आर्थिक संवृद्धि और आर्थिक विकास की मूलभूत अवधारणाएं

आर्थिक संवृद्धि और आर्थिक विकास की मूलभूत अवधारणाएं

(Basic Concepts of Economic Growth and Economic Development)


आर्थिक संवृद्धि और आर्थिक विकास में अंतर-

(I) आर्थिक संवृद्धि

(II) आर्थिक विकास


(I) आर्थिक संवृद्धि-

➠आर्थिक संवृद्धि में संकीर्ण अवधारणा है।

➠आर्थिक संवृद्धि में उत्पादन में वृद्धि मापी जाती है।

➠आर्थिक संवृद्धि में मात्रात्मक अवधारणा है।

➠आर्थिक संवृद्धि में एकविमीय अवधारणा है।

➠आर्थिक संवृद्धि विकसित देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

➠आर्थिक संवृद्धि में GDP, GNP, प्रति व्यक्ति आय आदि जैसे संकेतकों का उपयोग किया जाता है।

➠आर्थिक संवृद्धि मापने में आसान है।


(II) आर्थिक विकास-

➠आर्थिक विकास में व्यापक अवधारणा है।

➠आर्थिक विकास में उत्पादन के साथ-साथ सामाजिक कल्याण को भी मापा जाता है।

➠आर्थिक विकास में गुणात्मक अवधारणा है।

➠आर्थिक विकास में बहुआयामी अवधारणा है।

➠आर्थिक विकास विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

➠आर्थिक विकास में HDI, हैप्पीनेस, गरीबी, बेरोजगारी आदि जैसे संकेतकों का उपयोग किया जाता है।

➠आर्थिक विकास मापने के लिए अपेक्षाकृत कठिन है।


मानव विकास प्रतिवेदन (रिपोर्ट) (Human Development Report- HDR)-

➠मानव विकास प्रतिवेदन (रिपोर्ट) संयुक्त राष्ट्र संघ के विकास कार्यक्रम 'संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम' (United Nation Development Programme- UNDP) के द्वारा जारी की जाती है।

➠मानव विकास प्रतिवेदन (रिपोर्ट) (HDR) में कुछ महत्वपूर्ण सूचकांक जारी किये जाते है। जैसे-

(I) मानव विकास सूचकांक (Human Development Index- HDI)


(I) मानव विकास सूचकांक (Human Development Index- HDI)-

➠मानव विकास सूचकांक 1989 ई. में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक के द्वारा विकसित किया गया है।

➠मानव विकास सूचकांक को विकसित करने में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक का साथ भारत के अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने दिया था।

सन् 1990 की मानव विकास प्रतिवेदन या रिपोर्ट (HDR) में मानव विकास सूचकांक (HDI) को पहली बार प्रकाशित किया गया था।

➠मानव विकास सूचकांक (HDI) 2019 के अनुसार HDI Ranking में भारत 131वें स्थाप पर है।

➠मानव विकास सूचकाकं 2019 के अनुसार भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य (HDI Value)- 0.645 है।

➠मानव विकास सूचकांक (HDI) 2019 के अनुसार HDI Ranking में नाॅर्वे (Norway) प्रथम स्थाप पर है।

➠मानव विकास सूचकांक (HDI) की गणना तीन कारकों के आधार पर की जाती है। तीन कारक जैसे-

(A) स्वास्थ्य

(B) शिक्षा

(C) जीवन स्तर


(A) स्वास्थ्य-

➠मानव विकास सूचकांक (HDI) के कारक स्वास्थ्य में एक संकेतक का प्रयोग किया जाता है। जैसे-

(अ) जन्म के समय जीवन प्रत्याशा- 

➠यदि जीवन प्रत्याशा 20 वर्ष है तो मानव विकास सूचकांक (HDI) का मूल्य 0 होगा।

➠यदि जीवन प्रत्याशा 85 वर्ष है तो मानव विकास सूचकांक (HDI) का मूल्य 1 होगा।


(B) शिक्षा-

➠मानव विकास सूचकांक (HDI) के कारक शिक्षा में दो संकेतकों का प्रयोग किया जाता है। जैसे-

(अ) स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष- अधिकतम वर्ष 18

(ब) स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष- अधिकतम वर्ष 15


(C) जीवन स्तर-

➠जीवन स्तर को मापने के लिए प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) का प्रयोग किया जाता है।

