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हर्यक वंश

हर्यक वंश (Haryak Vansh)- (545 BC- 412 BC)

  • हर्यक वंश मगध साम्राज्य का पहला राजवंश था।
  • हर्यक वंश का शासन काल 545 ई.पू. से लेकर 412 ई.पू. तक रहा था।
  • प्रारम्भ में हर्यक वंश की राजधानी राजगृह थी। लेकिन बाद में हर्यक वंश की राजधानी पाटलिपुत्र (पटना) स्थानांतरित की गई थी।
  • हर्यक वंश को पितृहन्ता वंश भी कहा जाता है।
  • हर्यक वंश का संस्थापक बिम्बिसार था।
  • हर्यक वंश का अंतिम शासक नागदशक था।
  • हर्यक वंश के बाद शिशुनाग वंश अस्तित्व में आया था।
  • हर्यक वंश का शासक काल लगभग 132 वर्ष तक रहा था।


हर्यक वंश के प्रमुख राजा-

  • 1. बिम्बिसार (545 ई.पू. - 492 ई.पू.)
  • 2. अजातशत्रु (492 ई.पू. - 460 ई.पू.)
  • 3. उदायिन या उदयन (460 ई.पू. - 440 ई.पू.)
  • 4. अनिरुद्ध
  • 5. मंडक
  • 6. नागदशक या नागदर्शक (444 ई.पू. - 412 ई.पू.)


1. बिम्बिसार-

  • बिम्बिसार का कार्यकाल 545 ई.पू. से 492 ई.पू. तक था।
  • बिम्बिसार हर्यक वंश का पहला शासक था।
  • बिम्बिसार की राजधानी राजगीर थी।
  • बिम्बिसार को जैन ग्रंथों में श्रेणिक कहा गया है।
  • बिम्बिसार को मत्स्य पुराण में क्षेत्रोजस कहा गया है।
  • बिम्बिसार पहला साम्राज्यवादी शासक था।
  • बिम्बिसार को मगध साम्राज्य का वास्तविक स्थापक माना जाता है।
  • बिम्बिसार ने वज्जिसंघ की राजकुमारी चेल्लाना से विवाह किया था।
  • चेल्लाना लिच्छवि की राजकुमारी तथा चेटक की बहन थी।
  • बिम्बिसार ने कोसल की राजकुमारी कोशला देवी या महाकोशला देवी से विवाह किया था।
  • कोशला देवी या महाकोशला देवी राजा प्रसेनजित (पसेनदी) की बहन थी।
  • कोशला देवी से विवाह करने पर बिम्बिसार को काशी दहेज में दिया गया था।
  • बिम्बिसार ने मद्र देश की राजकुमारी क्षेमा या खेमा देवी से विवाह किया था।
  • बिम्बिसार ने अंग प्रदेश को जीत लिया था। इस समय अंग प्रदेश का शासक ब्रह्मदत्त था।
  • बिम्बिसार ने अपने बेटे अजातशत्रु (अजातसत्तु) को अंग प्रदेश का गवर्नर नियुक्त किया था।
  • जब अवंती का शासक प्रद्योत बीमार था तब बिम्बिसार ने अपने चिकित्सक या राजवैद्य जीवक को प्रद्योत के दरबार में उज्जैन भेजा था।
  • राजवैद्य जीवक की शिक्षा तक्षशिला विश्वविद्यालय में हुई थी।
  • बिम्बिसार भगवान गौतम बुद्ध का समकालीन था तथा भगवान गौतम बुद्ध का अनुयायी भी था।
  • बिम्बिसार भगवान गौतम बुद्ध के सबसे बड़े प्रश्रयदाता थे।
  • बिम्बिसार ने बौद्धों को वेलवन नामक वन दान में दिया था। अतः बिम्बिसार बौद्ध धर्म का प्रथम प्रमुख संरक्षक था।
  • ह्वेनसांग के अनुसार बिम्बिसार ने राजगीर नामक नगर की स्थापना की थी।
  • बिम्बिसार के बेटे अजातशत्रु ने बिम्बिसार की हत्या कर दी थी।


2. अजातशत्रु-

  • अजातशत्रु का कार्यकाल 492 ई.पू. से लेकर 460 ई.पू. तक था।
  • अजातशत्रु बिम्बिसार का पुत्र था।
  • अजातशत्रु की माता का नाम कोशला देवी या महाकोशला देवी था।
  • अजातशत्रु कुणिक के नाम से प्रसिद्ध था।
  • अजातशत्रु अपने पिता बिम्बिसार की हत्या कर राजा बना था।
  • अजातशत्रु ने काशी पर अधिकार कर लिया था।
  • अजातशत्रु ने प्रसेनजित की बेटी वजीरा से विवाह किया था।
  • अजातशत्रु ने अपने मंत्री वस्सकार को वज्जि संघ में फूट डालने के लिए भेजा था।
  • अजातशत्रु ने वज्जिसंघ पर आक्रमण किया तथा युद्ध में रथमूसल एवं महाशिलाकंटक जैसे हथियारों का प्रयोग कर वज्जिसंघ को जीत लिया था।
  • अजातशत्रु के शासक काल में मगध उत्तर भारत का सबसे शक्तिशाली राज्य बना था।
  • प्रथम बौद्ध संगीति (बैठक) का आयोजन अजातशत्रु के द्वारा करवाया गया था।
  • अजातशत्रु भगवान गौतम बुद्ध तथा महावीर का समकालीन था।
  • अजातशत्रु ने अपनी राजधानी राजगृह का सुदृढीकरण करवाया था।
  • अजातशत्रु के शासन काल में गौतम बुद्ध को निर्वाण की प्राप्ती हुई थी।
  • अजातशत्रु ने राजगृह में स्तूप का निर्माण करवाया था।


3. उदायिन या उदयन-

  • उदायिन का कार्यकाल 460 ई.पू. से लेकर 440 ई.पू. तक था।
  • उदायिन अजातशत्रु का पुत्र था।
  • उदायिन अपने पिता अजातशत्रु की हत्या कर राजा बना था।
  • बौद्ध ग्रंथों में उदायिन को पितृहन्ता भी कहा गया है।
  • उदायिन ने गंगा तथा सोन नदी के किनारे पर पाटलिपुत्र नगर का निर्माण करवाया था।
  • उदायिन ने पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी बनाया था।
  • उदायिन जैन धर्म का अनुयायी था।


6. नागदशक या नागदर्शक-

  • नागदशक का कार्यकाल 444 ई.पू. से लेकर 412 ई.पू. तक था।
  • नागदशक उदायिन का पुत्र था।
  • नागदशक हर्यक वंश का अंतिम शासक था।

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