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भारत की संसद (Parliament of India)

भारत की संसद (Parliament of India)-

  • भारत के संविधान के भाग-5 तथा अनुच्छेद 79 में संसद का उल्लेख किया गया है।


संसद के अंग या भाग-

  • भारत में संसद के तीन अंग या भाग होते हैं। जैसे-
  • (I) राष्ट्रपति
  • (II) राज्यसभा
  • (III) लोकसभा


अनुच्छेद 83-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 83 में संसद के सदस्यों के कार्यकाल का उल्लेख किया गया है।
  • लोकसभा का अधिकतम कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
  • राष्ट्रपति कार्यकाल से पूर्व भी लोकसभा को भंग कर सकता है।
  • राष्ट्रीय आपातकाल के समय लोकसभा के कार्यकाल को एक बार में 1 वर्ष के द्वारा कितनी भी अवधि तक बढ़ाया जा सकता है।
  • राष्ट्रीय आपातकाल समाप्त होने के बाद लोकसभा का कार्यकाल 6 माह से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है।
  • भारत में अभी तक लोकसभा के कार्यकाल को 2 बार बढ़ाया गया था। जैसे- पहली बार सन् 1976 में तथा दूसरी बार सन् 1977 में
  • राज्यसभा एक स्थायी सदन है।


अनुच्छेद 84-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 84 में सांसदों की योग्यताओं का उल्लेख किया गया है।
  • सांसद की योग्यताएं जैसे-
  • (I) वह भारत का नागरिक हो
  • (II) लोकसभा सांसद की न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए।
  • (III) राज्यसभा के सांसद की न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए।
  • (IV) भारत में किसी भी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम होना चाहिए।


विशेष- एक उमीदवार अधिकतम 2 सीटों से चुनाव लड़ सकता है। यह प्रावधान सन् 1996 के बाद किया गया था।


अनुच्छेद 85-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 85 में संसद के सत्र का उल्लेख किया गया है।
  • राष्ट्रपति संसद का सत्रा आहूत कर सकता है तथा सत्रावसान कर सकता है।
  • संसद के किसी भी सदन के 2 सत्रों के मध्य 6 माह से अधिक का अंतराल नहीं होना चाहिए।
  • भारत की संसद में वर्तमान में 3 नियमित सत्र बुलाये जाते हैं। जैसे-
  • (I) बजट सत्र (Budget Session)
  • (II) मानसून सत्र (Monsoon Session)
  • (III) शीतकालीन सत्र (Winter Session)
  • उपर्युक्त तीनों सत्रों के अलावा संसद में विशेष सत्र भी बुलाए जा सकते हैं।


अनुच्छेद 86-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 86 के अनुसार राष्ट्रपति संसद में संदेश भेज सकता है और अभिभाषण दे सकता है।


अनुच्छेद 87-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 87 में राष्ट्रपति के विशेष अभिभाषण का उल्लेख किया गया है।
  • राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को समवेत रूप से बैठाकर विशेष अभिभाषण दे सकता है।
  • लोकसभा के आम चुनावों के बाद संसद के पहले सत्र में तथा प्रति वर्ष संसद के पहले सत्र में राष्ट्रपति विशेष अभिभाषण देता है।


अनुच्छेद 88-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 88 के अनुसार मंत्री व महान्यायवादी दोनों संसद के सदनों की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं। तथा संसदीय समितियों की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं। लेकिन इस आधार उन्हें मतदान करने का अधिकार नहीं है।

  • महान्यायवादी संसदीय समिति का सदस्य बन सकता है।


सदन का नेता (Leader of The House)-

  • प्रधानमंत्री जिस सदन का सदस्य होता है वह उस सदन का नेता होता है। तथा दूसरे सदन में प्रधानमंत्री किसी मंत्री को सदन का नेता घोषित करता है।
  • वर्तमान में राज्यसभा का नेता पीयूष गोयल है।
  • वर्तमान में लोकसभा का नेता नरेन्द्र मोदी है।