➠देशों के बीच जीवन स्तर की तुलना के लिए क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity- PPP) का प्रयोग किया जाता है। अर्थात् एक ही वस्तु को अलग-अलग देशों में खरीदने के लिए कितनी मुद्रा की आवश्यकता होती है। जैसे-

➠क्रय शक्ति समता (PPP) की गणना करने के लिए द इकोनाॅमिस्ट मैगजीन (The Economist Magazine) के द्वारा बिग मैक सूचकांक (Big Mac Burger Index) का प्रयोग किया गया है।


मानव विकास प्रतिवेदन (रिपोर्ट) (HDR) में कुछ अन्य सूचकांक-

1. असमानता समायोजित मानव विकास सूचकांक (Inequality Adjusted Human Development Index- IHDI)

2. लैंगिक विकास सूचकांक (Gender Development Index- GDI)

3. लैंगिक असमानता सूचकांक (Gender Inequality Index- GII)

4. बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index- MPI)


1. असमानता समायोजित मानव विकास सूचकांक (Inequality Adjusted Human Development Index- IHDI)-

➠असमानता समायोजित मानव विकास सूचकांक (IHDI) के तहत मानव विकास सूचकांक (HDI) पर असमानता के प्रभाव की गणना की जाती है। अर्थात् यदि असमानता नहीं होती तब मानव विकास सूचकांक (HDI) में कितनी वृद्धि होती है।


2. लैंगिक विकास सूचकांक (Gender Development Index- GDI)-

➠लैंगिक विकास सूचकांक में महिलाओं तथा पुरुषों के लिए अलग-अलग मानव विकास सूचकांक (HDI) की गणना की जाती है। तथा महिलाओं तथा पुरुषों के मानव विकास सूचकांक (HDI) में तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है।

➠वर्ष 2019 के अनुसार भारत का लैंगिक विकास सूचकांक (GDI) स्कोर 0.820 है।

➠वर्ष 2019 के अनुसार विश्व का लैंगिक विकास सूचकांक (GDI) स्कोर 0.943 है।


3. लैंगिक असमानता सूचकांक (Gender Inequality Index- GII)-

➠लैंगिक असमानता सूचकांक की गणना 5 कारकों के आधार पर की जाती है। जैसे-

(I) मातृ मृत्यु दर

(II) किशोरावस्था में जन्म दर

(III) संसद में भागीदारी

(IV) न्यूनतम माध्यमिक शिक्षा प्राप्त जनसंख्या

(V) श्रम दल भागीदारी


विशेष- वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक (Global Gender Gap Index- GGGI)-

➠वैश्विक लैंगिक अंतराल (Global Gender Gap- GGG) सूचकांक में भारत 146 देशों में से 135वें स्थान पर है।

➠वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum- WEF) के द्वारा जारी किया जाता है।


4. बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index- MPI)-

➠बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) की गणना के लिए तीन आयामों का प्रयोग किया जाता है।

➠बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) की गणना के लिए तीन आयामों को 10 संकेतकों में विभाजित किया गया है। तीन आयाम जैसे-

(I) स्वास्थ्य

(II) शिक्षा

(III) जीवन स्तर


(I) स्वास्थ्य-

➠बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) की गणना के लिए स्वास्थय को 2 संकेतकों में विभाजित किया गया है। जैसे-

(A) पोषण

(B) बाल मृत्यु दर


(II) शिक्षा-

➠बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) की गणना के लिए शिक्षा को 2 संकेतकों में विभाजित किया गया है। जैसे-

(A) स्कूली शिक्षा के वर्ष

(B) स्कूल उपस्थिति



(III) जीवन स्तर-

➠बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) की गणना के लिए स्वास्थय को 6 संकेतकों में विभाजित किया गया है। जैसे-

(A) भोजन पकाने का ईंधन

(B) स्वच्छता

(C) स्वच्छ पेयजल

(D) विद्युत कनेक्शन

(E) पक्का घर

(F) परिसंपत्तियां जैसे- टीवी, फ्रिज, कूलर आदि।


ग्रहीय दबाव समायोजित मानव विकास सूचकांक (Planetary Pressures-Adjusted Human Development Index- PHDI)-

