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मौर्योत्तर काल

मौर्योत्तर काल (185 BC - 319 AD)

(Post Mauryan Period)


मौर्योत्तर काल (Post Mauryan Period)-

➠भारत में 185 ई.पू. से लेकर 319 ई. तक के समय को ही मौर्योत्तर काल कहा जाता है।

➠मौर्योत्तर काल में निम्नलिखित वंशों का उदय हुआ था।-

1. शुंग वंश (Sunga Dynasty) (185 ई.पू. - 75 ई.पू.)

2. कण्व वंश (Kanva Dynasty) (75 ई.पू. - 30 ई.पू.)

3. सातवाहन वंश (Satavahana Dynasty) (60 ई.पू. - 240 ई.)

4. इंडो-ग्रीक (Indo-Greek)

5. शक वंश (Saka Dynasty)

6. कुषाण वंश (Kushan Dynasty) (30 ई. - 375 ई.)


मौर्योत्तर कालीन व्यापार वाणिज्य-

➠मौर्योत्तर काल भारत में व्यापार वाणिज्य का स्वर्ण काल था।

➠मौर्योत्तर को व्यापार वाणिज्य का स्वर्ण काल निम्नलिखित कारणों से माना गया था।

1. भारत का रेशम (सिल्क) मार्ग पर अधिकार था एवं भारत एक मध्यस्त के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

2. मौर्योत्तर काल में रोमन साम्राज्य अपने चरम स्तर पर था तथा भारत रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार करता था।

3. मौर्योत्तर काल में भारत में मुद्रा प्रणाली विकसित हो गयी थी।

4. मौर्योत्तर काल में भारत में कई नगर विकसित हो गए थे।

5. मौर्योत्तर काल में दक्षिण भारत में संगम काल चल रहा था।

6. मौर्योत्तर काल मों दक्षिण भारत में संगम शासकों के रोमन साम्राज्य के साथ व्यापारिक संबंध थे।

7. अरिकामेडु (पांडिचेरी) से रोमन सिक्के प्राप्त होते है।

8. मौर्योत्तर काल में 46 ई. में यूनानी नाविक हिप्पालस ने व्यापारिक पवनों की खोज की थी।

9. मौर्योत्तर काल में दक्षिण भारत में बहुत सारे बंदरगाह थे।


मौर्योत्तर कालीन मूर्तिकला-

➠मौर्योत्तर काल को भारतीय मूर्तिकला का स्वर्ण काल माना जाता है।

➠भारत में मूर्तियों का निर्माण सिंधु घाटी सभ्यता से प्रारम्भ हो गया था लेकिन सिंधु घाटी सभ्यता के समय की मूर्तियों में सुन्दरता एवं तकनिक का अभाव था।

➠मौर्योत्तर काल में भारत में निर्मित मूर्तियों में तकनीक का अनूठा समावेश था।

➠मौर्योत्तर काल में कुषाण वंश एवं सातवाहन वंश के शासकों ने भारतीय मूर्तिकला को संरक्षण प्रदान किया था।

➠बौद्ध धर्म के प्रभाव के कारण मौर्योत्तर काल में भारत में बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण अधिक मात्रा में हुआ था।

➠भारत में मौर्योत्तर काल की मूर्तियों पर रोमन, ग्रीक एवं फारसी प्रभाव दिखाई देता है।

➠मौर्योत्तर काल में भारत में भारतीय मूर्तिकला शैली को तीन भागों में विभाजित किया गया था जैसे-

1. गांधार मूर्तिकला शैली

2. मथुरा मूर्तिकला शैली

3. अमरावती मूर्तिकला शैली


1. गांधार मूर्तिकला शैली-

➠मौर्योत्तर काल में भारत में गांधार मूर्तिकला शैली को राजकीय संरक्षण प्रदान था।

➠मौर्योत्तर काल में भारत में कुषाणों नें गांधार मूर्तिकला शैली को संरक्षण प्रदान किया था।

➠भारत में गांधार मूर्तिकला शैली पर रोमन, ग्रीक एवं फारसी प्रभाव दिखाई देता है।

➠भारत में गांधार मूर्तिकला शैली में भगवान बुद्ध को यूनानी देवता अपोलो के समान दर्शाया गया है।