विपक्ष का नेता (Leader of The Opposition)-

  • सन् 1969 में विपक्ष के नेता का पद सृजित किया गया था।
  • सन् 1977 में विपक्ष के नेता के पद को वैधानिक दर्जा दिया गया था।
  • विपक्ष के नेता को वैधानिक दर्जा देने के बाद विपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री के बराबर भत्ते व सुविधाएं दी जाती है।
  • विपक्ष दल का दर्जा प्राप्त करने के लिए सदन में कम से कम 10 प्रतिशत सीटें होना आवश्यक है।
  • सन् 2014 से लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद किसी राजनीतिक दल के पास नहीं है।


सचेतक या व्हिप (Whip)-

  • प्रत्येक राजनीतिक दल सदन में अपना एक व्हिप नियुक्त करता है।
  • व्हिप उस सदन के सदस्यों के व्यवहार को नियंत्रित करता है।
  • दल के सदस्यों को सदन में व्हिप के निर्देशों का पालन करना होता है।
  • यदि कोई सदस्य व्हिप के निर्देशों का पालन नहीं करता है और राजनीतिक दल 15 दिन में उस सदस्य को क्षमा नहीं करता है तो उस सदस्य को दल-बदल का दोषी माना जाता है।
  • गुप्त मतदान में व्हिप जारी नहीं किया जा सकता है। जैसे- राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के चुनाव में व्हिप जारी नहीं किया जा सकता है।


त्रिशंकु संसद (Hung Parliament)-

  • यदि आम चुनाव में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो इसे त्रिशंकु संसद कहते हैं।


विशेष- त्रिशंकु विधानसभा-

  • यदि विधानसभा चुनाव में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो इसे त्रिशंकु विधानसभा कहते हैं।


लेम डक सेशन (Lame Duck Session)-

  • अलगी लोकसभा के चुनाव के बाद निवर्तमान लोकसभा का जो सत्र बुलाया जाता है उसे लेम डक सेशन कहते हैं। क्योंकि वे सदस्य जो नयी लोकसभा का चुनाव हार चुके है वे लेम डक कहलाते हैं।


अनुच्छेद 98-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 98 के अनुसार राज्यसभा तथा लोकसभा के पृथक-पृथक सचिवालय होंगे।


अनुच्छेद 99-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 99 के अनुसार सासंदों को शपथ लेना आवश्यक है।

  • सासंद राष्ट्रपति के प्रतिनिधि (प्रोटेम स्पीकर) के समक्ष अनुसूची-3 के प्रारूप के अनुसार शपथ लेंगे।


अनुच्छेद 100-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 100 में गणपूर्ति या कोरम (Quorum) का उल्लेख किया गया है।

  • संविधान के प्रावधान के अनुसार गणपूर्ति के लिए 10 प्रतिशत सदस्य होने चाहिए।
  • लोकसभा व राज्यसभा के नियमानुसार गणपूर्ति के लिए ⅓ सदस्य होने चाहिए।


अनुच्छेद 101-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 101 में संसद में स्थानों का रिक्त होने का उल्लेख किया गया है।
  • यदि कोई व्यक्ति लोकसभा व राज्यसभा दोनों के लिए निर्वाचित होता है तो उस व्यक्ति को 10 दिन के भीतर अपना एक स्थान रिक्त करना होगा लेकिन यदि वह व्यक्ति दोनों में से कोई एक भी स्थान रिक्त नहीं करता है तो उस व्यक्ति की राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो जाएगी।
  • यदि कोई व्यक्ति पहले से संसद के किसी सदन का सदस्य है तथा बाद में दूसरे सदन के लिए निर्वाचित होता है तो उस व्यक्ति की पहले वाले सदन की सदस्यता स्वतः ही समाप्त हो जाएगी।
  • यदि कोई व्यक्ति लोकसभा की दो सीटों से निर्वाचित होता है तो 14 दिन के भीतर उस व्यक्ति को दोनों स्थानों में से एक स्थान रिक्त करना होगा लेकिन यदि वह व्यक्ति 14 दिन के भीतर दोनों में से कोई भी पद रिक्त नहीं करता है तो उस व्यक्ति के दोनों स्थान रिक्त हो जाएंगे।
  • यदि कोई सांसद राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के पद के लिए निर्वाचित हो जाता है तो उसका पद स्वतः ही रिक्त हो जाता है।
  • यदि कोई सांसद राज्यपाल के पद नियुक्त किया जाता है तो उसका पद स्वतः ही रिक्त हो जाता है।
  • यदि न्यायालय संसद के किसी सदस्य के चुनाव को रद्द घोषित कर दे तो उसका पद स्वतः ही रिक्त हो जाता है।
  • यदि कोई सदस्य सदन की अनुमति के बिना लगातार 60 दिन तक सदन से अनुपस्थित रहे तो उस सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जाता है।
  • यदि कोई लोकसभा सासंद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सांसद राज्यसभा सभापति को अपना त्याग पत्र दे देता है तो उसका पद रिक्त हो जाता है।


