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बजट- वार्षिक वित्तीय विवरण (Budget- Annual Financial Statement)

वार्षिक वित्तीय विवरण या बजट (Annual Financial Statement- Budget)-

  • वार्षिक वित्तीय विवरण के लिए सामान्यतः बजट शब्द का उपयोग किया जाता है।
  • भारत के संविधान में बजट शब्द का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। बजट के स्थान पर संविधान में वार्षिक वित्तीय विवरण शब्द का उपयोग किया गया है।
  • वित्त मंत्री राष्ट्रपति की ओर से बजट पेश करता है।
  • बजट पेश करने के बाद बजट 24 विभागीय समितियों को सौंप दिया जाता है।
  • 24 विभागीय समितियों को सौंपने के बाद अनुदान की माँगे पेश की जाती है।
  • माँगे पेश करने के बाद विपक्ष कटौती प्रस्ताव लाता है।
  • कटौती प्रस्ताव के बाद अनुदान की माँगे पारित कर दी जाती है।
  • अनुदान की माँगे पारित होने के बाद विनियोग विधेयक पेश किया जाता है।
  • विनियोग विधेयक दो भागों में पेश किया जाता है। जैसे-
  • (I) व्यय जो संचित निधि पर भारित होते हैं।- लोकसभा इस पर केवल चर्चा कर सकती है, मतदान नहीं कर सकती है।
  • (II) व्यय जो संचित निधि पर भारित नहीं होते हैं।- लोकसभा इस पर चर्चा करती है तथा मतदान के द्वारा पारित भी करती है।
  • बजट की सभी प्रक्रियाएं लोकसभा में ही होती है।


कटौती प्रस्ताव (Cut Motion)-

  • कटौती प्रस्ताव केवल लोकसभा में पेश किए जाते हैं।
  • कटौती प्रस्तवा के कारण बजट पर विस्तार से चर्चा हो जाती है।
  • यदि कटौती प्रस्ताव पारित हो जाता है तो सरकार को त्यागपत्र देना होता है लेकिन काटौती प्रस्ताव पारित नहीं होती है। क्योंकि लोकसभा में मंत्रिपरिषद का बहुमत होता है।
  • कटौती प्रस्ताव तीन प्रकार का होता है। जैसे-
  • (I) नीतिगत कटौती प्रस्ताव (Policy Cut Motion)

  • (II) मितव्ययता कटौती प्रस्ताव (Economy Cut Motion)
  • (III) सांकेतिक कटौती प्रस्ताव (Token Cut Motion)


(I) नीतिगत कटौती प्रस्ताव (Policy Cut Motion)-

  • नीतिगत कटौती प्रस्ताव सरकार के द्वारा माँग की गई सम्पूर्ण नीति के प्रति असहमति को दर्शाता है।
  • नीतिगत कटौती प्रस्ताव में अनुदान की माँग को कम करके 1 रूपये कर दी जाती है।
  • नीतिगत कटौती प्रस्ताव में सदस्य वैकल्पिक नीति भी पेश कर सकते हैं।


(II) मितव्ययता कटौती प्रस्ताव (Economy Cut Motion)-

  • मितव्ययता कटौती प्रस्ताव में बजट के फजूलखर्चों को उजागर किया जाता है तथा मितव्ययता पर बल दिया जाता है।
  • मितव्ययता कटौती प्रस्ताव में कटौती की राशि निश्चित नहीं है।
  • मितव्ययता कटौती प्रस्ताव में कटौती की राशि का निर्धारण विपक्ष के द्वारा किया जाता है।


(III) सांकेतिक कटौती प्रस्ताव (Token Cut Motion)-

  • सांकेतिक कटौती प्रस्ताव में सरकार की किसी योजना विशेष की आलोचना की जाती है तथा उसमें 100 रूपये की कटौती का प्रस्ताव रखा जाता है।


