विश्व व्यापार संगठन

 विश्व व्यापार संगठन

(World Trade Organization- WTO)


विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization- WTO)-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) स्थापना 1 जनवरी 1995 ई. में की गई थी।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) का मुख्यालय जिनेवा में स्थित है।

➠जिनेवा स्विट्जरलैंड में स्थित है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) में यूरोपीय संघ सहित कुल 164 सदस्य देश एवं 23 पर्यवेक्षक सरकारें शामिल है। पर्यवेक्षक सरकारें जैसे- ईरान, इराक, भूटान, लीबिया आदि।


पृष्ठभूमी-

➠अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन (International Trade Organization- ITO) को स्थापित करने में असफल होने के बाद 1947 ई. में प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (General Agreement on Tariffa and Trade- GATT) किया गया था।

➠प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (GATT) पर हस्ताक्षर 1947 ई. में किये गये थे लेकिन प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (GATT) 1948 ई. में लागू किया गया था।

➠प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (GATT) का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना है। परन्तु प्रशुल एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (GATT) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने में अधिक सफल नहीं हो सका था।

➠1986 ई. के उरुग्वे (Uruguay) सम्मेलन में प्रशुल एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (GATT) को प्रतिस्थापित करने की चर्चा शुरू की गई थी।

➠1994 ई. में मारकेश संधि की गई थी।

➠मारकेश संधि 1994 ई. के तहत 1 जनवरी 1995 ई. को विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना की गई थी।


प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (GATT) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अंतर-

1. प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (GATT)

2. विश्व व्यापार संगठन (WTO)


1. प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (GATT)-

➠प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (GATT) एक सामान्य समझौता है।

➠प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (GATT) केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित है।

➠प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौते (GATT) के निर्णय सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी नहीं है।


2. विश्व व्यापार संगठन (WTO)-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) एक संस्थागत ढांचा है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) में वस्तु, सेवा, निवेश तथा बौद्धिक सम्पदा शामिल है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के निर्णय सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी है।


विश्व व्यापार संगठन (WTO) के कार्य-

1. विश्व व्यापार संगठन के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दिया जाता है।

2. विश्व व्यापार संगठन के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में प्रशुल्क बाधा (Tariff Barriers) तथा गैर प्रशुल्क बाधाओं (Non Tariff Barriers) को दुर किया जाता है।

3. विश्व व्यापार सगंठन (WTO) के द्वारा अपने सदस्य देशों के बीच समझौते करवाये जाता है।

4. विश्व व्यापार संगठन (WTO) के द्वारा अपने सदस्य देशों के बीच समझौतों को लागू करवाया जाता है।


प्रशुल्क बाधा (Tariff Barriers)-

➠आयात निर्यात में लगाये गये कर को प्रशुल्क बाधा कहा जाता है।


गैर प्रशुल्क बाधा (Non Tariff Barriers)-

➠गैर प्रशुल्क बाधा में गुणवत्ता के नियम, लाइसेंस की आवश्यकता, कोटा, कस्टम के नियम, रूल्स ऑफ ओरिजिन (Rules of Origin), नकारात्मक सूची (Negative List) आदि शामिल है।


विश्व व्यापार संगठन (WTO) की संरचना-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) की संरचना त्रिस्तरी संरचना है। जैसे-

1. विश्व व्यापार संगठन का मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (Ministerial Conference of World Trade Organization)

2. विश्व व्यापार संगठन की सामान्य परिषद् (General Council of World Trade Organization)

3. विश्व व्यापार संगठन का महानिदेशक (Director General of World Trade Organization)


1. विश्व व्यापार संगठन का मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (Ministerial Conference of World Trade Organization)

➠मंत्रिस्तरीय सम्मेलन विश्व व्यापार संगठन (WTO) में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है।

➠मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के द्वारा विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सम्मझौते किये जाते  है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देश मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भाग लेते है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के द्वारा अब तक कुल 12 मंत्रिस्तरीय सम्मेलन आयोजित करवाये जा चुके है। जिनमें से महत्वपूर्ण मंत्रिस्तरीय सम्मेलन निम्नलिखित है।-

