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वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Service Tax- GST)

 GST

(Goods and Service Tax)

(वस्तु एवं सेवा कर)


जी एस टी (Goods and Service Tax- GST)-

  • जी एस टी (GST) को ही वस्तु एवं सेवा कर कहा जाता है।


भारत में जी एस टी (GST)-

  • भारत में GST की अनुशंसा पहली बार विजय केलकर टास्क फोर्स के द्वारा वर्ष 2003 में की गई थी अर्थात् भारत में GST लाने के लिए पहली बार सिफारिश विजय केलकर समिति ने वर्ष 2003 में की थी।
  • विजय केलकर समिति की स्थापना वर्ष 2002 में की गई थी।
  • विजय केलकर समिति ने वर्ष 2003 में भारत में GST लाने की सिफारिश की थी।
  • भारत में वर्ष 2006 के बजट घोषणा में भारत सरकार ने GST का लागू करने की घोषणा की परन्तु केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकारों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण 2006 में GST लागू नहीं किया जा सकता था।
  • अंततः वर्ष 2016 में 101 वां संविधान संशोधन किया गया था जिसमें GST लागू करने की घोषणा की गई थी।
  • 2016 के 101वें संविधान संशोधन के तहत भारत में 1 जुलाई 2017 से GST को लागू कर दिया गया था।


GST पर केंद्र सरकार के द्वारा निम्नलिखित कानून पारित किए गये है।-

  • 1. Central Goods and Services Tax Act 2017 (Central GST Act 2017)/ CGST Act 2017
  • 2. Integrated Good and Services Tax Act 2017 (Integrated GST Act 2017)/ IGST Act 2017
  • 3. Union Territory Goods and Services Tax Act 2017 (Union Territory GST Act 2017)/ UTGST Act 2017
  • 4. GST Compensation to States Act 2017


राज्य सरकार (State Government)-

  • राज्य विधानसभा में राज्य सरकारों के द्वारा State GST Act (SGST) पारित किया गया था।


भारत में GST की विशेषताएं-

  • वस्तु और सेवा की आपूर्ति पर GST आरोपित किया जाता है।
  • GST एक व्यापक कर (Comprehensive Tax) है क्योंकि GST में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के अधिकतर अप्रत्यक्ष करों को शामिल कर लिया गया है।
  • GST एक बहुस्तरीय कर (Multistage Tax) है क्योंकि मूल्य संवर्धन के प्रत्येक स्तर पर GST को आरोपित किया जाता है।
  • GST एक मूल्य संवर्धित कर या हस्तांतरित कर है।
  • मूल्य संवर्धन (Value Addition) पर GST लगाया जाता है।
  • यदि वस्तु एवं सेवा की आपूर्ति एक ही राज्य के अंदर की जाती है तब उस वस्तु एवं सेवा पर केंद्र सरकार के द्वारा CGST तथा राज्य सरकार के द्वारा SGST लगाया जाता है जिसे GST की दोहरी संरचना कहा जाता है।
  • यदि वस्तु एवं सेवा की आपूर्ति एक राज्य से दूसरे राज्य में की गई है तब उस वस्तु एवं सेवा पर केंद्र सरकार के द्वारा IGST लगाया जाता है।
  • IGST, CGST एवं SGST के योग के बराबर होता है। (IGST = CGST + SGST)
  • भारत में IGST को लागू करने तथा IGST को कलेक्ट करने का कार्य केंद्र सरकार के द्वारा किया जाता है।
  • यदि वस्तु एवं सेवा की आपूर्ति एक राज्य से दूसरे राज्य में की गई है तो ऐसी स्थित में SGST उस राज्य पर लगता है जिस राज्य के द्वारा उस वस्तु एवं सेवा का उपभोग किया जाता है अर्थात् उत्पादन करने वाले राज्य पर SGST नहीं लगता है।
  • यदि वस्तु एवं सेवा की आपूर्ति एक राज्य से दूसरे राज्य में की जाती है तब लगने वाले IGST में से केंद्र सरकार अपना हिस्सा रख लेती है तथा राज्य सरकार का हिस्सा उपभोग करने वाले राज्य को दे दिया जाता है इसीलिए GST को गंतव्य आधारिक कर भी कहा जाता है।
  • भारत में आयातों पर भी IGST लगाया जाता है।


भारत में GST की निम्नलिखित दरें है जैसे-

  • 0%
  • 5%
  • 12%
  • 18%
  • 28%

  • भारत में अपवाद स्वरूप सोना पर 3%, कीमती पत्थर पर 0.25% तथा GST कंपोजिशन स्कीम पर 1 से 3% तक GST लगता है।


GST में Input Tax Credit की व्यवस्था-

  • GST में Input Tax Credit की व्यवस्था होती है जिसके अनुसार कर देयता = संग्रहित कर - चुकाया गया कर (कर देयता = संग्रहित कर - चुकाया गया कर)
  • GST में Input Tax Credit की व्यवस्था से Cascading Effect दूर होता है।
  • जब कर (Tax) के ऊपर कर (Tax) लगाया जाता है तो उसे Cascading Effect कहते है।


