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पृथ्वी (Earth)

पृथ्वी का आकार (Shape of Earth)

  • पृथ्वी का आकार भू-आभ (Geoid) है।
  • भू-आभ (Geoid)- पृथ्वी, ध्रुवों के पास थोड़ी चपटी होने के कारण पृथ्वी के आकार को भू-आभ (ज्यॉइड) कहा जाता है।
  • पृथ्वी के परिभ्रमण (Rotation) के कारण केंद्र से बाहर की ओर अपकेंद्रीय बल (Centrifugal Force) लगता है।
  • अपकेंद्रीय बल के कारण विषुवत रेखीय (भूमध्य रेखा/ Equator) क्षेत्र में पृथ्वी अधिक प्रसारित है तथा ध्रुवों पर पृथ्वी थोड़ी चपटी है।
  • पृथ्वी की विषुवत रेखीय त्रिज्या (Equatorial Radius) ध्रुवीय त्रिज्या (Polar Radius) से अधिक है। अतः विषुवत रेखीय क्षेत्र में न्यूनतम गुरुत्वाकर्षण बल (Lowest Gravitational Force) पाया जाता है तथा ध्रुवीय क्षेत्र में सर्वाधिक गुरुत्वाकर्षण बल (Highest Gravitational Force) पाया जाता है।
  • पृथ्वी की विषुवत रेखीय त्रिज्या (Equatorial Radius)- 6378 किलोमीटर (3963 miles)
  • पृथ्वी की ध्रुवीय त्रिज्या (Polar Radius)- 6356 किलोमीटर (3950 miles)

  • पृथ्वी की विषुवत रेखीय त्रिज्या तथा ध्रुवीय त्रिज्या में 22 किलोमीटर का अंतर है। जैसे- (6378 km - 6356 km = 22 km)

  • विषुवत रेखीय क्षेत्र में न्यूनतम गुरुत्वाकर्षण बल पाये जाने के कारण ही विश्व के अधिकतम रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र विषुवत रेखीय क्षेत्र के निकट महाद्वीपों के पूर्वी तट पर स्थापित किये जाते हैं।

  • पृथ्वी की विषुवत रेखीय परिधि (Equatorial Circumference) 40,075 किलोमीटर (24,901)
  • पृथ्वी की ध्रुवीय परिधि (Polar Circumference) 40, 008 किलोमीटर (24,859 miles)

  • पृथ्वी की विषुवत रेखीय परिधि तथा ध्रुवीय परिधि में 67 किलोमीटर का अंतर है। जैसे- (40,075 km - 40,008 km = 67 km)


पृथ्वी की धुरी (Axis of Earth)-

  • वह काल्पनिक रेखा जिसके चारों ओर पृथ्वी परिभ्रमण करती है उसे पृथ्वी की धुरी कहते हैं।

  • पृथ्वी की धुरी 23½ डिग्री के कोण पर झुकी है जिसे अक्षीय झुकाव (Axial Bending) कहते हैं।


पृथ्वी की कक्षा (Orbit of Earth)-

  • वह स्थायी मार्ग जिस पर चलते हुए पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करती है उसे पृथ्वी की कक्षा कहते हैं।
  • पृथ्वी की कक्षा दीर्घवृत्ताकार (Elliptical Orbit) है।
  • दीर्घवृत्ताकार कक्षा के कारण सूर्य तथा पृथ्वी के बीच दूरी बदली रहती है।

  • पृथ्वी तथा सूर्य के बीच औसत दूरी 15 करोड़ किलोमीटर (150 million km) है।
  • पृथ्वी तथा सूर्य के बीच औसत दूरी एक खगोलीय इकाई (1 Astronomical Unit) के बराबर होती है।
  • एक खगोलीय इकाई = 15 करोड़ किलोमीटर
  • 1 Astronomical Unit = 150 Million km

  • पृथ्वी तथा सूर्य के बीच न्यूनतम दूरी 14.7 करोड़ किलोमीटर (147 million km) है।
  • पृथ्वी तथा सूर्य के बीच अधिकतम दूरी 15.2 करोड़ किलोमीटर (152 million km) है।
  • उपसौर (Perihelion)- 
    • पृथ्वी तथा सूर्य के बीच जब न्यूनतम दूरी होती है तो उस स्थिति को उपसौर कहा जाता है।

    • उपसौर की स्थिति प्रतिवर्ष 3 जनवरी के दिन होती है।

    • उपसौर में पृथ्वी तथा सूर्य के बीच दूरी 14.7 करोड़ किलोमीटर (147 million km) होती है।

