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हृदय (Heart)

हृदय (Heart)


हृदय (Heart)-

  • मनुष्य का हृदय चतुर्थ कक्षीय होता है। अर्थात् मनुष्य का हृदय चार कक्षीय होता है। जैसे- दो आलिन्द तथा दो निलय।
  • मनुष्य के हृदय में दो आलिन्द होते हैं। जैसे-
  • (1) दायाँ आलिन्द (Right Atrium)
  • (2) बायाँ आलिन्द (Left Atrium)
  • मनुष्य के हृदय में दो निलय होते हैं। जैसे-
  • (1) दायाँ निलय (Right Ventricle)
  • (2) बायाँ निलय (Left Ventricle)
  • मनुष्य में दो आलिन्द तथा दो निलय को मिलाकर चार कक्षीय हृदय होता है।
  • मनुष्य का हृदय मनुष्य के शरीर में हृदय वक्ष में दोनों फेफड़ों के बीच थोड़ी बायी ओर होता है।


आलिन्द (Atrium)-

  • मनुष्य के हृदय में 2 आलिन्द होते हैं।
  • मनुष्य के हृदय में दोनों आलिन्द हृदय के उपरी भाग (Upper Side) में स्थित होते हैं।
  • मनुष्य के हृदय का आलिन्द भाग आकार में छोटा होता है।


निलय (Ventricle)-

  • मनुष्य के हृदय में 2 निलय होते हैं।
  • मनुष्य के हृदय में दोनों निलय हृदय के निचले भाग (Lower Side) में स्थित होते हैं।
  • मनुष्य के हृदय का निलय भाग आकार में बड़ा होता है।


ऑक्सीजनित रक्त (Oxygenated Blood)-

  • ऑक्सीजनित रक्त उस रक्त को कहा जाता है जिसमें ऑक्सीजन (Oxygen- O2) की मात्रा अधिक तथा कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) की मात्रा कम होती है।
  • ऑक्सीजनित रक्त को सामान्य भाषा में शुद्ध रक्त भी कहा जाता है।
  • ऑक्सीजनित रक्त का रंग लाल (Red) होता है।


विऑक्सीजनित रक्त (Deoxygenated Blood)-

  • विऑक्सीजनित रक्त उस रक्त को कहा जाता है जिसमें ऑक्सीजन (O2) की मात्रा कम तथा कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) की मात्रा अधिक होती है।
  • विऑक्सीजनित रक्त को सामान्य भाषा में अशुद्ध रक्त भी कहा जात है।
  • विऑक्सीजनित रक्त का रंग निला (Blue) होता है।


धमनी (Artery)-

  • ऐसी रक्त नलिका जो रक्त को हृदय से दूर लेकर जाये अर्थात् ऐसी रक्त नलिका जो रक्त को हृदय से मनुष्य के शरीर के दूसरे अंगों तक लेकर जाती है उसे धमनी कहा जाता है।
  • मनुष्य के शरीर में अधिकांश धमनियों में ऑक्सीजनित रक्त पाया जाता है लेकिन फुफ्फसीय धमनी या पलमोनरी धमनी (Pulmonary Artery) में विऑक्सीजनित रक्त पाया जाता है।


शिरा (Vein)-

  • ऐसी रक्त नलिका जो रक्त को शरीर के दूसरे अंगों से हृदय की ओर लेकर आती है। उसे शिरा कहा जाता है।

  • मनुष्य के शरीर में अधिकांश शिराओं में विऑक्सीजनित रक्त पाया जाता है लेकिन फुफ्फसीय शिरा या पलमोनरी शिरा (Pulmonary Vein) में ऑक्सीजनित रक्त पाया जाता है।


हृदय की क्रिया विधि (Mechanism of Heart)-

  • मनुष्य के हृदय की दिवार तीन स्तर की बनी होती है। जैसे-
  • (1) पेरिकार्डियम (Pericardium)
  • (2) मायोकार्डियम (Myocardium)
  • (3) एंडोकार्डियम (Endocardium)


