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विधेयक (Bill)

अनुच्छेद 107-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 107 में संसद में विधेयक पारित करने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।
  • साधारण विधेयक 2 प्रकार के होते हैं। जैसे-
  • (I) सरकारी विधेयक (Government Bill)
  • (II) निजी विधेयक (Private Bill)


(I) सरकारी विधेयक (Government Bill)-

  • जब कोई विधेयक मंत्री के द्वारा पेश किया जाता है तो वह विधेयक सरकारी विधेयक कहलाता है।


(II) निजी विधेयक (Private Bill)-

  • जब कोई विधेयक गैर-मंत्री के द्वारा पेश किया जाता है तो वह विधेयक निजी विधेयक कहलाता है। अर्थात् ऐसा सांसद जो मंत्री नहीं हो उसके द्वारा पेश गया विधेयक निजी विधेयक कहलता है।


विधेयक पारित करने की प्रक्रिया-

  • संसद में विधेयक को तीन चरणों में पारित किया जाता है। जैसे-
  • 1. प्रथम वाचन (First Reading)
  • 2. द्वितीय वाचन (Second Reading)
  • 3. तृतीय वाचन (Third Reading)


1. प्रथम वाचन (First Reading)-

  • विधेयक के प्रथम वाचन में विधेयक का सामान्य परिचय दिया जाता है।
  • विधेयक के प्रथम वाचन के समय विधेयक पर चर्चा नहीं होती है और ना ही संशोधन होता है।
  • यदि विधेयक गजट में प्रकाशित हो चुका है तो उसे ही प्रथम पाठन मान लिया जाता है।
  • गजट (Gazette) एक सरकारी समाचार पत्र है।


2. द्वितीय वाचन (Second Reading)-

  • विधेयक के द्वितीय वाचन में तीन उप-चरण होते हैं। जैसे-
  • (I) सामान्य चर्चा (General Discussion)
  • (II) समिति स्तर (Committee Stage)
  • (III) विचार विमर्श स्तर (Consideration Stage)


(I) सामान्य चर्चा (General Discussion)-

  • सामान्य चर्चा में विधेयक पर तत्काल चर्चा की जाती है या चर्चा के लिए कोई अन्य दिन निर्धारित किया जाता है।
  • सामान्य चर्चा के दौरान विधेयक प्रवर समिति (Select Committee) को सौंपा जाता है।
  • विधेयक संयुक्त समिति को सौंपा जाता है।
  • जनता की राय जानने के लिए समाचार पत्रों में प्रकाशित करवाया जाता है।


(II) समिति स्तर (Committee Stage)-

  • समिति स्तर में विधेयक को खण्डों में विभाजित किया जाता है।

  • समिति प्रत्येक खण्ड पर विस्तार से चर्चा करती है तथा यथावश्यक संशोधन भी करती है।


(III) विचार विमर्श स्तर (Consideration Stage)-

  • विचार विमर्श स्तर में सदन प्रत्येक खण्ड पर विस्तार से चर्चा करता है।
  • इस दौरान सदन यथावश्यक संशोधन भी करता है।
  • प्रत्येक भाग को सदन मतदान के द्वारा पारित करता है।


3. तृतीय वाचन (Third Reading)-

  • विधेयक के तृतीय वाचन में समग्र विधेयक पर विधेयक के पक्ष-विपक्ष में चर्चा की जाती है।
  • तृतीय वाचन में विधेयक में संशोधन नहीं किया जा सकता है। लेकिन व्याकरण की अशुद्धियां दूर की जा सकती है।
  • तृतीय वाचन में मतदान कर विधेयक को पारित किया जाता है।
  • संसद के पहले सदन में पारित होने के बाद विधेयक को दूसरे सदन में भेजा जाता है।


विधेयक संबंधि अन्य तथ्य-

  • संसद के दूसरे सदन में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है।
  • संसद का दूसरा सदन अधिकतम 6 माह तक किसी विधेयक को रोक सकता है।
  • यदि दूसरा सदन विधेयक को संशोधित रूप में पारित करता है तो विधेयक को पुनः पहले सदन में भेजा जाता है।
  • संसद के दोनों सदनों के द्वारा विधेयक एक ही रूप में पारित होना चाहिए।
  • दोनों सदनों में पारित होने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है।


