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भारत पर फारसी आक्रमण

फारस आक्रमण

(Iran Invasion /Persian Invasion)


भारत पर फारसी आक्रमण (Persian Invasion of India)-

➠हखामनी वंश के शासक डेरियस या दारा या दारयबाहू ने भारत पर आक्रमण किया था।

➠फारसी आक्रमणकारी डेरियस को ही दारा या दारयबाहू के नाम से जाना जाता है।

➠डेरियस के द्वारा भारत पर प्रथम सफल आक्रमण लगभग 520-515 ई.पू. के आसपास किया था।

➠डेरियस ने सिंध के आसपास के क्षेत्रों (भारत का उत्तर पश्चिम क्षेत्र)को जीत लिया एवं उन क्षेत्रों को अपना 20वां प्रांत बनाया था।

➠इतिहासकार हेरोडोटस की पुस्तक हिस्टोरिका के अनुसार डेरियस के द्वारा जीते गये सिंध के आसपास के क्षेत्र से डेरियस को 360 टेलेंट सोना (सोने की ईंट) राजस्व के रूप में प्राप्त होता था।

➠सिंध क्षेत्र से प्राप्त राजस्व डेरियस के कुल राजस्व का एक तिहाई भाग था।

➠इतिहासकार हेरोडोटस को इतिहास का जनक कहा जाता है।

➠डेरियस के द्वारा भारत पर प्रथम सफल आक्रमण या फारस आक्रमण की जानकारी डेरियस के तीन अभिलेखों से मिलती है। जैसे-

1. बेहिस्तून अभिलेख

2. नक्श-ए-रुस्तम अभिलेख

3. पर्सेपोलिस अभिलेख

➠डेरियस के पुत्र जरख चीज ने भारतीय धनुर्धरों को अपनी सेना में नियुक्त किया था।

➠डेरियस तृतीय अंतिम फारसी शासक था।


भारत में फारसी आक्रमण के प्रभाव (Effects of Persian Invasion in India)-

➠फारसी लोगों ने सिंधु को हिन्दू कहा अतः 6वीं शताब्दी ई.पू. में फारस के द्वारा हिन्दू शब्द दिया गया था।

➠फारसियों ने महिलाओं को अंगरक्षक के रूप में नियुक्त किया जिसके कारण भारतीय भी महिलाओं को अंगरक्षक के रूप में नियुक्त करने लगे थे।

➠फारसी आक्रमण के बाद भारत में सजा के रूप में गंजा किये जाने की प्रथा आरम्भ हुई थी।

➠फारसी शासकों ने भारत में क्षत्रप प्रणाली आरम्भ की जिसे आगे शक एवं कुषाणों ने विकसित किया था।

➠क्षत्रप प्रणाली का अर्थ है 'दौहरी शासन प्रणाली'

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