(1) पेरिकार्डियम (Pericardium)-

  • मनुष्य के हृदय की सबसे बाहरी परत को पेरिकार्डियम कहते हैं।


(2) मायोकार्डियम (Myocardium)-

  • मनुष्य के हृदय की मध्य परत को मायोकार्डियम कहते हैं।
  • मनुष्य के हृदय का मायोकार्डियम परत हृदय के पम्पिंग (Pumping) के लिए आवश्यक होती है। अर्थात् मनुष्य के हृदय में मायोकार्डियम परत हृदय में पम्पिंग के दौरान सिकुड़न (Contraction) तथा आराम (Relaxation) करती है।


(3) एंडोकार्डियम (Endocardium)-

  • मनुष्य के हृदय की सबसे आंतरिक परत को एंडोकार्डियम कहते हैं।


कोरोनरी धमनी (Coronary Artery)-

  • मनुष्य के शरीर में हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं को कोरोनरी धमनियाँ कहते हैं।

एनजाइना (Angina)-

  • मनुष्य के शरीर में किसी भी कारण से यदि कोरोनरी धमनी में आंशिक अवरोध आता है तो मनुष्य की छाती में दर्द (Chest Pain) शुरू हो जाता है।
  • कोरोनरी धमनी में आंशिक अवरोध आने के कारण मनुष्य की छाती में होने वाले दर्द को एनजाइना (Angina) कहते हैं।


मायोकार्डियल इंफार्क्शन (Myocardial Infarction) या हृदयघात (Heart Attack)-

  • मनुष्य के शरीर में किसी भी कारण से यदि कोरोनरी धमनी में पूर्ण अवरोध आता है तो मनुष्य का हृदय काम करना बंद कर देता है।
  • कोरोनरी धमनी में पूर्ण अवरोध आने के कारण मनुष्य का हृदय काम करना बंद कर देता है जिसे मायोकार्डियल इंफार्क्शन कहते हैं।
  • मायोकार्डियल इंफार्क्शन को ही हृदयघात (Heart Attack) कहा जाता है।

  • मनुष्य में हृदयघात (Heart Attack) का मुख्य कारण खाने में अधिक कोलेस्ट्रॉल का खाना है।
  • पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में हृदयघात (Heart Attack) कम आता है क्योंकि पुरुषों तथा महिलाओं के द्वारा खाने में कोलेस्ट्रॉल खाया जाता है। पुरुषों के द्वारा खाने में खाये गये कोलेस्ट्रॉल का उपयोग पुरुषों के शरीर में कम हो पाता है तो यह कोलेस्ट्रॉल कोरोनरी धमनी में जमने लगता है और हृदयघात की स्थित अधिक हो जाती है तथा महिलाओं में खाने के द्वारा खाये गये कोलेस्ट्रॉल का उपयोग एस्ट्रोजन हार्मोन के निर्माण में खर्च हो जाता है। इसलिए पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में हृदयघात (Heart Attack) कम आता है।
  • महिलाओं में अंडाशय (Ovary) से एक हार्मोन का निर्माण होता है जिस एस्ट्रोजन हार्मोन कहते हैं।
  • महिलाओं में अंडाशय में एस्ट्रोजन हार्मोन के निर्माण के लिए कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) आवश्यक होता है।
  • महिलाओं के द्वारा खाने में खाये गये कोलेस्ट्रॉल का अधिकतम भाग एस्ट्रोजन हार्मोन के निर्माण में खर्च हो जाता है इसलिए महिलाओं में कोरोनरी धमनी में कोलेस्ट्रॉल कम जमता है।
  • पुरुषों में एस्ट्रोजन हार्मोन का निर्माण नहीं करना पड़ता है इसलिए पुरुषों के द्वारा खाने में खाया गया कोलेस्ट्रॉल खर्च नहीं हो पाता है और यही कोलेस्ट्रॉल कोरोनरी धमनी में जमने लगता है।
  • महिलाओं में लगभग 45 की आयु पार करने के बाद या मासिक चक्र बंद होने के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन नहीं बनता है।
  • यदि महिलाएं लगभग 45 की आयु या मासिक चक्र खत्म होने के बाद कोलेस्ट्रॉल अधिक खाती है तो उनके द्वारा खाया गया कोलेस्ट्रॉल एस्ट्रोजन हार्मोन में खर्च नहीं होता है तो इस आयु में महिलाओं में भी कोलेस्ट्रॉल अधिक खाया जाता है तो वह अधिक मात्रा में कोरोनरी धमनी में जमा होने लगता है जिसके कारण हृदयघात बढ़ जाता है।