अनुच्छेद 102-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 102 में सांसदों की अयोग्यताओं का उल्लेख किया गया है। जैसे-
  • यदि कोई सांसद भारत का नागरिक ना रहे तो उसे अयोग्य माना जाएगा।
  • यदि कोई सांसद भारत सरकार अथवा किसी राज्य सरकार के अधीन कोई लाभ का पद ग्रहण कर ले तो उसे अयोग्य माना जाएगा।
  • यदि कोई व्यक्ति दिवालिया घोषित हो चुका हो तो उसे अयोग्य माना जाएगा।
  • यदि न्यायालय ने किसी व्यक्ति को विकृतचित घोषित किया हो तो वह सांसद पद के लिए अयोग्य माना जाएगा।


संसद के द्वारा निर्धारित सांसदों की अन्य अयोग्यताएं-

  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में निर्धारित अन्य निरर्हताएं-
  • 1. उसे चुनावी अपराध या चुनाव में भ्रष्ट आचरण के तहत दोषी ठहराया गया हो।
  • 2. उसे किसी अपराध में 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा हुई हो।
  • 3. वह निर्धारित समय के अंदर चुनावी खर्च का ब्यौरा देने में विफल रहा हो।
  • 4. उसे सरकारी ठेका, कार्य या सेवाओं में कोई रुचि हो।
  • 5. वह निगम में लाभ के पद या निदेशक या प्रबंध निदेशक के पद पर हो जिसमें सरकार का हिस्सा 25% से अधिक हो।
  • 6. उसे भ्रष्टाचार या निष्ठाहीन होने के कारण सरकारी सेवा से बर्खास्त किया हो।
  • 7. उसे विभिन्न समूहों में शत्रुता बढ़ाने या रिश्वतखोरी के लिए दण्डित किया गया हो।
  • 8. उसे छुआछुत, दहेज व सती जैसी सामाजिक अपराधों का प्रसार करने व इनमें संलिप्त होने का दोषी पाया गया हो।


विशेष- अधिकतम चुनावी खर्च-

  • विधानसभा के चुनाव में एक सदस्य अधिकतम 40 लाख रूपये तक खर्च कर सकता है।

  • लोकसभा के चुनाव में एक सदस्य अधिकतम 95 लाख रूपये तक खर्च कर सकता है।


अनुच्छेद 103-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 103 के अनुसार राष्ट्रपति चुनाव आयोग की सलाह से सांसदों की अयोग्यता का निर्णय करता है।


अनुच्छेद 104-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 104 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति संसद का सदस्य नहीं है तथा संसद की कार्यवाही में भाग लेता है तो उस व्यक्ति पर प्रतिदिन 500 रूपये का जुर्माना लगता है।


अनुच्छेद 105-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 105 में सासंदों के विशेषाधिकारों का उल्लेख किया गया है।
  • सांसदों को दो प्रकार के विशेषाधिकार प्राप्त है। जैसे-
  • 1. व्यक्तिगत विशेषाधिकार (Individual Privileges)
  • 2. सामूहिक विशेषाधिकार (Collective privilege)