(I) सिगांपुर सम्मेलन- 1996

(II) दोहा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन- 2001

(III) बाली मंत्रिस्तरीय सम्मेलन- 2013

(IV) नैरोबी मंत्रिस्तरीय सम्मेलन- 2015

(V) ब्यूनस आयर्स मंत्रिस्तरीय सम्मेलन- 2017

(VI) जिनेवा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन- 2022


(I) सिगांपुर सम्मेलन- 1996

➠सिंगापुर मंत्रिस्तरीय सम्मेलन विश्व व्यापार संगठन (WTO) का प्रथम मंत्रिस्तरीय सम्मेलन है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) का सिंगापुर मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 9 दिसंबर 1996 से 13 दिसंबर 1996 तक सिंगापुर में आयोजित किया गया था।


(II) दोहा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन- 2001

➠दोहा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन विश्व व्यापार संगठन (WTO) का चौथा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) का दोहा सम्मेलन 9 नवम्बर 2001 से 13 नवम्बर 2001 तक कतर की राजधानी दोहा में आयोजित किया गया था।


(III) बाली मंत्रिस्तरीय सम्मेलन- 2013

➠बाली मंत्रिस्तरीय सम्मेलन विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 9वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) का बाली मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 3 दिसम्बर 2013 से 6 दिसम्बर 2013 तक इंडोनेशिया के बाली में आयोजित किया गया था।


(IV) नैरोबी मंत्रिस्तरीय सम्मेलन- 2015

➠नैरोबी मंत्रिस्तरीय सम्मेलन विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 10वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) का नैरोबी मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 15 दिसम्बर 2015 से 19 दिसम्बर 2015 तक केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित किया गया था।


(V) ब्यूनस आयर्स मंत्रिस्तरीय सम्मेलन- 2017

➠ब्यूनस आयर्स मंत्रिस्तरीय सम्मेलन विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 11वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) का ब्यूनस आयर्स मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 10 दिसम्बर 2017 से 13 दिसम्बर 2017 तक अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में आयोजित किया गया था।


(VI) जिनेवा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन- 2022

➠जिनेवा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 12वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के द्वारा 12वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में 12 जून 2022 से 17 जून 2022 के बीच आयोजित किया गया था।


विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के परिणाम-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया की कोरोना वायरस की वैक्सीन और दवाइयों पर पेटेंट में छूटी दी जायेगी इसके लिए ट्रिप्स समझौते (TRIPs Agreement) में प्रावधान किये जायेंगे।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में लोक संग्रहण एवं खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर कोई हल नहीं निकाला गया लेकिन अगले मंत्रिस्तरीय सम्मेलन तक लोक संग्रहण एवं खाद्य सुरक्षा के मुद्दे का स्थायी हल निकाला जायेगा तब तक पीस क्लाॅज (Peace Clause) यथावत बनी रहेगी।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में मत्स्यन (मछली पकड़ने वाले) को दी जाने वाली सब्सिडी को सही नहीं माना गया है। विकसित देशों को मत्स्यन को सीमित करना होगा जबकी विकासशील देशों को मत्स्यन में लिए कुछ समय दिया गया है। अर्थात् विकासशील देश मत्स्यन को कुछ समय जारी रख सकते है।

ई-काॅमर्स का मुद्दा (E-Commerce Issues)- ई-काॅमर्स का मुद्दा विश्व व्यापार संगठन के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में उठाया गया था। वर्तमान में ई-काॅमर्स पर आयात शुल्क नहीं लगाया जाता है क्योंकि 1998 ई. में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में एक समझौता किया गया था जिसमें ऐसे (ई-काॅमर्स) आयात शुल्क पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

➠विकासशील देशों की यह मांग थी की ई-काॅमर्स के आयात शुल्क पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए परन्तु इस मांग को स्वीकार नहीं किया गया अतः विश्व व्यापार संगठन (WTO) के अगले मंत्रिस्तरीय सम्मेलन तक ई-काॅमर्स के आयात शुल्क पर प्रतिबंध जारी रहेगा।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में यह कहा गया की जो देश खाद्यान संकट से गुजर रहे है उनकी मदद विश्व खाद्य कार्यक्रम (World Food Programme- WFP) के द्वारा की जाएगी। तथा कोई भी देश विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) को किये जाने वाले निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगायेगा।


