइज्ड कैपिटल)

2. इजारी पूँजी (Issued Capital- इस्सूड कैपिटल)

3. अभिदत्त पूंजी (Subscribed Capital- सब्सक्राइब कैपिटल)

4. प्रदत्त पूंजी (Paid Up Capital- पैड अप कैपिटल)


1. अधिकृत पूँजी (Authorized Capital- ऑथराइज्ड कैपिटल)-

➠वह पूंजी जितने के शेयर कंपनी को जारी करने की अनुमती दी जाती है अधिकृत पूँजी (Authorized Capital- ऑथराइज्ड कैपिटल) कहलाता है। जैसे- कंपनी को अनुमति 100 करोड़ की दी जाती है।


2. जारी पूँजी (Issued Capital- इस्सूड कैपिटल)-

➠वह पूंजी जितने के शेयर कंपनी के द्वारा जारी किये गये है जारी पूँजी (Issued Capital- इस्सूड कैपिटल) कहलाता है। जैसे- कंपनी ने 80 करोड़ के शेयर जारी किये है।


3. अभिदत्त पूंजी (Subscribed Capital- सब्सक्राइब कैपिटल)-

➠वह पूंजी जितने के लिए सामान्य जनता के द्वारा आवेदन किया जाता है अभिदत्त पूंजी (Subscribed Capital- सब्सक्राइब कैपिटल) कहलाता है।


4. प्रदत्त पूंजी (Paid Up Capital- पैड अप कैपिटल)-

➠वह पूंजी जिसका अंतिम रूप से भुगतान कंपनी को किया गया है पेड अप कैपिटल कहलाता है।


हामीदारी (Underwriting- अंडरराइटिंग)-

➠जब भी कोई कंपनी अपनी IPO जारी करती है तब वह अपने IPO को किसी अन्य वित्तीय संस्थान के द्वारा हामीदारी (Underwriting- अंडरराइटिंग) करवाती है।

➠हामीदारी (Underwriting- अंडरराइटिंग) के तहत वह वित्तीय संस्थान निवेशकों को आश्वासन देता है की कंपनी का प्रोजेक्ट या बिजनेस माडल व्यवहारिक है। और उसके सारे शेयर बिक जायेंगे और यदि उस कंपनी के सारे शेयर नहीं बिक पाते है तब वो संस्थान खुद उन बचे हुए शेयरों को खरीद लेगा।

➠हामीदारी (Underwriting- अंडरराइटिंग) को अधिगोपन भी कहा जाता है।


बुक बिल्डिंग (Book Building)-

➠किसी कंपनी के द्वारा IPO जारी करने से पहले उस IPO की कीमत निर्धारित करने के लिए बाजार में एक सर्वेक्षण किया जाता है। उस सर्वेक्षण को ही बुक बिल्डिंग कहा जाता है।

➠बुक बिल्डिंग के तहत ही IPO का प्राइस बैंड उबलब्ध करवाया जाता है।

➠अंडरराइटर के द्वार बुक बिल्डिंग की प्रक्रिया को पुरा किया जाता है।


प्राथमिक बाजार के निवेशक-

1. स्टैग निवेशक (Stag Investor)


1. स्टैग निवेशक (Stag Investor)-

➠स्टैग निवेशक (Stag Investor) प्राथमिक बाजार के निवेशक है।

➠स्टैग निवेशक (Stag Investor) IPO में निवेश करते है। तथा लिस्टिंग गेन (Listing Gain) कमाना चाहते है।


2. द्वितीयक बाजार (Secondary Market)-

वर्तमान में भारत में दो प्रमुख द्वितीयक बाजार है जैसे-

(I) मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange- BSE)

(II) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange- NSE)


(I) मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange- BSE)-

➠मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange- BSE) की स्थापना 1875 में की गई थी।

➠मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange- BSE) का मुख्यालय मुंबई में स्थित है।

➠मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange- BSE) एशिया का सबसे पुराना Stock Exchange है।

➠मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange- BSE) एशिया का सबसे पहला Stock Exchange है।

➠मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange- BSE) भारत का भी सबसे पुराना Stock Exchange है।

➠मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange- BSE) भारत का भी सबसे पहला Stock Exchange है।