GSTIN (GST Number/ GSTIN Number)-

  • वे व्यावसायिक संस्थान जिनका वार्षिक टर्नओवर 40 लाख से अधिक है तो उन व्यावसायिक संस्थानों को GST में पंजीकरण (Registration) करना अनिवार्य है।
  • व्यावसायिक संस्थानों के द्वारा GST में पंजीकरण करने के बाद व्यावसायिक संस्थानों को 15 अंकों को GST पहचान नम्बर (GSTIN) आवंटित किया जाता है।
  • GST में पंजीकरण के लिए उत्तरी-पूर्वी राज्यों के लिए वार्षिक टर्नओवर की सीमा 20 लाख है अर्थात् उत्तर-पूर्वी राज्यों में व्यावसायिक संस्थानों का वार्षिक टर्नओवर 20 लाख से अधिक है तो उन व्यावसायिक संस्थानों को GST में पंजीकरण करना अनिवार्य है।


GST से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय-

  • GST से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय GST परिषद (GST Council) के द्वारा लिये जाते है।


GST का मुआवजा-

  • GST को लागू करते समय राज्य सरकारों को यह डर था की उन्हें राजस्व में नुकसान हो सकता है इसीलिए केंद्र सरकार के द्वारा राज्य सरकारों को आश्वासित किया की GST को लागू करने से जितना भी राजस्व में नुकसान होगा उसकी भरपाई केंद्र सरकार के द्वारा कर दी जायेगी अर्थात् मुआवजा दिया जायेगा।
  • केंद्र सरकार के द्वारा यह मुआवजा 5 वर्ष तक ही दिया जाएगा अर्थात् केंद्र सरकार के द्वारा यह मुआवजा 1 जुलाई 2017 से लेकर 30 जून 2022 तक ही दिया जायेगा।
  • GST के मुआवजे के लिए राजस्व की गणना के लिए 2015-16 को आधार वर्ष माना गया तथा प्रत्येक वर्ष 14% की वृद्धि को स्वीकार किया गया।
  • GST के मुआवजे के भुगतान के लिए केंद्र सरकार के द्वारा Demerit Goods पर GST क्षतिपूर्ति उपकर (GST Compensation Cess) लगाया गया है।
  • कोरोना काल में GST मुआवजे को लेकर केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के मध्य विवाद हुआ था।


GST E-Way Bill-

  • GST E-Way Bill को अनिवार्य कर दिया गया है।
  • यदि 50,000 रुपये से अधिक की वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है तब उस वस्तु पर GST E-Way Bill Generate करना अनिवार्य है।
  • राजस्थान राज्य में GST E-Way Bill बनाने की सीमा 2 लाख रुपये है।


GST के लाभ (Profit of GST)-

  • GST के लाभ को तीन भागों में विभाजित किया गया है। जैसे-

  1. व्यवसाय के लिए GST के लाभ
  2. सरकार के लिए GST के लाभ
  3. उपभोक्ता के लिए GST के लाभ


1. व्यवसाय के लिए GST के लाभ-

  • भारत में GST लागू होने से करों की संख्या कम हो गयी है जिसके कारण कर अनुपालन आसान हो गया है।
  • भारत में GST लागू होने से कर अनुपाल की लागत में कमी आयी है।
  • भारत में GST लागू होने से व्यापार करने की सुगमता में वृद्धि हुई है।
  • व्यापार करने की सुगमता सूचकांक में भारत की रैंकिग में सुधार हुआ है।
  • व्यापार सुगमता सूचकांक (Ease of doing Business Index) विश्व बैंक के द्वारा जारी किया जाता है।
  • भारत में one nation one tax (GST) के बाद पूरा भारत एक बाजार बन गया है।
  • भारत में GST लागू होने से निवेश के लिए अन्य कारकों को भी प्राथमिकता दी जा सकती है।
  • भारत में GST लागू होने से पूर्व वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना महंगा एवं अधिक समय लेने वाला था परन्तु GST लागू होने के बाद वर्तमान में वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए लागत व समय दोनों में कमी आई है।
  • भारत में GST लागू होने के बाद व्यवसायों को Input Tax Credit का लाभ मिलता है।


2. सरकार के लिए GST के लाभ-

  • भारत में GST के लागू होने से भारत का आर्थिक एकीकरण हुआ है।
  • भारत में GST लागू होने के बाद भारत सरकार के लिए कर प्रशासन या प्रबंधन आसान हो गया है।
  • भारत में GST लागू होने के बाद कर (Tax) संग्रहण की लागत में कमी आई है।
  • भारत में GST लागू होने के बाद कर राजस्व में वृद्ध हुई है।
  • भारत में GST लागू होने के बाद कर चोरी एवं भ्रष्टाचार में कमी आयी है।
  • भारत में GST लागू होने के बाद भारत की GDP में वृद्धि होती है।
  • भारत में GST लागू होने के बाद भारत में रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है।
  • भारत में GST लागू होने के कारण सरकारी आंकड़ों की सटीकता बढ़ गई है।


3. उपभोक्ता के GST के लाभ-

  • भारत में GST लागू होने के बाद Cascading Effect के दूर होने से वस्तु एवं सेवाओं की कीमतों में कमी आयी है।
  • भारत में GST लागू होने से करों में पारदर्शिता आयी है।
  • भारत में GST लागू होने के बाद GST में लेन देन के लिए बिल आवश्यक है जिसके कारण उपभोक्ता संरक्षण में वृद्धि हुई है।


भारत में GST लागू होने से आयी चुनौतियां-

  • GST में स्लैब की संख्या अधिक है।
  • GST की दरें उच्च (40%) है।
  • सभी अप्रत्यक्ष करों को GST में शामिल नहीं किया गया है जैसे- पेट्रोलियम उत्पाद, राज्य उत्पाद शुल्क आदि।
  • केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के मध्य GST मुआवजे को लेकर विवाद हुआ।


महत्वपूर्ण लिंक (Important Link)-

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