2. विश्व व्यापार संगठन की सामान्य परिषद् (General Council of World Trade Organization)

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सामान्य परिषद् के अधिन विभिन्न संस्थाएं है जैसे- वस्तु परिषद् (Goods Council), निवेश परिषद् (Investment Council) आदि

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सामान्य परिषद् के अधिन दो प्रमुख संस्थाएं है जैसे-

(I) विवाद निपटारा निकाय (Dispute Settlement Body)

(II) व्यापार नीति समीक्षा निकाय (Trade Policy Review Body)


3. विश्व व्यापार संगठन का महानिदेशक (Director General of World Trade Organization)

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) का प्रमुख महानिदेशक होता है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) का महानिदेशक अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर विश्व व्यापार संगठन () का प्रतिनिधित्व करता है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) में महानिदेशक का कार्यकाल 4 वर्ष का होता है।

➠वर्तमान में विश्व व्यापास संगठन (WTO) का महानिदेशक नगोजी ओकोंजो इवेला (Ngozi Okonjo-lweala)

➠नगोजी ओकोंजो इवेला विश्व व्यापार संगठन में विश्व की पहली महिला महानिदेशक है।

➠नगोजी ओकोंजो इवेला विश्व व्यापार संगठन में पहली अफ्रीकी महिला महानिदेशक भी है।

➠नगोजी ओकोंजो इवेला नाइजीरिया (पश्चिमी अफ्रीका) की निवासी है।


विश्व व्यापार संगठन (WTO) के महत्वपूर्ण समझौते-

1. विश्व व्यापार संगठन के वस्तु से संबंधित समझौते

2. विश्व व्यापार संगठन के सेवा से संबंधित समझौते

3. विश्व व्यापार संगठन के निवेश से संबंधित समझौते

4. विश्व व्यापार संगठन के बौद्धिक संपदा से संबंधित समझौते


1. विश्व व्यापार संगठन के वस्तु से संबंधित समझौते-

(I) कृषि समझौता (Agreement on Agriculture)

(II) गैर कृषि बाजार पहुंच (Non Agricultural Market Access- NAMA) या नामा समझौता

(III) मल्टी फाइबर समझौता (Multi Fiber Agreement- MFA)


(I) कृषि समझौता (Agreement on Agriculture)-

➠विश्व व्यापार संगठन के द्वारा 1994 ई. में कृषि समझौता किया गया था।

➠विश्व व्यापार संगठन के कृषि समझौते के अनुसार सब्सिडी बाजार को विकृत करती है। अर्थात् सब्सिडी देने से बाजार विकृत होता है। क्योंकि कुछ देश अधिक सब्सिडी देते है तथा कुछ देश कम सब्सिडी देते है। इसीलिए बाजार अधिक सब्सिडी देने वाले देशों की तरफ झुक जाता है इसीलिए सब्सिडी को सीमित या नियंत्रित किया जाता चाहिए।

➠विश्व व्यापार संगठन के कृषि समझौते के अनुसार सब्सिडी को तीन श्रेणीयों में बाटा गया है। जैसे-

(A) एंबर बाॅक्स सब्सिडी (Amber Box Subsidy)

(B) ब्लू बाॅक्स सब्सिडी (Blue Box Subsidy)

(C) ग्रीन बाॅक्स सब्सिडी (Green Box Subsidy)


(A) एंबर बाॅक्स सब्सिडी (Amber Box Subsidy)-

➠एंबर बाॅक्स सब्सिडी में वो सब्सिडी रखी गई है जो की बाजार को सर्वाधिक विकृत करती है।

➠उत्पादन के बढ़ने के साथ साथ एंबर बाॅक्स सब्सिडी भी बढ़ती जाती है।

➠एक निश्चित सीमा से अधिक एंबर बाॅक्स सब्सिडी नहीं दी जा सकती है।

➠विकसित देशों के लिए एंबर बाॅक्स सब्सिडी उत्पादन मूल्य का अधिकतम 5% तक दी जा सकती है।