➠वर्तमान में ट्रनओवर तथा बाजार पूंजी के आधार पर मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange- BSE) भारत का दुसरा सबसे बड़ा Stock Exchange है।

➠बाजार पूंजी = शेयर की संख्या × शेयर की कीमत

(Market Capital = No. of Shares × Price of Share)

➠लेनदेन की संख्या के आधार पर मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange- BSE) भारत का भारत का सबसे बड़ा Stock Exchange है क्योंकि व्यक्तिगत निवेशक Bombay Stock Exchange में अधिक निवेश करते है।


मुंबई स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange- BSE) के सूचकांक (Index)-

1. सेंसेक्स (SENSEX)

2. बीएसई-100 (BSE 100)

3. बीएसई-200 (BSE 200)

4. BANKEX


1. सेंसेक्स (SENSEX)-

➠सेंसेक्स सूचकांक (SENSEX Index) की शुरूआत सन् 1986 में की गई थी।

➠Bombay Stock Exchange का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स (SENSEX) है।

➠सेंसेक्स सूचकांक (SENSEX Index) संवेदी सूचकांक (Sensitive Index) है।

➠सेंसेक्स सूचकांक (SENSEX Index) Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध 30 बड़ी कंपनियों के शेयर की कीमतों के औसत उतार चढ़ाव को दर्शाता है।

➠सेंसेक्स सूचकांक (SENSEX Index) में सूचीबद्ध 30 बड़ी कंपनियों का निर्धारण बाजार पूंजी के आधार पर किया जाता है।

➠सेंसेक्स सूचकांक (SENSEX Index) का आधार वर्ष 1978-79 है।


2. बीएसई-100 (BSE 100)-

➠BSE 100 Index Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध 100 बड़ी कंपनियों के शेयर की कीमतों के औसत उतार चढ़ाव को दर्शाता है।


3. बीएसई-200 (BSE 200)-

➠BSE 200 Index Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध 200 बड़ी कंपनियों के शेयर की कीमतों के औसत उतार चढ़ाव को दर्शाता है।


4. BANKEX-

➠BANKEX Index Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध 12 बड़े बैंकों के शेयर की कीमतों के औसत उतार चढ़ाव को दर्शाता है।


(II) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange- NSE)-

➠नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange- NSE) की स्थापना सन् 1992 में की गई थी।

➠नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange- NSE) की स्थापना फेरवानी समिति की सिफारिश पर की गई थी।

➠नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange- NSE) मुख्याल मुंबई में स्थित है।

➠नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange- NSE) ट्रनओवर तथा बाजार बूंजी के आधार पर भारत का सबसे बड़ा Stock है। अर्थात् व्यापार की मात्रा के आधार पर National Stock Exchange भारत का सबसे बड़ा Stock Exchange है।

➠नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange- NSE) स्थापना के बाद से पुरी तरह से कम्प्यूटरिकृत Stock Exchange है।

➠नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange- NSE) में संस्थागत निवेशक अधिक निवेश करते है। अर्थात् National Stock Exchange संस्थागत निवेशकों के बीच अधिक लोकप्रिय है।


नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange- NSE) के सूचकांक (Index)-

1. निफ्टी (NIFTY)

2. जूनियर निफ्टी (Junior NIFTY) या (NIFTY NEXT FIFTY)

3. बैंक निफ्टी (Bank NIFTY)


1. निफ्टी (NIFTY)-

➠निफ्टी (NIFTY) Index National Stock Exchange का प्रमुख सूचकांक है।

➠निफ्टी (NIFTY) Index National Stock Exchange में सूचीबद्ध 50 (1 से 50 तक) बड़ी कंपनियों के शेयर की कीमतों के औसत उतार चढ़ाव को दर्शाता है।


2. जूनियर निफ्टी (Junior NIFTY) या (NIFTY NEXT FIFTY)-

➠जूनियर निफ्टी (Junior NIFTY) या (NIFTY NEXT FIFTY) National Stock Exchange का दुसरा सूचकांक है।

➠जूनियर निफ्टी (Junior NIFTY) या (NIFTY NEXT FIFTY) Index National Stock Exchange में सूचीबद्ध 50 (51 से 100 तक) बड़ी कंपनियों के शेयर की कीमतों के औसत उतार चढ़ाव को दर्शाता है।