मनुष्य में परिसंचरण (Circulation in Human)-

  • मनुष्य के शरीर में दो प्रकार के परिसंचरण पाये जाते हैं। जैसे-
  • (1) फुफ्फुसीय परिसंचरण (Pulmonary Circulation)
  • (2) दैहिक परिसंचरण (Systemic Circulation)


(1) फुफ्फुसीय परिसंचरण (Pulmonary Circulation)-

  • मनुष्य में फुफ्फुसीय परिसंचरण में रक्त हृदय और फेफड़ों के बीच गति कहता है।
  • फुफ्फुसीय परिसंचरण में हृदय विऑक्सीजनित रक्त को फेफड़ों को दे देता है।
  • फेफड़ों में विऑक्सीजनित रक्त ऑक्सीजन ग्रहण करके ऑक्सीजनित रक्त में बदल जाता है।
  • विऑक्सीजनित रक्त ऑक्सीजनित रक्त में बदलने के बाद ऑक्सीजनित रक्त फेफड़ों से हृदय की ओर जाता है।


(2) दैहिक परिसंचरण (Systemic Circulation)-

  • दैहिक परिसंचरण में रक्त हृदय और शरीर के अन्य अंगों के बीच गति करता है।

  • दैहिक परिसंचरण में रक्त हृदय से निकलकर शरीर के सभी अंगों में जाता है और रक्त में उपस्थित ऑक्सीजन शरीर के सभी अंगों की कोशिकाओं में प्रवेश कर जाती है और ऊर्जा का निर्माण करती है और शरीर के सभी अंगों को ऑक्सीजन देने के बाद रक्त विऑक्सीजनित हो जाता है और यह विऑक्सीजनित रक्त शरीर के सभी अंगों से निकलकर हृदय में वापस चला जाता है।


हृदय धड़कन या हृदय चक्र (Heart Beat)-

  • रक्त का एक बार फेफड़ों से निकलकर पुनः फेफड़ों में जाना हृदय चक्र कहलाता है।
  • हृदय चक्र को हृदय धड़कन भी कहते हैं।

  • मनुष्य के शरीर में एक हृदय चक्र में रक्त दो बार हृदय से गुजरता है। अर्थात् दोहरा परिसंचरण होता है।

  • मनुष्य के शरीर में एक हृदय चक्र में 0.8 Second का समय लगता है।


हृदय दर (Heart Rate)-

  • मनुष्य के शरीर में एक मिनट में होने वाले हृदय चक्रों (Cardiac Cycle) की संख्या को ही हृदय दर कहते हैं।

  • सामान्यतः मनुष्य के हृदय की दर 72 हृदय चक्र प्रति मिनट (72 Cardiac Cycle/Minute) होती है।


टेकीकार्डिया (Tachycardia)-

  • जब मनुष्य के शरीर में हृदय दर बढ़ जाती है तो उस अवस्था को टेकीकार्डिया कहते हैं। अर्थात् जब मनुष्य के हृदय की दर 80 हृदय चक्र प्रति मिनट (80 Cardiac Cycle/Minute) से अधिक चली जाती है तो उसे टेकीकार्डिया कहा जाता है।