➠गांधारा मूर्तिकला शैली को विदेशी मूर्तिकला शैली भी कहते है।

➠भगवान बुद्ध की सर्वाधिक मूर्तियां गांधार मूर्तिकला शैली में निर्मित है।

➠भगवान बुद्ध की अधिकतर मूर्तियां खड़ी अवस्था में है।

➠गांधार मूर्तिकला शैली में भगवान बुद्ध को लम्बा, बलिष्ठ एवं घुंघराले बालों में दर्शाया गया है।

➠गांधार मूर्तिकला शैली भौतिकवादी मूर्तिकला शैली है।

➠भगवान बुद्ध की मूर्तियों पर गांधार मूर्तिकला शैली में लम्बे लम्बे वस्त्रों का अंकन किया गया है। अर्थात् भगवान बुद्ध की मूर्तियों पर लम्बे लम्बे वस्त्र पहनाए गये है।

➠गांधार मूर्तिकला शैली में मूर्तियों के निर्माण में भूरे बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया है।


गांधार मूर्तिकला शैली के प्रमुख केंद्र-

(I) तक्षशिला (पाकिस्तान)

(II) बामियान (अफगानिस्तान)

(III) भीमरान (अफगानिस्तान)

(IV) हद्द (अफगानिस्तान)


2. मथुरा मूर्तिकला शैली-

➠मौर्योत्तर मूर्तिकला में भारत में मथुरा मूर्तिकला शैली को राजकीय संरक्षण प्रदान था लेकिन मथुरा मूर्तिकला शैली का वास्तविक विकास लोक कला के रूप में हुआ था।

➠मथुरा मूर्तकला शैली स्वदेशी मूर्तिकला शैली थी।

➠भारत में मथुरा मूर्तिकला शैली में बौद्ध धर्म, जैन धर्म एवं हिन्दू धर्म से संबंधित मूर्तियां बनी थी।

➠भगवान बुद्ध की प्रथम मूर्ति मथुरा मूर्तिकला शैली में निर्मित है।

➠मथुरा मूर्तिकला शैली की अधिकतर मूर्तियां पद्मासन अवस्था में है।

➠मथुरा मूर्तिकला शैली आध्यात्मिक मूर्तिकला शैली है।

➠कुषाण शासकों ने मथुरा मूर्तिकला शैली को संरक्षण प्रदान किया था।

➠मथुरा मूर्तिकला शैली में भगवान बुद्ध को साधु के समान दुबला पतला दर्शाया गया है।

➠मथुरा मूर्तिकला शैली में भगवान बुद्ध के चेहरे पर अत्यधिक तेज दर्शाया गया है।

➠मथुरा मूर्तिकला शैली में लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया है।


मथुरा मूर्तिकला शैली के प्रमुख केंद्र-

(I) मथुरा (मथुरा जिला, उत्तर प्रदेश, भारत)

(II) सारनाथ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत)

(III) साँची (रायसेन जिला, मध्य प्रदेश, भारत)


3. अमरावती मूर्तिकला शैली-

➠मौर्योत्तर काल में भारत में अमरावती मूर्तिकला शैली को राजकीय संरक्षण प्रदान था लेकिन भारत में अमरावती मूर्तिकला शैली का वास्तविक विकास लोक कला के रूप में हुआ था।

➠अमरावती मूर्तिकला शैली स्वदेशी मूर्तिकला शैली है।

➠मौर्योत्तर काल में भारत में अमरावती मूर्तिकला शैली में बौद्ध धर्म, जैन धर्म एवं हिन्दू धर्म से संबंधित मूर्तिया बनी है।

➠भारत में अमरावती मूर्तिकला शैली में धार्मिक और गैर-धार्मिक मूर्तियों का निर्माण हुआ है।

➠अमरावती मूर्तिकला शैली में सफेद संगमरमर का प्रयोग किया गया है।


अमरावती मूर्तिकला शैली के प्रमुख केंद्र-

(I) अमरावती

(II) नागार्जुन कोंडा

(III) घंटशाल


शुंग वंश की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

कण्व वंश की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

सातवाहन वंश की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

इंडो-ग्रीक वंश की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

शक वंश की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

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