3. बैंक निफ्टी (Bank NIFTY)-

➠बैंक निफ्टी (Bank NIFTY) Index National Stock Exchange में सूचीबद्ध 12 बड़े बैंकों के शेयर की कीमतों में औसत उतार चढ़ाव को दर्शाता है।


भारत में अन्य द्वितीयक बाजार-

➠भारत में क्षेत्रिय Stock Exchange भी है जैसे-

1. कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज (Calcutta Stock Exchange)

2. जयपुर स्टॉक एक्सचेंज (Jaipur Stock Exchange)

➠परन्तु वर्तमान में ये Stock Exchange भारत में अधिक प्रचलित नहीं है।


न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (New York Stock Exchange- NYSE)-

➠न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (New York Stock Exchange- NYSE) विश्व का सबसे बड़ा Stock Exchange है।

➠न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (New York Stock Exchange- NYSE) का मुख्य सूचकांक डाऊ जोंस (Dow Jones) है।

न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (New York Stock Exchange- NYSE) के पास National Stock Exchange के 20% शेयर है।


नॉस्डेक (NASDAQ) Stock Exchange-

➠NASDAQ का पुरा नाम- National Association of Securities Dealers Automated Quotations

➠NASDAQ का पुरा नाम- नेशनल एसोसिएशन ऑफ सिक्योरिटीज डीलर्स ऑटोमेटेड कोटेशन

➠NASDAQ Stock Exchange न्यूयॉर्क में स्थित अन्य Stock Exchange है।

➠NASDAQ Stock Exchange में अधिकतर IT कंपनिया सूचीबद्ध है।

➠इंफोसिस भारत की पहली कंपनी या भारत की पहली IT कंपनी थी जो NASDAQ Stock Exchange में सूचीबद्ध थी।


AMSTERDAM Stock Exchange-

➠AMSTERDAM Stock Exchange की स्थापना 1602 ई. में की गई थी।

➠AMSTERDAM Stock Exchange विश्व का सबसे पहला Stock Exchange है।

➠AMSTERDAM Stock Exchange विश्व का सबसे पुराना Stock Exchange है।

➠AMSTERDAM Stock Exchange नीदरलैंड्स (Netherlands) में खोला गया था।


द्वितीयक बाजार के निवेशक-

➠शेयर बाजार में दो प्रकार के निवेशक होते है जैसे-

1. वास्तविक निवेशक

2. सट्टेबाज निवेशक


1. वास्तविक निवेशक-

➠वास्तविक निवेशकों के द्वारा लम्बे समय के लिए निवेश किया जाता है। तथा वास्तविक निवेशक कंपनी में लाभांस प्राप्त करते है।


2. सट्टेबाज निवेशक-

➠सट्टेबाज निवेशक शेयर कीमतों में उतार चढ़ाव ने धन कमाना चाहते है।

➠सट्टेबाज निवेशक दो प्रकार के होते है जैसे-

(I) BULL (तेजड़िये)

(II) BEAR (मंदड़िये)


(I) BULL (तेजड़िये)-

➠BULL (तेजड़िये) निवेशक शेयर बाजार को उपर की ओर ले जाना चाहते है।


(II) BEAR (मंदड़िये)-

➠BEAR (मंदड़िये) निवेशक शेयर बाजार को नीचे की ओर ले जाना चाहते है।


Trading (ट्रेडिंग)-

➠शेयर बाजार में ट्रेडिंग दो प्रकार से की जाती है जैसे-

1. SPOT Trading

2. Futures Trading


1. SPOT Trading-

➠SPOT Trading में जिस समय सोदा किया जाता है उसी समय उस सोदे को पुरा भी कर लिया जाता है।

➠SPOT Trading में T+2 Days का नियम काम करता है।


2. Futures Trading-

➠Futures Trading में भविष्य के सोदे होते है।

➠Futures Trading में सोदे को एक निश्चित कीमत तथा निश्चित समय पर पुरा किया जाता है।

➠Futures Trading में Trading करने के लिए Future and Option का विकल्प दिया जाता है।