1. व्यक्तिगत विशेषाधिकार (Individual Privileges)-

  • सांसदों को संसद सत्र के दौरान सत्र से 40 दिन पूर्व तथा सत्र के 40 दिन बाद तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। (यद विशेषाधिकार केवल सिविल मामलों में ही है।)
  • सांसदों को संसद में भाषण देने की स्वतंत्रता है जो किसी न्यायालय में वाद योग्य नहीं है।
  • कोई सांसद संसद या इसकी किसी समिति में दिए गए वक्तव्य या मत के लिए किसी भी न्यायालय की किसी भी कार्यवाही के लिए उत्तरदायी नहीं है।
  • सांसद न्याय निर्णयन सेवा से मुक्य है। अर्थात् संसद के सत्र के समय सांसद न्यायालय में लंबित मुकदमें में प्रमाण प्रस्तुत करने या उपस्थित होने के लिए मना कर सकते हैं।


2. सामूहिक विशेषाधिकार (Collective privilege)-

  • सामूहिक विशेषाधिकार संसद के दोनों सदनों से संबधित है।
  • सदन को अपनी कार्यवाही, रिपोर्ट, वाद-विवाद को प्रकाशित करने तथा अन्यों को इसे प्रकाशित करने से रोकने का अधिकार है।
  • 44वें संविधान संशोधन अधिनियम 1978 ने सदन की पूर्व अनुमति के बिना संसद की कार्यवाही की सारतः सही रिपोर्ट के प्रकाशन की प्रेस की स्वतंत्रता को पुनर्स्थापित किया किन्तु अनुच्छेद 361 (A) के अनुसार यह सदन की गुप्त बैठक के मामले में लागू नहीं है।
  • संसद अपनी कार्यवाही से अतिथियों को बाहर कर सकती है तथा कुछ आवश्यक मामलों पर विचार विमर्श के लिए गुप्त बैठक कर सकती है।
  • संसद अपनी कार्यवाही के संचालन, कार्य के प्रबंधन तथा इन मामलों में निर्णय के लिए नियम बना सकती है।
  • संसद सदस्यों के साथ-साथ बाहरी लोगों को संसद के विशेषाधिकारों के हनन या सदन की अवमानना करने पर निंदित, चेतावनी या कारावास के द्वारा दण्ड दे सकती तथा संसद के सदस्यों को बर्खास्तगी या निष्कासन भी कर सकती है।
  • संसद को किसी सदस्य की बंदी, निरुद्ध, अपराध सिद्धि, कारावास या मुक्ति संबंधी, तात्कालिक सूचना प्राप्त करने का अधिकार है।
  • संसद जाँच कर सकती है तथा गवाह की उपस्थिति व संबंधित पेपर और रिकॉर्ड के लिए आदेश दे सकती है।
  • सदन परिसर में पीठासीन अधिकारी की अनुमति के बिना किसी व्यक्ति (सदस्य या बाहरी) को बंदी नहीं बनाया जा सकता है। और ना ही कोई कानूनी कार्यवाही (सिविल या आपराधिक) की जा सकती है।
  • न्यायालय सदन व सदन की कार्यावाही में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।


अनुच्छेद 106-

  • भारत के संविधान में अनुच्छेद 106 में संसद के सदस्यों के वेतन व भत्ते का उल्लेख किया गया है।
  • सांसदों के वेतन व भत्ते संसद के द्वारा ही निर्धारित किए जाएंगे।
  • संविधान में सांसदों की पेंशन का उल्लेख नहीं किया गया है। इसका निर्धारण संसद के द्वारा ही किया जाएगा।


अनुच्छेद 118-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 118 के अनुसार संसद अपने कार्यों के सुचारु संचालन के लिए स्वयं नियम बना सकती है। जैसे-

  • संसद का समय, संसद के प्रश्न, संसद के प्रश्नों के प्रकार, महत्वपूर्ण प्रस्ताव, संसदीय समितियां आदि संसद के नियमों के अंतर्गत आते हैं।