➠विकासशील देशों के लिए एंबर बाॅक्स सब्सिडी उत्पादन मूल्य का अधिकतम 10% तक दी जा सकती है।

➠एंबर बाॅक्स सब्सिडी में उत्पादन की गणना के लिए 1986 से 1988 के बीच औसत उत्पादन को लिया जाता है।

➠एंबर बाॅक्स सब्सिडी में सब्सिडी की सीमा को De Minimis Level कहा जाता है।

➠एंबर बाॅक्स सब्सिडी में सब्सिडी की सीमा को लागू करने के लिए विकसित देशों को 6 वर्ष का समय दिया गया था।

➠एंबर बाॅक्स सब्सिडी में सब्सिडी की सीमा को लागू करने के लिए विकासशील देशों को 10 वर्ष का समय दिया गया था।

➠विद्युत सब्सिडी, उर्वरक सब्सिडी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सब्सिडी आदि सब्सिडी एंबर बाॅक्स सब्सिडी में शामिल है।


(B) ब्लू बाॅक्स सब्सिडी (Blue Box Subsidy)-

➠ब्लू बाॅक्स सब्सिडी में वो सब्सिडी रखी जाती है। जो बाजार का अधिक विकृत नहीं करती है।

➠ब्लू बाॅक्स सब्सिडी उत्पादन के साथ साथ नहीं बढ़ती है।

➠ब्लू बाॅक्स सब्सिडी को नियंत्रित किया जाना चाहिए परन्तु विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने ब्लू बाॅक्स सब्सिडी के नियंत्रण के लिए कोई सीमा निर्धारित नहीं की है।


(C) ग्रीन बाॅक्स सब्सिडी (Green Box Subsidy)-

➠ग्रीन बाॅक्स सब्सिडी में वो सब्सिडी रखी जाती है जो बाजार का विकृत नहीं करती है। जैसे- अनुसंधान और विकास के लिए सब्सिडी।

➠ग्रीन बाॅक्स सब्सिडी को नियंत्रण करने की आवश्यकता नहीं है।

➠जमीन पर सब्सिडी, पशुधन पर सब्सिडी आदि ग्रीन बाॅक्स सब्सिडी में शामिल है।


विश्व व्यापार संगठन (WTO) के कृषि समझौते के विवाद-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के कृषि समझौते को लेकर पहली बार विवाद सन् 2001 के दोहा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में हुआ था।

➠कृषि समझौते के विवाद में विकासशील देशों का आरोप था की विकसित देशों की सब्सिडी को ग्रीन बाॅक्स सब्सिडी एवं ब्लू बाॅक्स सब्सिडी में रखा गया था। तथा विकासशील देशों की सब्सिडी को एम्बर बाॅक्स सब्सिडी में रखा गया है।

➠कृषि समझौते के विवाद में विकासशील देशों का आरोप था की विकसित देशों को विकासशील देशों से अधिक सब्सिडी दी गई है।


खाद्य सुरक्षा का विवाद या लोक भंडारण का मुद्दा (Issue of Public Stockholding)-

➠वर्ष 2013 में भारत में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security act 2013- NFSA) पारित किया गया था।

➠राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 (NFSA) के अनुसार खाद्य सुरक्षा को कानूनी अधिनयम बना दिया गया था।

➠राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत भारत की 67% जनसंख्या को सस्ता अनाज उपलब्ध करवाया गया था।

➠राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनयम 2013 के तहत भारत की 67% जनसंख्या को सस्ता अनाज उपलब्ध करवाने के लिए सरकार के द्वारा बड़े स्तर पर अनाज की खरीद की गई तथा किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सब्सिडी दी गई

➠न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सब्सिडी अम्बर बाॅक्स की सब्सिडी है।

➠राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनयम 2013 अम्बर बाॅक्स की सब्सिडी की उल्लंघन सीमा का उल्लंघन करता है।

➠वर्ष 2013 के बाली मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 की शिकायत विश्व व्यापार संगठन (WTO) में की गई थी।