Future and Option-

➠Future and Option विकल्प के तहत खरीददार को एक विकल्प दिया जाता है की वह अपने सोदे को रद्द भी कर सकता है। परन्तु सोदे को रद्द करने पर सोदे के लिए दी गई टोकन राशि को वापस नहीं लोटाया जाता है।


शॉर्ट सेलिंग (Short Selling)-

➠शॉर्ट सेलिंग (Short Selling) करने वाले व्यक्ति के पास प्रारम्भ में कोई शेयर नहीं होते है।

➠शॉर्ट सेलिंग (Short Selling) करने वाले व्यक्ति ब्रोकर से शेयर उधार लेते है। तथा उधार लिए गये शेयर को शेयर बाजार में बेच देते है। जिससे शेयर बाजार गिरने लगता है। अतः शेयर बाजार गिरने पर पुनः शेयर खरीद लेते है तथा ब्रोकर से उधार लिये गये शेयर के रूप में वापस लोटा देते है।


आर्बिट्रेज (Arbitrage)

➠आर्बिट्रेज (Arbitrage) प्रक्रिया के तहत एक ही कंपनी के शेयर अलग अलग शेयर बाजार में खरीदे या बेचे जा सकते है।

➠जिस शेयर बाजार में कीमते कम है उस शेयर बाजार से शेयर खरीद लिये जाते है तथा जिस शेयर बाजार में कीमते अधिक होती है उस शेयर बाजार में शेयर बेच दिये जाते है इसी प्रक्रिया को  आर्बिट्रेज (Arbitrage) कहा जाता है।


म्यूचुअल फंड (Mutual Fund)-

➠म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) छोटे निवेशकों तथा शेयर बाजार के बीच मध्यस्ता का कार्य करता है।

➠म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) बाजार के विशेसज्ञों के द्वारा संचालित किया जाता है।

➠म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेशकों के द्वारा निवेश किये गया धन विशेसज्ञ अपनी विशेसज्ञता के आधार पर शेयर बाजार में निवेश करते है। तथा लाभ कमाकर निवेशक को दिया जाता है।

➠म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में विशेसज्ञों के द्वारा निवेशकों को लाभ कमाने के बदल निवेशक से फीस वसूल की जाती है।

➠म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेशक को Unit आवंटित की जाती है।

➠म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के द्वारा Short Selling और Arbitrage नहीं किया जा सकता है।


 यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (Unit Trust of India- UTI)-

➠भारत का सबसे पहला Mutual Fund  यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (UTI) था।

➠ यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (UTI) की स्थापना सन् 1964 में की गई थी।

➠ यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (UTI) एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी थी।

➠बाद में  यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (UTI) को AXIS Bank में परिवर्ती कर दिया गया था।


Venture Capital Fund (जोखिम पूंजी निधि)-

➠जोखिम पूंजी निधि (Venture Capital Fund) संस्थागत निवेशक है जो की जोखिम भरे क्षेत्रों में निवेश करते है। जैसे- स्टार्टअप (Startup)

➠जोखिम पूंजी निधि (Venture Capital Fund) के पास विशेषज्ञों की पुरी टीम होती है।

➠जोखिम पूंजी निधि (Venture Capital Fund) के विशेषज्ञों के द्वारा लाभ की रणनीति सुनिश्चित करने के बाद ही निवेश करते है।

➠जोखिम पूंजी निधि (Venture Capital Fund) के लिए सेबी (SEBI) के द्वारा नियम सरल रखे गये है। जैसे-

➠जोखिम पूंजी निधि (Venture Capital Fund) के द्वारा Short Selling और Arbitrage तो किया जा सकता है।


हेज फण्ड (Hedge Fund)-

➠हेज फण्ड व्यक्तिगत प्रकार के निवेशक होते है।

➠हेज फण्ड के पास धन अत्यधिक होता है।

➠हेज फण्ड के द्वारा अत्यधिक जोखिम भरे क्षेत्रों में निवेश किया जाता है।

➠हेज फण्ड के लिए सेबी (SEBI) के द्वारा नियम सरल रखे गये है। जैसे-

➠हेज फण्ड के द्वारा Short Selling और Arbitrage कर सकते है। परन्तु Mutual Fund ऐसा नहीं कर सकता है।