    • उपसौर की अवस्था उत्तरी गोलार्द्ध (Northern Hemisphere- NH) में शीत ऋतु (Winter) की तीव्रता को कम करती है।

    • उपसौर की अवस्था दक्षिणी गोलार्द्ध (Southern Hemisphere- SH) में ग्रीष्म ऋतु (Summer) की तीव्रता को बढ़ाती है।

    • उपसौर की अवस्था में सूर्य से निकलने वाली सौर विकिरण (Solar Radiation) 7% बढ़ जाती है।

    • उपसौर के दौरान पृथ्वी की परिक्रमण गति सर्वाधिक होती है।

  • अपसौर (Aphelion)-

    • पृथ्वी तथा सूर्य के बीच जब अधिकतम दूरी होती है तो उस स्थिति को अपसौर कहा जाता है।

    • अपसौर की स्थिति प्रतिवर्ष 4 जुलाई के दिन होती है।

    • अपसौर में पृथ्वी तथा सूर्य के बीच दूरी 15.2 करोड़ किलोमीटर (152 million km) होती है।

    • अपसौर की अवस्था उत्तरी गोलार्द्ध (NH) में ग्रीष्म ऋतु की तीव्रता को कम करती है।

    • अपसौर की अवस्था दक्षिणी गोलार्द्ध (SH) में शीत ऋतु की तीव्रता को बढ़ाती है।

    • अपसौर की अवस्था में सूर्य से निकलने वाली सौर विकिरण 7% कम हो जाती है।

    • अपसौर के दौरान पृथ्वी की परिक्रमण गति सबसे कम होती है।

  • उपसौर (Perihelion) तथा अपसौर (Aphelion) दोनों अवस्थाएं उत्तरी गोलार्द्ध की मौसम परिस्थितियों के पक्ष में है। (उपसौर अवस्था उत्तरी गोलार्द्ध में शीत ऋतु की तीव्रता को कम करती है। तथा अपसौर अवस्था उत्तरी गोलार्द्ध में ग्रीष्म ऋतु की तीव्रता को कम करती है। )


पृथ्वी की गतियाँ (Motion of Earth)-

  • पृथ्वी दो प्रकार की गति करती है। जैसे-
    • 1. परिभ्रमण या घूर्णन (Rotation)
    • 2. परिक्रमण (Revolution)


1. परिभ्रमण या घूर्णन (Rotation)-

  • पृथ्वी के द्वारा अपनी धुरी के चारों ओर की जाने वाली गति को परिभ्रमण कहते हैं।
  • पृथ्वी पश्चिम दिशा (West) से पूर्व दिशा (East) की ओर परिभ्रमण करती है।
  • पृथ्वी को अपना एक परिभ्रमण चक्र पूरा करने में 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड का समय लगता है।


परिभ्रमण के प्रभाव (Impact of Rotation)-

  • (I) सूर्योदय (Sunrise)- पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर परिभ्रमण करती है जिसके कारण सूर्य पूर्व दिशा से उदय तथा पश्चिम में अस्त होते हुए प्रतित होता है।

  • (II) दिन तथा रात का निर्माण (Formation of Day and Night)-
    • प्रदीप्ति का वृत्त (Circle of illumination)- प्रदीप्ति का वृत्त वह काल्पनिक वृत्त होता है जो पृथ्वी पर दिन तथा रात वाले स्थानों को अलग करता है।
  • (III) कोरिओलिस बल का निर्माण (Formation of Coriolis Force)- कोरिओलिस बल मुक्त रूप से गति कर रही वस्तुओं पर लगता है।
    • कोरिओलिय बल के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में वस्तुएं दायीं ओर मुड़ जाती है तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती है।
    • ध्रुवों पर सर्वाधिक कोरिओलिस बल पाया जाता है जबकि विषुवत रेखीय क्षेत्र में कोरिओलिस बल का मान शून्य होता है।
    • वस्तु की गति जितनी अधिक होती है उस पर उतना ही अधिक कोरिओलिस बल लगता है।

    • कोरिओलिस बल के कारण चक्रवात (Cyclone) तथा प्रतिचक्रवात (Anticyclone) का निर्माण होता है।

  • चक्रवात (Cyclone)-

    • कोरिओलिस बल के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में चक्रवात की गति घड़ी की विपरित दिशा में (Anticlockwise Cyclone) होती है।

    • कोरिओलिस बल के कारण दक्षिणी गोलार्द्ध में चक्रवात की गति घड़ी की दिशा में (Clockwise Cyclone) होती है।

    • विषुवत रेखा पर कोरिओलिस बल का मान शून्य होने के कारण विषुवत रेखा पर चक्रवात नहीं बनते है।