➠खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 की शिकायत विश्व व्यापार संगठन (WTO) में करने के बाद भारत को तर्क था की वह एक विकासशील देश है तथा भारत के नागरिकों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध करवाना भारत सरकार का उत्तरदायित्व है।

➠भारत सरकार ने कहा की खाद्य सुरक्षा अधिनयम के तहत दी गई सब्सिडी बाजार को विकृत करने के लिए नहीं दी गई है।

➠खाद्य सुरक्षा विवाद का एक अस्थाई हल निकालते हुए भारत को 4 वर्ष के लिए पीस क्लाॅज (Peace Clause) दी गई।

➠भारत को 4 वर्ष के लिए दी गई पीस क्लाॅज (Peace Clause) को नैरोबी मंत्रीस्तरीय सम्मेलन में तबतक के लिए बढ़ा दिया गया जबतक की खाद्य सुरक्षा विवाद का स्थाई हल नहीं निकाल लिया जाता है।

➠पीस क्लाॅज (Peace Clause) के कारण भारत को खाद्य सुरक्षा अधिनयम (कानून) को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में चुनौती नहीं दी जा सकती है।


(II) गैर कृषि बाजार पहुंच (Non Agricultural Market Access- NAMA) या नामा समझौता-

➠नामा समझौते के तहत कृषि उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देने की मांग की गई थी।

➠कृषि उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए शुल्क (Tariffs) को कम किया जाना चाहिए।

➠व्यापार शुल्क को कम करने के लिए स्विस फाॅर्मूला (Swiss Formula) का प्रयोग किया जा सकता है।


(III) मल्टी फाइबर समझौता (Multi Fiber Agreement- MFA)-

➠मल्टी फाइबर समझौता प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता (General Agreement on Tariffs and Trade- GATT) के अधिन किया गया था।

➠मल्टी फाइबर समझौते के तहत वस्त्र के व्यापार में कोटा (Quota) निर्धारित किया गया था। यहां कोटा का अर्थ मात्रात्मक प्रतिबंध है।

➠कोटा (Quota) को गैर प्रशुल्क बाधा (Non Tariff Barriers) माना जाता है।

➠वर्ष 2005 में मल्टी फाइबर समझौते (MFA) को Agreement on Textiles and Clothing से प्रतिस्थापित या परिवर्तित कर दिया गया।

➠Agreement on Textiles and Clothing के तहत सभी प्रकार के कोटा (Quota) को समाप्त कर दिया गया था।


2. विश्व व्यापार संगठन के सेवा से संबंधित समझौते-

(I) गैट्स समझौता (GATS Agreement)


(I) गैट्स समझौता (GATS Agreement)-

➠GATS (English)- General Agreement on Trade and Services

➠GATS (हिंदी)-  व्यापार और सेवाओं पर सामान्य समझौता

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के अनुसार सेवाओं को चार भागों में विभाजित किया गया है। जैसे-

(I) Mode-1 की सेवाएं (Mode-1 Services)

(II) Mode-2 की सेवाएं (Mode-2 Services)

(III) Mode-3 की सेवाएं (Mode-3 Services)

(IV) Mode-4 की सेवाएं (Mode-4 Services)

➠विकसीत देश Mode-3 के नियमों को सरल चाहते है जबकि विकासशील देश Mode-4 के नियमों को सरल चाहते है।


(I) Mode-1 की सेवाएं (Mode-1 Services)-

➠Mode-1 की सेवाएं वो सेवाएं है जो एक देश में रहते हुए किसी दूसरे देश में दी जाती है। जैसे-(Business Process Outsourcing- BPO) या काॅल सेंटर।


(II) Mode-2 की सेवाएं (Mode-2 Services)-

➠Mode-2 की सेवाएं वो सेवाएं है जिनका उपभोग विदेश में जाकर किया जाता है। जैसे- पर्यटन।


(III) Mode-3 की सेवाएं (Mode-3 Services)-

➠Mode-3 की सेवाओं में सेवाओं से संबंधि निवेश को शामिल किया जाता है। जैसे- बीमा, बैंकिंग आदि।


