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भारत की राज्यसभा (Rajya Sabha of India)

भारत की राज्यसभा (Rajya Sabha of India)-

  • राज्यसभा का उल्लेख संविधान के भाग-5 तथा अनुच्छेद 80 में किया गया है।
  • राज्यसभा विधायिका का भाग या अंग है।
  • राज्यसभा के अन्य नाम-
  • (I) उच्च सदन (Upper House)
  • (II) स्थायी सदन (Permanent House)
  • (III) द्वितीय चेम्बर (Second Chamber)
  • (IV) प्रबुद्ध सदन (Chamber of Intellectuals)

  • राज्यसभा का 'राज्यसभा' नाम सन् 1954 में रखा गया था।

  • सन् 1954 से पहले राज्यसभा का नाम 'काउंसिल ऑफ स्टेट्स' (Council of States) था।

  • राज्यसभा को लोकसभा की भाँति भंग नहीं किया जा सकता है क्योंकि राज्यसभा एक स्थाई सदन है। अर्थात् राज्यसभा स्थायी सदन होने के कारण राज्यसभा का कोई कार्यकाल नहीं होता है लेकिन राज्यसभा अध्यक्ष तथा सदस्यों का कार्यकाल होता है।


राज्यसभा में अधिकतम सदस्य-

  • राज्यसभा में अधिकतम सदस्य 250 हो सकते हैं।
  • राज्यसभा के अधिकतम सदस्यों में से 238 निर्वाचित सदस्य हो सकते हैं।
  • राज्यसभा के अधिकतम सदस्यों में से 12 निर्वाचित सदस्य हो सकते हैं।


राज्यसभा में वर्तमान सदस्य-

  • राज्यसभा में वर्तमान सदस्य संख्या 245 है।
  • राज्यसभा में वर्तमान सदस्यों में से 233 निर्वाचित सदस्य है।
  • राज्यसभा में वर्तमान सदस्यों में से 12 मनोनित सदस्य है।
  • राज्यसभा में वर्तमान निर्वाचित सदस्यों 233 में से 225 सदस्य राज्यों से निर्वाचित होते हैं।
  • राज्यसभा में वर्तमान निर्वाचित सदस्यों 233 में से 8 सदस्य केन्द्रशासित प्रदेशों से निर्वाचित होते हैं। (पुदुचेरी- 1, दिल्ली- 3, जम्मू कश्मीर- 4)
  • शेष केन्द्रशासित प्रदेश कम जनसंख्या के कारण अपना कोई भी प्रतिनिधि राज्यसभा में नहीं भेज पाते हैं।
  • राज्यसभा में वर्तमान मनोनित सदस्य विज्ञान, कला, साहित्य एवं समाज सेवा के क्षेत्र से मनोनित होते हैं।
  • राज्यसभा में सर्वाधिक सदस्य उत्तर प्रदेश से निर्वाचित होते हैं। अर्थात् राज्यसभा में उत्तर प्रदेश राज्य से कुल 31 सदस्य निर्वाचित होते हैं।
  • राज्यसभा में राजस्थान से कुल 10 सदस्य निर्वाचित होते हैं।
  • राज्यसभा में हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखण्ड से 3-3 सदस्य निर्वाचित होते हैं।
  • राज्यसभा में 8 राज्यों से 1-1 सदस्य निर्वाचित होते हैं।
  • राज्यसभा भारत के परिसंघीय ढाँचे का प्रतिनिधित्व करती है लेकिन सभी राज्यों को राज्यसभा में समान प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है जैसे की अमेरिका में सीनेट में प्रत्येक राज्य से 2 प्रतिनिधि आते हैं जबकि भारत में प्रतिनिधित्व जनसंख्या के आधार पर दिया गया है।


राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन-

  • राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से होता है।
  • राज्यसभा निर्वाचन मण्डल में राज्यों के विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं।
  • राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति तथा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के द्वारा करवाया जाता है।


राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल-

  • राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है। लेकिन इसका उल्लेख भारत के संविधान में नहीं किया गया है।

  • प्रत्येक 2 वर्ष पश्चात राज्यसभा के एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत होते हैं।


राज्यसभा का सभापति (Chairman of Rajya Sabha)-

  • भारत का उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
  • राज्यसभा का सभापति अपना त्याग पत्र राष्ट्रपति को देता है।

  • यदि राज्यसभा में सभापति तथा उपसभापति दोनों ही पद रिक्त हो तो राष्ट्रपति अस्थाई सभापति नियुक्त करता है।

  • वर्तमान में राज्यसभा का सभापति (उपराष्ट्रपति) जगदीप धनखड़ है।


राज्यसभा का सभापति व उपसभापति का वेतन-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 97 के अनुसार राज्यसभा के सभापति व उपसभापति के वेतन व भत्ते भारत की संचित निधि के दिए जाते हैं।


राज्यसभा के सभापति की शक्तियां (Powers of Rajya Sabha Chairman)-

  • राज्यसभा सभापति राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है।
  • राज्यसभा सभापति का कार्य राज्यसभा के नियमों को लागू करवाना और अनुशासन बनाए रखना है।
  • यदि राज्यसभा में बराबर मत की स्थिति हो तो सभापति अपना निर्णायक मत (Casting Vote) दे सकता है।
  • सभापति राज्यसभा के सदस्यों के दल-बदल पर निर्णय लेता है।
  • सभापति राज्यसभा के सदस्यों का त्यागपत्र स्वीकार करता है।
  • राज्यसभा सभापति राज्यसभा की समितियों के अध्यक्ष की नियुक्ति करता है।


राज्यसभा के सभापति की शक्तियां नहीं है।-

  • लोकसभा व राज्यसभा की संयुक्त बैठकों की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है। राज्यसभा का सभापति नहीं करता है।
  • कोई भी विधेयक धन विधेयक है या नहीं इसका निर्णय भी लोकसभा अध्यक्ष करता है। राज्यसभा सभापति नहीं करता है।
  • अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर संसदीय प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व लोकसभा अध्यक्ष करता है। राज्यसभा सभापति नहीं करता है।


राज्यसभा का उपसभापति (Deputy Chairman of Rajya Sabha)-

  • उपसभापति राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) की अनुपस्थिति में राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है।
  • जब उपसभापति राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है तब उपसभापति के पास वही शक्तियां होती है जो सभापति (उपराष्ट्रपति) के पास होती है।
  • राज्यसभा उपसभापति अपना त्यागपत्र राज्यसभा सभापति को देता है।
  • वर्तमान में राज्यसभा का उपसभापति हरिवंशराय नारायण (JDA) है।


राज्यसभा में सदस्यों का पैनल-

  • राज्यसभा के सदस्यों के द्वारा सदस्यों को पैनल बनाया जाता है।
  • लोकसभा की भाँति पैनल में सदस्यों की संख्या निश्चित नहीं होती है।
  • राज्यसभा सभापति व उपसभापति की अनुपस्थिति में सदस्यों के पैनल का सदस्य ही राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं।


राज्यसभा की विशेष शक्तियाँ-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की संसद की शक्ति-
  • राज्यसभा दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव को पारित कर संसद को राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की अनुमति दे सकती है।
  • यदि कानून की समयावधि को बढ़ाना हो तो पूरी प्रक्रिया को दोहराना होता है।
  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 312 में अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) का उल्लेख किया गया है। जैसे-
  • राज्यसभा दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करके संसद को नई अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन की अनुमति दे सकती है।
  • वर्तमान में भारत में 3 अखिल सेवाएं है। जैसे-
  • (I) IAS- ICS (1947)
  • (II) IPS- IP (1947)
  • (III) IFS (1966)
  • अनुच्छेद 67 के अनुसार उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव पहले राज्य में ही लाया जा सकता है।

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