संसद का समय (Time of Parliament)-

  • प्रश्नकाल (Question Hour)-
  • (I) लोकसभा में 11-12 बजे तक प्रश्नकाल होता है।
  • (II) प्रश्नकाल में सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछते है।
  • शून्यकाल (Zero Hour)-
  • (I) लोकसभा में 12-1 बजे तक शून्यकाल होता है।
  • (II) भारतीय नवाचार 1962 से शून्यकाल में संसद के सदस्य बिना पूर्व सूचना के मामले उठा सकते हैं भारतीय नवाचार 1962 के तहत।
  • लंच (Lunch)-
  • (I) संसद का लंच का समय 1-2 बजे तक होता है।
  • आगे की कार्यवाही या शाम की कार्यवाही (Evening Proceeding)-
  • (I) संसद में लंच से आगे की कार्यवाही 2 बजे से अंत तक होती है।
  • (II) लंच के बाद संसद में विभिन्न विधेयकों व प्रस्तावों पर चर्चा होती है।


राज्यसभा-

  • राज्यसभा में प्रश्नकाल व शून्यकाल की अवधि लोकसभा के विपरीत होती है। जैसे-
  • 11-12 बजे तक राज्यसभा में शून्यकाल होता है।
  • 12-1 बजे तक राज्यसभा में प्रश्नकाल होता है।


संसद में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार-

  • संसद में पूछे जाने वाले प्रश्न 3 प्रकार के होते हैं। जैसे-
  • (I) तारांकित प्रश्न (Starred Question)
  • (II) अतारांकित प्रश्न (Unstarred Question)
  • (III) अल्पसूचना प्रश्न (Short Notice Question)

  • उपर्युक्त सभी प्रकार के प्रश्न संसद में प्रश्नकाल के दौरान पूछे जाते हैं।


(I) तारांकित प्रश्न (Starred Question)-

  • वह प्रश्न जिनके उत्तर मौखिक रूप से दिए जाते हैं तारांकित प्रश्न कहलाते हैं।
  • तारांकित प्रश्न में अनुपूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
  • लोकसभा में प्रतिदिन 20 तारांकित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
  • राज्यसभा में प्रतिदिन 15 तारांकित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।


(II) अतारांकित प्रश्न (Unstarred Question)-

  • वह प्रश्न जिनका उत्तर लिखित रूप में दिया जाता है अतारांकित प्रश्न कहलाते हैं।
  • अतारांकित प्रश्नों में अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछे जा सकते हैं।
  • लोकसभा में प्रतिदिन 255 (230 + 25) अतारांकित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। (लोकसभा में पहले 230 अतारांकित प्रश्न पूछे जाते थे लेकिन वर्तमान में 25 अतारांकि प्रश्न और जोड़ दिए गए है।)
  • राज्यसभा में प्रतिदिन 160 अतारांकित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
  • एक सांसद एक दिन में अधिकतम 10 अतारांकित प्रश्न पूछ सकता है।


(III) अल्पसूचना प्रश्न (Short Notice Question)-

  • यदि कोई प्रश्न 10 दिन से कम के नोटिस पर पूछा जाता है तो उसे अल्पसूचना प्रश्न कहते हैं।
  • अत्यावश्यक मामलों में अल्पसूचना प्रश्न पूछा जाता है।
  • मंत्री की सहमति के बाद इस प्रकार के प्रश्न स्वीकार किए जाते हैं।
  • लोकसभा में प्रतिदिन 1 अल्पसूचना प्रश्न पूछा जा सकता है।
  • राज्यसभा में प्रतिदिन 1 अल्पसूचना प्रश्न पूछा जा सकता है।


अनुच्छेद 120-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 120 में संसद में प्रयोग ली जाने वाली भाषा का उल्लेख किया गया है।

  • संसद में हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा का उपयोग होता है। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष व राज्यसभा सभापति की अनुमति से अन्य भाषा का भी प्रयोग किया जा सकता है। (यह 22 अनुसूचित भाषाओं में से होना भी आवश्यक नहीं है।)


अनुच्छेद 121- 

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 121 के अनुसार संसद में किसी न्यायाधीश के व्यवहार पर चर्चा तथा टिप्पणी नहीं की जा सकती है अर्थात् संसद न्यायपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। लेकिन किसी न्यायाधीश को हटाने के प्रस्ताव के समय चर्चा की जा सकती है।


अनुच्छेद 122-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 122 के अनुसार न्यायालय सदन के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।


अनुच्छेद 123-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 123 में राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने से संबंधित शक्ति का उल्लेख किया गया है।

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