(IV) Mode-4 की सेवाएं (Mode-4 Services)-

➠Mode-4 की सेवाओं में मानव संसाधन के आवागमन को रखा जाता है। जैसे- डाॅक्टर, इंजिनियर आदि।


3. विश्व व्यापार संगठन के निवेश से संबंधित समझौते-

(I) ट्रिम्स समझौता (TRIM Agreement)


(I) ट्रिम्स समझौता (TRIM Agreement)-

➠TRIM (English)- Trade Related Investment Measures

➠TRIM (हिंदी)- व्यापार संबंधित निवेश उपाय

➠ट्रिम्स समझौता विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया है।

➠ट्रिम्स समझौते में राष्ट्रीय व्यवहार (National Treatment) का सिद्धांत एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है

➠ट्रिम्स समझौते के राष्ट्रीय व्यवहार सिद्धांत के तहत घरेलू तथा विदेशी कंपनियों के बीच कोई भेद भाव नहीं किया जाना चाहिए।

➠राष्ट्रीय व्यवहार का सिद्धांत अमेरिका के साथ हुए सौर ऊर्जा विवाद के कारण चर्चा में रहा था।



4. विश्व व्यापार संगठन के बौद्धिक संपदा से संबंधित समझौते-

(I) ट्रिप्स समझौता (TRIPs Agreement / Trade Related Aspects of Intellectual Property Rights- TRIPs)


(I) ट्रिप्स समझौता (TRIPs Agreement / Trade Related Aspects of Intellectual Property Rights- TRIPs)-

➠व्यापार संबंध बौद्धिक संपदा अधिकार (TRIPs) समझौता बौद्धिक संपदा के अधिकारों की रक्षा तथा मान्यता के लिए किया गया था।

➠बौद्धिक संपदा वह संपदा है जिसका निर्माण मनुष्य की बुद्धि से किया गया है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के द्वारा बौद्धिक संपदा के अधिकार दिये जाते है जैसे- पेटेंट, काॅपीराइट, इंडस्ट्रियल डिजाइन, ट्रेडमार्क, इंडस्ट्रियल सिक्रेट, जियोग्राफी इंडिकेटर या भौगोलिक संकेतक (GI Tag) आदि।


पेटेंट विवाद या मामला (Patent Case)-

➠बौद्धिक संपदा के अधिकार में मुख्य विवाद पेटेंट (Patent) को लेकर है।

➠पेटेंट (Patent) एक प्रकार का एकाधिकार है।

➠पेटेंट (Patent) दो प्रकार का होता है। जैसे-

(I) प्रक्रिया पेटेंट (Process Patent)

(II) उत्पाद पेटेंट (Product Patent)


(I) प्रक्रिया पेटेंट (Process Patent)-

➠प्रक्रिया पेटेंट में प्रक्रिया का पेटेंट करवाया जाता है। अर्थात् जब किसी व्यक्ति या संस्था के द्वारा किसी प्रक्रिया का पेटेंट करवाया जाता है तब उस प्रक्रिया का प्रयोग उस व्यक्ति या संस्था (पेटेंट धारक) के अलावा किसी और के द्वारा नहीं किया जा सकता है।


(II) उत्पाद पेटेंट (Product Patent)-

➠उत्पाद पेटेंट में उत्पाद का पेटेंट करवाया जाता है। अर्थात् जब किसी व्यक्ति या संस्था के द्वारा किसी उत्पाद का पेटेंट करवाया जाता है तब उस उत्पाद को उस व्यक्ति या संस्था (पेटेंट धारक) के अलावा किसी और के द्वारा नहीं बनाया जा सकता है।


भारतीय पेटेंट अधिनियम 1970 (Indian Patent Act 1970)-

➠भारत में पहले प्रक्रिया पेटेंट (Process Patent) दिया जाता था।

➠वर्तमान में भारत में प्रक्रिया पेटेंट (Process Patent) तथा उत्पाद पेटेंट (Product Patent) दोनों पेटेंट दिये जाते है।

➠पेटेंट 20 वर्ष के लिए दिया जाता है।

➠पेटेंट देने के लिए भारतीय पेटेंट अधिनियम 1970 (Indian Patent Act 1970) बनाया गया था।