ब्रेडीकार्डिया (Bradycardia)-

  • जब मनुष्य के शरीर में हृदय दर घट जाती है तो उस अवस्था को ब्रेडीकार्डिया कहते हैं। अर्थात् जब मनुष्य के हृदय की दर 60 हृदय चक्र प्रति मिनट (60 Cardiac Cycle/Minute) से कम हो जाती है तो उसे ब्रेडीकार्डिया कहा जाता है।


मनुष्य में दौहरा परिसंचरण-

  • मनुष्य में एक हृदय चक्र के दौरान रक्त दो बार हृदय से गुजरता है इसलिए मनुष्य में दौहरा परिसंचरण पाया जाता है।
  • दौहरे परिसंचरण के कारण मनुष्य में फुफ्फुसीय परिसंचरण (Pulmonary Circulation) और दैहिक परिसंचरण (Systemic Circulation) पाया जाता है।
  • मनुष्य में दौहरा परिसंचरण पाये जाने के कारण ही मनुष्य के शरीर में ऑक्सीजनित रक्त विऑक्सीजनित रक्त से पूरी तरह से अलग रहता है। इसलिए मनुष्य के पूरे शरीर के अंगों में केवल ऑक्सीजनित रक्त ही जाता है इसलिए मनुष्य के शरीर में ऊर्जा का उत्पादन अधिक होता है। और इसलिए मनुष्य अधिक सक्रिय, अधिक ऊर्जावान और समतापी होते हैं।


हृदय में रक्त की गति का क्रम-

  • मनुष्य के हृदय में रक्त की गति का क्रम निम्नलिखित है।
  • मनुष्य के फेफड़ों (Lungs) से रक्त निकलकर फुफ्फसीय शिरा (Pulmonary Vein) के माध्यम से हृदय के बायें आलिन्द (Left Atrium) में आ जाता है।
  • रक्त हृदय के बायें आलिन्द (Left Atrium) से निकलकर द्विवलन कपाट (Bicuspid Valve) के माध्यम से हृदय के बायें निलय (Left Ventricle) में आ जाता है।
  • रक्त हृदय के बायें निलय (Left Ventricle) से निकलकर महाधमनी (Aorta) के माध्यम से शरीर के सभी अंगों (Body Organ) में आ जाता है।
  • रक्त शरीर के सभी अंगों से गुजरने के बाद महाशिरा (Vena Cava) के माध्यम से हृदय के दायें आलिन्द (Right Atrium) में आ जाता है।
  • रक्त दायें आलिन्द (Right Atrium) से निकलकर त्रिवलन कपाट (Tricuspid Valve) के माध्यम से हृदय के दायें निलय (Right Ventricle) में आ जाता है।
  • रक्त दायें निलय (Right Ventricle) से निकलकर फुफ्फसीय धमनी (Pulmonary Artery) के माध्यम से मनुष्य के फेफड़ों (Lungs) में आ जाता है।


हृदय के प्रकार (Types of Heart)-

  • हृदय के प्रकार के आधार पर जानवरों को 5 भागों में विभाजित किया गया है जैसे-
  • (1) पिसीज (Pisces)
  • (2) उभयचर (Amphibia)
  • (3) सरीसृप (Reptiles)
  • (4) पक्षी वर्ग या एविस (Aves)
  • (5) स्तनधारी (Mammal)


(1) पिसीज (Pisces)-

  • पिसीज वर्ग के जीव में द्विकक्षीय हृदय (Bilobed Heart) पाया जाता है।
  • पिसीज वर्ग के जीव में एक आलिन्द (Atrium) तथा एक निलय (Ventricle) होता है।
  • पिसीज वर्ग के जीव विषमतापी (Heterothermic) होते हैं।
  • विषमतापी जीवों को ठंडे खून वाला (Cold Blooded) भी कहा जाता है।
  • पिसीज वर्ग के जीव जैसे- मछली (Fish)