भारत की संचित निधि पर भारित व्यय (Expenditure Charged on Consolidated Fund of India)-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 112 (3) में भारत की संचित निधि पर भारित व्यय का उल्लेख किया गया है। जैसे-
  • (I) दूसरी अनुसूची में दिए गए वेतन
  • (II) सर्वोच्च न्यायालय के सभी व्यय
  • (III) संघ लोक सेवा आयोग के सभी व्यय
  • (IV) भारत सरकार के ऋण


अनुदान की माँगे (Demand for Grants)-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 113 में अनुदान की माँगों का उल्लेख किया गया है।
  • राष्ट्रपति की पूर्वानुमति से अनुदान की माँगे रखी जाती है।


विनियोग विधेयक (Appropriation Bill)-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 114 में विनियोग विधेयक का उल्लेख किया गया है।


अनुदान के प्रकार (Types of Grant)-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 115 में तीन प्रकार के अनुदानों का उल्लेख किया गया है। जैसे-
  • (I) अनुपूरक अनुदान (Supplementary Grant)
  • (II) अतिरिक्त अनुदान (Additional Grant)
  • (III) अधिक अनुदान (Excess Grant)

  • उपर्युक्त सभी अनुदान की माँगे राष्ट्रपति की पूर्वानुमति से पेश की जाती है।


(I) अनुपूरक अनुदान (Supplementary Grant)-

  • यदि किसी सेवा के लिए बजट में आवंटित राशि अपर्याप्त हो अर्थात् उस सेवा के लिए धन कम पड़ जाए तो अधिक धन प्राप्त करने के लिए अनुपूरक अनुदान पेश किया जाता है।


(II) अतिरिक्त अनुदान (Additional Grant)-

  • यदि कोई नई सेवा जिसका उल्लेख बजट में नहीं किया गया था लेकिन उसी वित्त वर्ष में सरकार को उसके लिए धन की आवश्यकता हो तो अतिरिक्त अनुदान पेश किया जाता है।


(III) अधिक अनुदान (Excess Grant)-

  • यदि किसी वित्त वर्ष के दौरान सरकार किसी सेवा पर बजट में आवंटित की गई धनराशि से अधिक व्यय करती है तो अगले वित्त वर्ष में अधिक अनुदान पेश किया जाता है।

  • अधिक अनुदान को पेश करने के लिए राष्ट्रपति के साथ लोक लेखा समिति की पूर्वानुमति की भी आवश्यकता होती है।


अनुच्छेद 116-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 116 में निम्नलिखित का उल्लेख किया गया है।
  • (I) लेखानुदान (Vote on Account)
  • (II) प्रत्ययानुदान (Vote on Credit)
  • (III) अपवादानुदान (Exceptional Grant)


(I) लेखानुदान (Vote on Account)-

  • भारत में बजट की प्रक्रिया मई माह तक पूरी होती थी जबकि नया वित्त वर्ष 1 अप्रैल से प्रारम्भ होता है तो इस अवधि (अप्रैल+मई) के खर्चों को पूरा करने के लिए लेखानुदान पेश किया जाता है।

  • लेखानुदान पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्वानुमति की आवश्यकता होती है।


(II) प्रत्ययानुदान (Vote on Credit)-

  • यदि सरकार को आकस्मिक रूप से धन की आवश्यकता होती है तो आवश्यकताओं के कारणों का उल्लेख किए बिना प्रत्ययानुदान पेश किया जाता है।

  • प्रत्ययानुदान पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्वानुमति की आवश्यकता होती है।


(III) अपवादानुदान (Exceptional Grant)-

  • ऐसी कोई सेवा जिसका वजह में प्रावधान नहीं है और सरकार को धन की आवश्यकता होती है या सरकार की किसी अपवादस्वरूप आवश्यकता के लिए अपवादानुदान पेश किया जाता है।

  • अपवादानुदान पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्वानुमति की आवश्यकता नहीं होती है।


अंतरिम बजट (Interim Budget)-

  • यदि सरकार का कार्यकाल कम बचा है तो इस स्थिति में अंतरिम बजट पेश किया जाता है ताकि मुख्य बजट अगली निर्वाचित सरकार पेश कर सके।

  • भारत के संविधान में अंतरिम बजट का उल्लेख नहीं किया गया है।

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