एवर ग्रीनिंग या सदाबहार (Ever Greening)-

➠भारतीय पेटेंट अधिनियम 1970 एवर ग्रीनिंग (Ever Greening) की अनुमती नहीं देता है।

➠पेटेंट का बार बार नवीनीकरण एवर ग्रीनिंग (Ever Greening) ही कहलाता है।

➠Novartis Glivec  Case (कंपनी- Novartis, दवाई- Glivec) या Novartis Glivec मामला Ever Greening से संबंधित है।

➠Novartis Glivec विवाद या मामले का हल करने के लिए भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा (Section) 3-(D) का प्रयोग किया गया था।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) का TRIPs समझौता भी एवर ग्रीनिंग (Ever Greening) की अनुमती नहीं देता है।


अनिवार्य लाइसेंस (Compulsory License)-

➠भारतीय पेटेंट अधिनियम 1970 की धारा 84 (Indian Patent Act 1970, Section 84) अनिवार्य लाइसेंस (Compulsory License) की अनुमती देती है।

➠पेटेंट अवधि के दौरान दवाइयों का जेनेरिक वर्जन तैयार किया जा सकता है।

➠यदि जेनेरिक वर्जन की दवाइयों का उत्पादन करने वाली कंपनी के पास अनिवार्य लाइसेंस (Compulsory License) है तो वह कंपनी पेटेंट अवधि के दौरान दवाइयों का जेनेरिक वर्जन तैयार कर सकती है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) का TRIPs समझौता भी अनिवार्य लाइसेंस (Compulsory License) की अनुमती देता है।

➠नक्सावर का मामला या विवाद (Nexavar Case) अनिवार्य लाइसेंस (Compulsory License) से जुड़ा हुआ है।


डम्पिंग (Dumping)-

➠जब कोई देश किसी उत्पाद को विदेशी बाजार में घरेलू कीमत से कम कीमत पर बेचता है तो इस प्रक्रिया को डम्पिंग कहा जाता है।

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) डम्पिंग की अनुमति नहीं देता है।

➠डम्पिंग ड्यूटी के प्रभाव को कम या रोकने के लिए एंटी डम्पिंग ड्यूटी (Anti Dumping Duty) लगायी जाती है।

➠डम्पिंग ड्यूटी के प्रभाव को कम या रोकने के लिए एंटी डम्पिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश वाणिज्य मंत्रालय के द्वारा की जाती है।

➠एंटी डम्पिंग ड्यूटी (Anti Dumping Duty) को लागू करने का कार्य वित्त मंत्रालय के द्वारा किया जाता है।


डम्पिंग के उद्देश्य (Objectives of Dumping)-

(I) विदेशी बाजार पर अधिकार करना

(II) निर्यात को बढ़ावा देना

(III) अतिरिक्त उत्पादन को बेचना


काउंटरवेलिंग शुल्क या प्रतिकारी शुल्क Countervailing Duty (CVD)-

➠काउंटरवेलिंग शुल्क सब्सिडी के प्रभाव को दुर करने के लिए लगाया जाने वाला आयात शुल्क (Import Duty) है।


सेनिटरी एंड फाइटो सेनिटरी मेजर्स (Sanitary and Phytosanitary Measures)-

➠यदि आयात करने वाले देश को लगता है की आयातित उत्पाद के सेवन से देश के लोगों का स्वास्थ्य खराब हो सकता है व पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है  तब आयात करने वाले देश के द्वारा सेनिटरी एंड फाइटो सेनिटरी मेजर्स के तहत ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। जैसे- चीन के द्वारा भारत के बासमती चावल पर प्रतिबंध लगाया गया था।, यूरोप के द्वारा भारत के अल्फांसो आम या हापुस आम (Alphanso) पर प्रतिबंध लगाया गया था।, यूरोप के द्वारा भारत की जेनेरिक दवाइयों पर प्रतिबंध लगाया गया था।