➠ग्रहीय दबाव समायोजित मानव विकास सूचकांक (PHDI) के तहत मानव विकास के कारण पृथ्वी पर पड़ने वाले दबाव की गणना की जाती है।

➠ग्रहीय दबाव समायोजित मानव विकास सूचकांक (PHDI) में कार्बन उत्सर्जन तथा अपशिष्ट उत्पादन की गणना की जाती है।


विश्व खुशहाली सूचकांक  (World Happiness Index- WHI)-

➠विश्व खुशहाली सूचकांक (WHI) विश्व खुशहाली रिपोर्ट (World Happiness Report- WHR) में जारी किया जाता है।

➠विश्व खुशहाली सूचकांक (WHI) सतत् विकास समाधान नेटवर्क (Sustainable Development Solutions Network- SDSN) के द्वारा जारी की जाती है।

➠सतत् विकास समाधान नेटवर्क संयुक्त राष्ट्र संघ की एक वैश्विक पहल है।

➠विश्व खुशहाली रिपोर्ट प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को जारी की जाती है। क्योंकि प्रत्येक वर्ष 20 मार्च के दिन अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस मनाया जाता है।

➠संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस मनाना वर्ष 2013 में पहली बार शुरू किया था।

➠संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस मनाने के लिए जुलाई 2012 में प्रस्ताव पारित किया था।

➠विश्व खुशहाली सूचकांक के लिए विश्व गैलप सर्वे  (Gallup World Poll) करवाया जाता है। विश्व गैलप सर्वे में तीन मुख्य प्रश्न पुछे जाते है। जैसे-

(I) जीवन का मूल्यांकन

(II) सकारात्मक भाव

(III) नकारात्मक भाव


(I) जीवन का मूल्यांकन-

➠विश्व गैलप सर्वे में जीवन के मूल्यांकन में जीवन को 1 से 10 के बीच अंक देने होते है।


(II) सकारात्मक भाव-

➠विश्व गैलप सर्वे वाले दिन व्यक्ति के सकारात्मक भाव देखे जाते है। जैसे- खुशी, हँसी और आंनद महसूस किया है।


(III) नकारात्मक भाव-

➠विश्व गैलप सर्वे वाले दिन व्यक्ति के नकारात्मक भाव देखे जाते है। जैसे- चिंता, दुख और गुस्सा महसूस किया है।


➠इन तीन प्रश्नों के अलावा विश्व खुशहाली सूचकांक के लिए 6 अन्य संकेतकों का प्रयोग किया जाता है। जैसे-

(I) प्रति व्यक्ति वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP)

(II) स्वस्थ जीवर स्तर

(III) सामाजिक सुरक्षा या सामाजिक समर्थन

(IV) निर्णय लेने की स्वतंत्रता

(V) उदारता

(VI) भ्रष्टाचार की धारणा


विश्व खुशहाली रिपोर्ट 2022-

➠हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास समाधान नेटवर्क (SDSN) के द्वारा विश्व खुशहाली सूचकांक 2022 जारी किया गया है। जिसके अनुसार-

➠विश्व खुशहाली सूचकांक 2022 में विश्व में कुल 146 देशों को स्थान दिया गया है।

➠विश्व खुशहाली सूचकांक 2022 के अनुसार फिनलैंड लगातार पाँचवी बार विश्व का सबसे खुशहाल देन घोषित किया गया है।

➠विश्व खुशहाली सूचकांक 2022 के अनुसार फिनलैंड के बाद विश्व का दूसरा सबसे खुशहाल देश डेनमार्क को घोषित किया गया हैष

➠विश्व खुशहाली सूचकांक 2022 के अनुसार विश्व का सबसे अंतिम खुशहाल देश अफगानिस्तान को घोषित किया गया है। अर्थात् विश्व खुशहाली सूचकांक में अफगानिस्तान का सबसे अंतिम (146वां) स्थान है।

➠विश्व खुशहाली सूचकांक 2022 के अनुसार विश्व का सबसे दुखी देश अफगानिस्तान को घोषित किया गया है।

➠विश्व खुशहाली सूचकांक 2022 के अनुसार भारत विश्व का 136वां खुशहाल देश घोषित किया गया है।

➠विश्व खुशहाली सूचकांक 2021 के अनुसार भारत विश्व का 139वां खुशहाल देश था। वर्तमान में सुधार करते हुए भारत 136वें स्थान पर है।

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