अनुच्छेद 108-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 108 में संयुक्त बैठक का उल्लेख किया गया है।
  • यदि संसद का एक सदन विधेयक को पारित कर दे तथा दूसरा सदन विधेयक को पारित ना करे अर्थात् संसद के दोनों सदनों में टकराव की स्थिति हो तो राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकता है।
  • संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।
  • यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित है तो संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा उपाध्यक्ष करता है।
  • यदि लोकसभा उपाध्यक्ष अनुपस्थित है तो संयुक्त बैठक की अध्यक्षता राज्यसभा उपसभापति करता है।
  • यदि राज्यसभा उपसभापति अनुपस्थित है तो सदस्य अपने में से ही किसी को अध्यक्षता के लिए चुनते हैं।
  • संयुक्त बैठक में लोकसभा के नियमों व प्रक्रियाओं का प्रयोग किया जाता है।
  • केवल साधारण विधेयक व वित्त विधेयक के मामले में ही संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है।
  • धन विधेयक तथा संविधान संशोधन विधेयक के संबंध में संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है।


भारत में अब तक कुल तीन बार ही संयुक्त बैठक बुलाई गई है। जैसे-

  • (I) पहली संयुक्त बैठक
  • (II) दूसरी संयुक्त बैठक
  • (III) तीसरी संयुक्त बैठक


(I) पहली संयुक्त बैठक-

  • भारत में पहली संयुक्त बैठक सन् 1962 में बुलाई गई थी।

  • पहली संयुक्त बैठक दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 के लिए बुलाई गई थी।


(II) दूसरी संयुक्त बैठक-

  • भारत में दूसरी संयुक्त बैठक सन् 1978 में बुलाई गई थी।

  • दूसरी संयुक्त बैठक बैंक सेवा आयोग (समाप्ति) अधिनियम 1977 के लिए बुलाई गई थी।


(III) तीसरी संयुक्त बैठक-

  • भारत में तीसरी संयुक्त बैठक सन् 2002 में बुलाई गई थी।

  • तीसरी संयुक्त बैठक आतंकवाद निवारक अधिनियम 2002 के लिए बुलाई गई थी।


अनुच्छेद 109-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 109 में धन विधेयक की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। जैसे-
  • प्रस्ताव या विधेयक पेश करने के संदर्भ में-
  • (I) धन विधेयक राष्ट्रपति की पूर्वानुमति से केवल लोकसभा में रखा जा सकता है।
  • (II) धन विधेयक केवल सरकारी सदस्य विधेयक हो सकता है।
  • लोकसभा के संदर्भ में-
  • (I) लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा यह तय किया जाएगा की कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं तथा लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय ही अंतिम होता है।
  • (II) लोकसभा में धन विधेयक साधारण बहुमत से पारीत होना चाहिए।
  • राज्यसभा के संदर्भ में-
  • (I) राज्यसभा धन विधेयक को अधिकतम 14 दिन तक रख सकती है।
  • (II) राज्यसभा धन विधेयक पर केवल चर्चा कर सकती है संशोधन या मतदान नहीं कर सकती है। लेकिन राज्यसभा धन विधेयक में संशोधन का सुझाव दे सकती है।
  • राष्ट्रपति के संदर्भ में-
  • (I) धन विधेयक पर राष्ट्रपति को केवल दो शक्तियां प्राप्त है। जैसे- धन विधेयक पर सहमति देना तथा धन विधेयक पर सहमति नहीं देना।
  • (II) राष्ट्रपति धन विधेयक को पुनःविचार के लिए नहीं लोटा सकता है।

  • धन विधेयक पर राष्ट्रपति के द्वारा संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जा सकती है।


अनुच्छेद 110-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 110 में धन विधेयक की परिभाषा का उल्लेख किया गया है। जैसे-
  • (I) किसी कर का अधिरोपण, उत्सादन, परिवर्तन, परिहार या विनियमन।
  • (II) ऋण- केन्द्र सरकार के द्वारा उधार लिए गए धन का विनियमन।

  • (III) भारत की संचित निधि या आकस्मिक निधि की अभिरक्षा या ऐसी किसी निधि में धन जमा करना या उसमें से धन निकालना।
  • (IV) भारत की संचित निधि से धन का विनियोग।
  • (V) भारत की संचित निधि पर किसी व्यय को भारति घोषित करना या इस प्रकार के किसी व्यय की राशि में वृद्धि।
  • (VI) भारत की संचित निधि या लोक लेखा में किसी प्रकार के धन की प्राप्ति या अभिरक्षा या व्यय अथवा इनका केन्द्र या राज्य की निधियों का लेखा परीक्षण।
  • (VII) उपर्युक्त से संबंधित अन्य कोई प्रावधान जैसे-
  • यदि किसी विधेयक में उपर्युक्त में से कोई प्रावधान हो तथा इसमें अन्य कोई प्रावधान न हो तो इसे धन विधेयक कहते हैं।