(2) उभयचर (Amphibia)-

  • उभयचर वर्ग के जीवों में त्रिकक्षीय हृदय (Trilobed Heart) पाया जाता है।
  • उभयचर वर्ग के जीवों में दो आलिन्द (Atrium) तथा एक निलय (Ventricle) होता है।
  • उभयचर वर्ग के जीव विषमतापी (Heterothermic) होते हैं।
  • विषमतापी जीवों को ठंडे खून वाला (Cold Blooded) भी कहा जाता है।
  • उभयचर वर्ग के जीव जैसे- मेंढक (Frog)


(3) सरीसृप (Reptiles)-

  • सरीसृप वर्ग के जीवों में त्रिकक्षीय हृदय (Trilobed Heart) पाया जाता है।
  • सरीसृप वर्ग के जीवों में दो आलिन्द (Atrium) तथा एक निलय (Ventricle) होता है।
  • सरीसृप वर्ग के जीव विषमतापी (Heterothermic) होते हैं।
  • विषमतापी जीवों को ठंडे खून वाला (Cold Blooded) भी कहा जाता है।
  • सरीसृप वर्ग के जीव जैसे- साँप (Snake)


(4) पक्षी वर्ग या एविस (Aves)-

  • पक्षी वर्ग (एविस) के जीवों में चतुर्कक्षीय हृदय (Tetrolobed Heart) पाया जाता है।
  • पक्षी वर्ग के जीवों में दो आलिन्द (Atrium) तथा दो निलय (Ventricle) होता है।
  • पक्षी वर्ग के जीव समतापी (Isothermal) होते हैं।
  • समतापी जीवों को गर्म खून वाला (Warm Blooded) भी कहा जाता है।
  • पक्षी वर्ग के जीव जैसे- पक्षी (Birds), चिड़िया


(5) स्तनधारी (Mammal)-

  • स्तनधारी वर्ग (एविस) के जीवों में चतुर्कक्षीय हृदय (Tetrolobed Heart) पाया जाता है।
  • स्तनधारी वर्ग के जीवों में दो आलिन्द (Atrium) तथा दो निलय (Ventricle) होता है।
  • स्तनधारी वर्ग के जीव समतापी (Isothermal) होते हैं।
  • समतापी जीवों को गर्म खून वाला (Warm Blooded) भी कहा जाता है।
  • स्तनधारी वर्ग के जीव जैसे- मनुष्य (Human)


हृदय कपाट (Heart Valve)-

  • मनुष्य के हृदय में चार कपाट पाये जाते हैं। जैसे-
  • (1) द्विकपर्दी कपाट या द्विवलन कपाट (Bicuspid Valve)
  • (2) त्रिकपर्दी कपाट या त्रिवलन कपाट (Tricuspid Valve)
  • (3) अर्धचंद्राकार कपाट (Semilunar Valve)
  • (4) अर्धचंद्राकार कपाट (Semilunar Valve)


(1) द्विकपर्दी कपाट या द्विवलन कपाट (Bicuspid Valve)-

  • मनुष्य के हृदय में द्विकपर्दी कपाट या द्विवलन कपाट हृदय के दायें आलिन्द तथा दायें निलय के मध्य स्थित होता है।


(2) त्रिकपर्दी कपाट या त्रिवलन कपाट (Tricuspid Valve)-

  • मनुष्य के हृदय में त्रिकपर्दी कपाट या त्रिवलन कपाट हृदय के बायें आलिन्द तथआ बायें निलय के मध्य स्थित होता है।


(3) अर्धचंद्राकार कपाट (Semilunar Valve)-

  • मनुष्य के हृदय में अर्धचंद्राकार कपाट महाधमनी (Aorta) के सिरे पर स्थित होता है।


(4) अर्धचंद्राकार कपाट (Semilunar Valve)-

  • मनुष्य के हृदय में अर्धचंद्राकार कपाट फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary Vein) के सिरे पर स्थित होता है।