विशेष सुरक्षा तंत्र (Special Safeguard Mechanism)-

➠यदि किसी देश में कृषि उत्पादों का आयात किया जाता है तथा आयात करने वाले देश को लगता है की इससे घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ जायेगी तथा घरेलू किसानों को नुकसान होगा तब ऐसे आयातों पर विशेष सुरक्षा तंत्र के तहत आयात शुल्क (Import Duty) को बढ़ाया जा सकता है।


सबसे पसंदीदा राष्ट्र (Most Favoured Nation- MFN)-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देशों के द्वारा एक दूसरे को सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) का दर्जा दिया जाता है।

➠सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) के माध्यम से  भेदभाव रहीत बाजार पहुंच सुनिश्चित की जाती है। अर्थात् यदि किसी एक सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) दर्जा प्राप्त देश को कोई व्यापारिक सुविधा दी जाती है तब वह व्यापार सविधा स्वतः ही अन्य सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) दर्जा प्राप्त देशों को भी मिल जाती है।

➠1996 ई. में सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) का दर्जा भारत ने पाकिस्तान को दिया था परन्तु पाकिस्तान ने भारत को सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) का दर्जा नहीं दिया गया।

➠पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) का दर्जा वापस ले लिया था।

➠सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) के सिद्धान्त के कुछ अपवाद है। जैसे-

1. क्षेत्रीय व्यापार समझौता (Regional Trade Agreement)-

➠क्षेत्रीय व्यापार समझौते के 6 प्रकार होते है। जैसे-

(I) वरीयता व्यापार समझौता (Preference Trade Agreement- PTA)

(II) मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement- FTA)

(A) उत्पत्ति का नियम (Rule of Origin)

(B) नकारात्मक सूची (Negative List)

(III) व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement- CEPA)

(IV) सीमा शुल्क संघ (Custom Union)

(V) साझा बाजार (Common Market)

(VI) आर्थिक संघ (Economic Union)


(I) वरीयता व्यापार समझौता (Preference Trade Agreement- PTA)-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देशों में से जिन देशों के बीच वरीयता व्यापार समझौता किया गया है उन देशों को अन्य देशों के मुकाबले प्रशुल्क (Tariff) में वरीयता दी जाती है।


(II) मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement- FTA)-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देशों में से जिन देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया गया है उन देशों के लिए सीमा शुल्क (Custom Duty) को शून्य कर दिया जाता है।

➠मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को दो भागों में बाटा गया है। जैसे-

(A) उत्पत्ति का नियम (Rule of Origin)

(B) नकारात्मक सूची (Negative List)


(A) उत्पत्ति का नियम (Rule of Origin)-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देशों में से जिन देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया गया है उन देशों को उत्पत्ति के नियम का लाभ मिलता है। इसीलिए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का उत्पत्ति का नियम सिर्फ उन उत्पादों पर लागू होता है जिनका न्यूनतम 35% उत्पादन उस देश में होना चाहिए जिस देश के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया गया है।

➠इस शर्त (35%) को कम या ज्यादा किया जा सकता है। इसीलिए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का उत्पत्ति का नियम एक गैर प्रशुल्क बाधा (Non Tariff Barriers) है।


(B) नकारात्मक सूची (Negative List)-

➠जिन उत्पादों को मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से बाहर रखना होता है उन्हें नकारात्मक सूची में लिखा जाता है।

➠यदि नकारात्मक सूची अत्यधिक बड़ी है तब मुक्त व्यापार समझौता (FTA) कम प्रभावी होता है।


(III) व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement- CEPA)-

➠व्यापार आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) में वस्तुओं के साथ-साथ सेवा, निवेश, बौद्धिक संपदा आदि को भी शामिल किया जाता है।


(IV) सीमा शुल्क संघ (Custom Union)-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के जिन सदस्य देशों के बीच सीमा शुल्क संघ समझौता किया गया है। वह देश एक समान आयात निर्यात के नियम अपनाते है।


(V) साझा बाजार (Common Market)-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देशों के द्वारा साझा बाजार समझौते के तहत उत्पादन और बिक्री के एक समान नियम अपनाये जाते है।


(VI) आर्थिक संघ (Economic Union)-

➠विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देशों के द्वारा आर्थिक संघ समझौते के तहत एक समान मौद्रिक नीति अपनायी जाती है।

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