  • प्रतिचक्रवात (Anticyclone)-
    • कोरिओलिस बल के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में प्रतिचक्रवात की गति घड़ी की दिशा में (Clockwise Anticyclone) होती है।

    • कोरिओलिस बल के कारण दक्षिणी गोलार्द्ध में प्रतिचक्रवात की गति घड़ की विपरित दिशा (Anticlockwise Anticyclone) में होती है।

    • विषुवत रेखा पर कोरिओलिस बल का मान शून्य होने के कारण विषुवत रेखा पर प्रतिचक्रवात नहीं बनते हैं।


2. परिक्रमण (Revolution)-

  • पृथ्वी के द्वारा सूर्य के चारों ओर की जाने वाली गति को परिक्रमण कहते हैं।
  • पृथ्वी के एक परिक्रमण पूरा करने में 365 दिन तथा 6 घंटे का समय लगता है।
  • इन 6 घंटों को 4 वर्षों तक जोड़ा जाता है जिससे एक अतिरिक्त दिन का निर्माण होता है तथा इस एक अतिरिक्त दिन को लिप वर्ष में जोड़ा जाता है।
  • पृथ्वी पश्चिम दिशा से पूर्व दिशा की ओर परिक्रमण करती है।
  • पृथ्वी की परिक्रमण गति तथा पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के कारण पृथ्वी पर ऋतुओं का निर्माण, दिन और रात की अवधि का निर्धारण तथा ध्रुवों पर 6 महीने के दिन व 6 महीने की रात का निर्माण होता है।


विषुव (Equinox)-

  • वह स्थित जब सूर्य विषुवत रेखा के ठीक उपर होता है उसे विषुव की स्थिति कहते हैं।
  • विषुव के दौरान पृथ्वी पर सभी स्थानों पर 12 घंटे का दिन तथा 12 घंटे की रात की स्थिति होती है।
  • विषुव की स्थिति वर्ष में दो बार बनती है। जैसे-
    • (I) 21 मार्च- वसंत विषुव (Spring Equinox)
    • (II) 23 सितम्बर- शरद विषुव (Autumn Equinox)


ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice)-

  • वह स्थिति जब सूर्य कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर स्थित होता है उसे ग्रीष्म अयनांत की स्थिति कहते हैं।
  • ग्रीष्म अयनांत के दौरान उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे लम्बा दिन तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे लम्बी रात होती है।
  • ग्रीष्म अयनांत की स्थिति वर्ष में एक बार बनती है। जैसे-
    • (I) 21 जून- ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice)


शीत अयनांत (Winter Solstice)-

  • वह स्थिति जब सूर्य मकर रेखा (Tropic of Capricorn) पर स्थित होता है उसे शीत अयनांत की स्थिति कहते हैं।
  • शीत अयनांत के दौरान उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे लम्बी रात तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे लम्बा दिन होता है।
  • शीत अयनांत की स्थिति वर्ष में एक बार बनती है। जैसे-
    • (I) 22 दिसम्बर- शीत अयनांत


विषुवत रेखा (Equator)-

  • विषुवत रेखा पर पूरे साल भर 12 घंटे का दिन व 12 घंटे की रात की स्थिति रहती है क्योंकि प्रदीप्ति का वर्त हमेशा विषुवत रेखा को दो समान भागों में विभाजित करता है।

  • विषुवत रेखा पर ऋतुएं परिवर्तित नहीं होती है या ऋतुओं का निर्माण नहीं होता है। अर्थात् एक समान मौसम रहती है।

  • विषुवत रेखा पर पूरे साल तापमान अधिक होती है।

  • विषुवत रेखा पर पूरे साल अधिक वर्षा होती रहती है।

  • विषुवत रेखा पर वर्षावन (Rainforest) या सदाबहार (Evergreen) वन पाये जाते हैं।


अमेजन नदी-

  • विश्व में स्थलीय भाग पर सर्वाधिक सदाबहार वन या जैवविविधता (Biodiversity) दक्षिणी अमेरिका में अमेजन नदी के बेसिन में पायी जाती है।
  • दक्षिणी अमेरिका में अमेजन नदी के बेसिन को अमेजन वर्षावन कहते हैं।
  • अमेजन के वर्षा वनों को सेलवास भी कहा जाता है।
  • सेलवास या अमेजन के वर्षा वनों को विश्व के फेफड़े भी कहा जाता है क्योंकि सेलवास में सर्वाधिक सदाबहार वन या वर्षावन पाये जाते हैं।


नॉर्वे (Norway)- नॉर्वे को मध्यरात्री के सूर्य का देश (Country of Midnight Sun) कहा जाता है।

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