एंजेल निवेशक (Angel Investors)-

➠एंजेल निवेशक किसी व्यक्ति के विचार या प्रतिभा पर विश्वास करके निवेश करते है।

➠एंजेल निवेशक के द्वारा व्यक्ति की पृष्ठभूमि और वित्तीय स्थिति को अधिक महत्वता नहीं दी जाती है। जैसे- Steve Jobs (स्टीव जॉब्स) के लिए माइक मार्कुला (Mike Markkula) के द्वारा पैसा निवेश किया गया था।

➠भारत में रत्न टाटा, नारायण मूर्ति आदि के द्वारा एंजेल निवेश किया जाता है।


पी-नोट्स (P-Notes/ Participatory Notes)-

➠पी-नोट्स विदेशी संस्थागत निवेशकों के द्वारा जारी किये जाते है।

➠यदि कोई विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना चाहता है तो वह पी-नोट्स खरीद सकता है।

➠पी-नोट्स के विरूद्ध संस्थागत निवेशक क द्वारा भारतीय शेयर बाजार में शेयर खरीदा जाता है।

➠पी-नोट्स का मूल्य शेयर से जुड़ा हुआ होता है।

➠कुछ समय पहले पी-नोट्स चर्चा का विषय बना हुआ था। क्योंकि ऐसा माना जाता है की आपराधिक तथा काला धन पी-नोट्स के माध्यम से भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया जा रहा है। इसके बाद SEBI के द्वारा पी-नोट्स के नियमों को कठोर कर दिया गया था।


डिमैटेरियलाइजेशन (DEMATERIALIZATION)-

➠पहले सभी प्रकार की प्रतिभूतियां भौतिक रूप में जारी की जाती थी। परन्तु वर्तमान में ये प्रतिभूतियां इलेक्ट्रोनिक या डिजिटल रूप में जारी की जाती है।

➠प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रोनिक या डिजिटल रूप में करने की प्रक्रिया को ही डिमैटेरियलाइजेशन (DEMATERIALIZATION) कहा जाता है।


डीमैट अकाउंट (Demat Account)-

➠शेयर बाजार में लेनदेन के लिए डीमैट अकाउंट (Demat Account) खुलवाना पड़ता है।

➠डीमैट अकाउंट (Demat Account) डिपॉझिटरी संस्था में खुलवा जाता है।

➠भारत में दो प्रमुख डिपॉझिटरी संस्थान है जैसे-

1. NSDL

2. CDSL


1. NSDL-

➠NSDL का पुरा नाम- National Security Depository Limited

NSDL का पुरा नाम- राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड

➠NSDL की स्थापना सन् 1996 में की गई थी।

➠NSDL की स्थापना NSE के द्वारा की गई थी।


2. CDSL-

➠CDSL का पुरा नाम- Central Depository Services Limited

➠CDSLका पुरा नाम- केन्द्रीय निक्षेपागार सेवा लिमिटेड

➠CDSL की स्थापना सन् 1998 में की गई थी।

➠CDSL की स्थापना BSE के द्वारा की गई थी।


SEBI-

➠SEBI का पुरा नाम- Securities and Exchange Board of India

➠SEBI का पुरा नाम- भारतीय प्रतिभूति औक विनिमय बोर्ड

➠SEBI की स्थापना सन् 1988 को की गई थी।

➠प्रारम्भ में SEBI एक कार्यकारी संस्था थी।

➠सन् 1992 में SEBI अधिनियम पारित किया गया था। जिसके बाद SEBI को वैधानिक संस्था का दर्जा दिया गया था।

➠वर्तमान में SEBI वैधानिक संस्थान है।


SEBI के कार्य-

➠SEBI पूंजी बाजार या वित्त बाजार की एक नियामक संस्था है।

➠शेयर बाजार में कार्य करने वाली सभी संस्थाओं का पंजीकरण SEBI के द्वारा किया जाता है। जैसे- Stock Exchange, Broker, डिपॉझिटरी संस्था, Mutual Fund, Credit rating agency (क्रेडिट रेटिंग एजेंसी) आदि।

➠SEBI का कार्य भारत में पूंजी बाजार को विकसित करना है।

➠SEBI का कार्य छोटे निवेशकों के हितो की रक्षा करना है।

➠SEBI का कार्य इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider trading) को रोकना है।

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