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उत्तर वैदिक काल

उत्तर वैदिक काल- 1000 ई.पू. से 600 ई.पू. तक

(Post Vedic Period- 1000 BCE - 600 BCE)


उत्तर वैदिक काल (Post Vedic Period)-

➠1000 ई.पू. से लेकर 600 ई.पू. तक के काल या समय को उत्तर वैदिक काल कहा जाता है।


उत्तर वैदिक काल की स्थितियां-

1. उत्तर वैदिक काल में भौगोलिक स्थिति

2. उत्तर वैदिक काल में राजनीतिक स्थिति

3. उत्तर वैदिक काल में सामाजिक स्थिति

4. उत्तर वैदिक काल में आर्थिक स्थिति

5. उत्तर वैदिक काल में धार्मिक स्थिति


1. उत्तर वैदिक काल में भौगोलिक स्थिति-

➠ऋग्वैदिक काल के बाद उत्तर वैदिक काल में आर्य गंगा यमुना दोआब की तरफ फैल गये थे।

➠उत्तर वैदिक काल में गंडक नदी आर्यों की पूर्वी सीमा थी।

➠शतपथ ब्राह्मण के अनुसार राजा विदेध माधव (विदेघ माधव) तथा विदेध माधव का पुरोहित गौतम राहुगुणा (गौतम रहूगण) सदानीरा नदी (गंडक नदी) तक पहुंचे।

➠उत्तर वैदिक काल के साहित्य में तीन पर्वत मालाओं का उल्लेख किया गया है जैसे-

(I) त्रिककुद पर्वतमाला

(II) क्रौंच पर्वतमाला (केंज)

(III) मैनाक पर्वतमाला


2. उत्तर वैदिक काल में राजनीतिक स्थिति-

➠उत्तर वैदिक काल में क्षेत्रगत साम्राज्य का गठन आरम्भ हो गया था।

➠उत्तर वैदिक काल में राजा का पद शक्तिशाली और गरिमामयी बन गया था।

➠उत्तर वैदिक काल में राजा ने कई उपाधियों को अपनाया था जैसे-

(I) विराट

(II) सम्राट

(III) एकराट

(IV) स्वराट

(V) भोज

➠उत्तर वैदिक काल में राजा कई यज्ञ समारोह आयोजित करते थे। जैसे-

(I) राजसूय यज्ञ

(II) अश्वमेघ यज्ञ

(III) वाजपेय यज्ञ


(I) राजसूय यज्ञ-

➠उत्तर वैदिक काल में राजसूय यज्ञ राज्याभिषेक समारोह के समय किया जाता था।

➠राजा राजसूय यज्ञ के दौरान खेत की जुताई करते थे। अर्थात् राजसूय यज्ञ के दौरान राजा हल चलाते थे।

➠राजसूय यज्ञ के दौरान राजा के रत्निन या मंत्रियों के द्वारा राजा को भोज के लिए आमंत्रित किया जाता था।


(II) अश्वमेघ यज्ञ-

➠अश्वमेघ यज्ञ साम्राज्यवादी यज्ञ था। अर्थात् अश्वमेघ यज्ञ करने का मुख्य उद्देश्य साम्राज्य का विस्तार करना था।


(III) वाजपेय यज्ञ-

➠वाजपेय यज्ञ में राजा खेल गतिविधियों का आयोजन करते थे।

➠वाजपेय यज्ञ में राजा खुद रथ दौड़ में भाग लेते थे और राजा हमेशा जीतते थे।


➠उत्तर वैदिक काल में विदध का उल्लेख नहीं मिलता है।

➠उत्तर वैदिक काल में सभा और समिति भी शक्तिशाली नहीं थे।

➠अथर्ववेद में सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां बताया गया है।

➠उत्तर वैदिक काल में राजा को दिये जाने वाले कर (Tax) को बलि कहा जाता था।

➠उत्तर वैदिक काल में राजा के पास कोई स्थायी सेना नहीं होती थी।


3. उत्तर वैदिक काल में सामाजिक स्थिति-

➠उत्तर वैदिक काल में पितृसत्तात्मक संयुक्त परिवार थे।

➠उत्तर वैदिक काल में समाज 4 वर्णों में विभाजित था। जैसे- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र।

➠जन्म के आधार पर वर्ण व्यवस्था शुरू हुई थी।

➠उत्तर वैदिक काल में कुल और गोत्र शब्द का उल्लेख किया गया है। अर्थात् कुल और गोत्र शब्द की शुरुआत उत्तर वैदिक काल से हुई है।