अनुच्छेद 111-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 111 में विधेयक पर राष्ट्रपति की सहमति का उल्लेख किया गया है।
  • कोई विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है तो राष्ट्रपति के पास तीन विकल्प होते हैं। जैसे-
  • (I) विधेयक पर सहमति देना।
  • (II) विधेयक पर सहमति रोकना।
  • (III) विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेजना (धन विधेयक के अलावा)


वित्त विधेयक (Finance Bill)-

  • वित्त विधेयक दो प्रकार का होता है। जैसे-
  • 1. अनुच्छेद 117 (1) का वित्त विधेयक
  • 2. अनुच्छेद 117 (3) का वित्त विधेयक


1. अनुच्छेद 117 (1) का वित्त विधेयक-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 117 (1) के अनुसार यदि किसी विधेयक में अनुच्छेद 110 के प्रावधानों के साथ-साथ अन्य प्रावधान भी हो तो वह वित्त विधेयक कहलाता है।


अनुच्छेद 117 (1)  के वित्त विधेयक की प्रक्रिया-

  • प्रस्ताव या विधेयक पेश करने के संदर्भ में-
  • (I) वित्त विधेयक केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
  • (II) वित्त विधेयक सरकारी सदस्य विधेयक होना चाहिए।
  • (III) वित्त विधेयक पर राष्ट्रपति की पूर्वानुमति आवश्यक होती है।
  • लोकसभा के संदर्भ में-
  • (I) कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं इसका निर्धारण लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा किया जाएगा।
  • (II) यदि लोकसभा अध्यक्ष किसी धन विधेयक को धन विधेयक नहीं माने तो यह वित्त विधेयक माना जायेगा।
  • (III) वित्त विधेयक की स्थिति में यह एक सामान्य विधेयक की तरह ही व्यवहार करेगा। अर्थात् राज्यसभा, राष्ट्रपति तथा संयुक्त बैठक की शक्तियां सामान्य विधेयक के समान होगी।


2. अनुच्छेद 117 (3) का वित्त विधेयक-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 117 (3) के अनुसार यदि किसी विधेयक में अनुच्छेद 110 का कोई प्रावधान नहीं हो लेकिन संचित निधि से संबंधित अन्य कोई प्रावधान हो तो वह वित्त विधेयक कहलाता है।
  • अनुच्छेद 117 (3) के वित्त विधेयक को किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
  • इसे राष्ट्रपति की पूर्वानुमति की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन राष्ट्रपति की अनुशंशा के बाद सदन इस पर चर्चा कर सकता है।
  • अन्य पूरी प्रक्रिया सामान्य या साधारण विधेयक के समान ही होती है।


लोकसभा के भंग होने पर किसी विधेयक पर प्रभाव (Impact of Dissolution of Lok Sabha on any Pending Bill)-

  • यदि विधेयक लोकसभा के सम्पर्क में आया हुआ है और लोकसभा भंग हो जाती है तो वह विधेयक भी समाप्त हो जाएगा।
  • यदि कोई विधेयक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति के सम्पर्क में आया हुआ है तो वह विधेयक समाप्त नहीं होगा।
  • यदि कोई विधेयक लोकसभा में पेश किया गया है और लोकसभा में विचाराधीन है तो लोकसभा के भंग होने के साथ ही विधेयक समाप्त हो जाएगा।
  • यदि विधेयक लोकसभा से पारित हो गया है और राज्यसभा में विचाराधीन है तो लोकसभा के भंग होने के साथ विधेयक समाप्त हो जाएगा।
  • यदि कोई विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया है और उस पर अभी विचार चल रहा है तो लोकसभा के भंग होने पर विधेयक समाप्त नहीं होगा।
  • यदि विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया था और पारित कर दिया गया है किन्तु अभी लोकसभा में नहीं भेजा गया है तो लोकसभा के भंग होने पर विधेयक समाप्त नहीं होगा।
  • राज्यसभा के द्वारा पारित विधेयक यदि लोकसभा में विचाराधीन है तो लोकसभा के भंग होने पर विधेयक समाप्त हो जाएगा।
  • यदि विधेयक राष्ट्रपति के पास विचाराधीन है या पुनर्विचार के लिए वापस लौटाया गया है या विधेयक पर संयुक्त बैठक बुलाई जा चुकी है तो विधेयक समाप्त नहीं होगा।
  • यदि विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है तथा राज्यसभा में विचाराधीन है तो लोकसभा के सत्रावसान पर विधेयक समाप्त नहीं होगा।

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