हृदय की ध्वनि (Heart Sound)-

  • मनुष्य के हृदय में दो प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है। जैसे-
  • (1) प्रथम हृदय ध्वनि (First Heart Sound)
  • (2) द्वितीय हृदय ध्वनि (Second Heart Sound)


(1) प्रथम हृदय ध्वनि (First Heart Sound)-

  • मनुष्य के हृदय में प्रथम हृदय ध्वनि हृदय में द्विवलन कपाट तथा त्रिवलन कपाट के बंद होने के कारण उत्पन्न होती है।
  • हृदय में द्विवलन  कपाट तथा त्रिवलन कपाट बंद होने से L.....U......BB (LUBB) की ध्वनी उत्पन्न होती है।
  • मनुष्य के हृदय में द्विवलन कपाट तथा त्रिवलन कपाट के बंद होने के कारण उत्पन्न हुई ध्वनि में 0.3 सेकंड (Second) का समय लगता है।

  • जब मनुष्य के हृदय के निलय में संकुचन शुरू होता है तब द्विवलन कपाट तथा त्रिवलन कपाट बंद होते हैं।


(2) द्वितीय हृदय ध्वनि (Second Heart Sound)-

  • मनुष्य के हृदय में द्वितीय हृदय ध्वनि हृदय में दोनों अर्द्धचन्द्राकार कपाट के बंद होने के कारण उत्पन्न होती है।
  • हृदय में दोनों अर्द्धचन्द्राकार कपाट बंद होने से DUBB की ध्वनी उत्पन्न होती है।
  • मनुष्य के हृदय में दोनों अर्द्धचन्द्राकार कपाट बंद होने के कारण उत्पन्न हुई ध्वनि में 0.2 सेकंड (Second) समय लगता है।
  • मनुष्य के हृदय में दोनों अर्द्धचन्द्राकार कपाट एक साथ बंद होते है तथा एक साथ ही खुलते हैं।


पेसमेकर (S.A. Node / Pacemaker)-

  • मनुष्य के हृदय में दायें आलिन्द के दायीं तरफ ऊपर के ओर एक विशेष मांसपेशी पायी जाती है जिसे S.A. Node कहते हैं।
  • S.A. Node मनुष्य के हृदय की गतियों का प्रारम्भन करता है। इसलिए S.A. Node को मनुष्य के हृदय का गतिनिर्धारक (Pacemaker) भी कहते हैं।
  • मनुष्य के हृदय में पायी जाने वाली S.A. Node नामक मांसपेशी अन्य मांसपेशियों से आकार में बड़ी होती है।
  • मनुष्य के हृदय में पायी जाने वाली S.A. Node नामक मांसपेशी अन्य मांसपेशियों की तरफ संकुचन (Contraction) का कार्य नहीं करती है यह मांसपेशी केवल हृदय की गतियों का प्रारम्भन करने का आदेश देती है।


पेशीय अंग (Muscular Organ)-

  • मनुष्य का हृदय एक पेशीय अंग (Muscular Organ) होती है।


मायोजेनिक हृदय (Myogenic Heart)-

  • मनुष्य के शरीर में पाया जाने वाला हृदय मायोजेनिक हृदय (Myogenic Heart) होता है।

  • मनुष्य के शरीर में पाया जाने वाला हृदय न्यूरोजेनिक हृदय (Neurogenic Heart) नहीं होता है।


हृदय का संचालन-

  • मनुष्य के शरीर में पाये जाने वाले हृदय की गतियों का प्रारम्भन करने काम S.A. Node नामक मांसपेशी करती है। लेकिन हृदय की गति का संचालन मनुष्य के मस्तिष्क से हृदय में आने वाली तंत्रिकाओं के द्वारा किया जाता है अर्थात् हृदय की गतियों का प्रारम्भन S.A. Node नामक मांसपेशी करती है लेकिन हृदय गति का संचालन मनुष्य के मस्तिष्क के द्वारा ही किया जाता है।

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