➠उत्तर वैदिक काल में सामाजिक असमानता नहीं थी।

➠उत्तर वैदिक काल में ब्राह्मणों को प्रतीकात्मक सर्वोच्चता प्रदान की गई थी।

➠उत्तर वैदिक काल में क्षत्रियों का अधिशेष (Surplus) उत्पादन का अधिकार था।

➠उत्तर वैदिक काल में ब्राह्मण को अदायी कहा जाता था।

➠उत्तर वैदिक काल में क्षत्रिय को बलिहर कहा जाता था।

➠उत्तर वैदिक काल में वैश्य को अन्यस्य बलिकृत कहा जाता था।

➠उत्तर वैदिक काल में शूद्र को अन्नुस्य प्रेश्य कहा जाता था।

➠उत्तर वैदिक काल में महिलाओं की स्थितियों में गिरावट आई थी।

➠अथर्ववेद में बेटी को दुःख का स्रोत या दुःख का कारण बताया गया है।

➠मैत्रायणी संहिता में महिला को शराब और जुए के समान बुराई बताया गया है।

➠याज्ञवल्क्य और गार्गी संवाद का उल्लेख बृहदारण्यक उपनिषद में मिलता है।

➠उत्तर वैदिक काल में महिलाओं को शिक्षा का अधिकार था। जैसे- गार्गी तथा मैत्रेयी आदि।

➠उत्तर वैदिक काल में विधवा पुनर्विवाह होता था।

➠उत्तर वैदिक काल में नियोग प्रथा का प्रचलन था।

➠उत्तर वैदिक काल में घरेलू दासों का प्रयोग होता था।

➠उत्तर वैदिक काल में बाल विवाह का कोई उदाहरण नहीं मिलता है।


4. उत्तर वैदिक काल में आर्थिक स्थिति-

➠उत्तर वैदिक काल में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था थी।

➠अथर्ववेद के अनुसार राजा पृथुवैन्य ने कृषि की शुरुआत की थी।

➠अथर्ववेद में कृषि की विधियों का उल्लेख किया गया है।

➠अथर्ववेद में टिड्डीयों का उल्लेख किया गया है।

➠शतपथ ब्राह्मण के काठक संहिता में 24 बैलों के द्वारा खींचे गये हल का उल्लेख मिलता है।

➠उत्तर वैदिक काल में आर्य पशुपालन करते थे।

➠उत्तर वैदिक काल में गाय व घोड़ा आर्यों के प्रिय पशु थे।

➠उत्तर वैदिक काल में अधिशेष उत्पादन होता था।

➠अधिशेष उत्पादन के कारण उत्तर वैदिक काल में शहरी संस्कृति का विकास हुआ।

➠उत्तर वैदिक काल में कपड़ा उद्योग, चमड़ा उद्योग तथा धातु उद्योग विकसित हो गये थे।

➠उत्तर वैदिक काल में मुद्रा प्रणाली शुरू नहीं हुई थी।

➠उत्तर वैदिक काल में मुद्रा के रूप में गाय और निष्क का उपयोग किया जाता था।

➠उत्तर वैदिक काल में वस्तु विनिमय होता था।


5. उत्तर वैदिक काल में धार्मिक स्थिति-

➠ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश उत्तर वैदिक काल के मुख्य देवता थे।

➠इंद्र, अग्नि तथा वरुण उत्तर वैदिक काल के प्रमुख देवता नहीं थे।

➠उत्तर वैदिक काल में बहुदेववाद, एकाधिदेववाद, एकेश्वरवाद एवं निर्गुण भक्ति की अवधारणा लोकप्रिय थी।

➠उत्तर वैदिक काल में यज्ञ अनुष्ठान एवं कर्मकांड जटिल हो गये थे।

➠मुंडकोपनिषद (मुंडक उपनिषद) में अनुष्ठानों को टूटी हुई नौका के समान बताया गया है।

➠पूषन देवता उत्तर वैदिक काल में शूद्र का देवता था।

➠उत्तर वैदिक काल में ज्ञान मार्ग की अवधारणा लोकप्रिय हो गई थी।

➠उत्तर वैदिक काल में शूद्रों को यज्ञ अनुष्ठान तथा उपनयन संस्कार का अधिकार नहीं था।

➠ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्यों को उत्तर वैदिक काल में द्विज कहा जाता था।

➠उत्तर वैदिक काल में मूर्तियों की पूजा तथा मंदिरों का कोई प्रमाण नहीं मिलता है।

➠मोक्ष की अवधारणा उत्तर वैदिक काल में लोकप्रिय हो गई थी।

➠उत्तर वैदिक काल में लोग काले जादू में विश्वास करते थे।

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