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राजस्थान के प्रमुख दुर्ग

राजस्थान के दुर्गो को बनाने का मुख्य उद्देश्य अपने आप को व प्रजा को सुरक्षा प्रदान करना था

गढ़- सरक्षा कि दृष्टि से सामान्य
दुर्ग- सरक्षा कि दृष्टि से अच्छा
किला- सरक्षा कि दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ

वीर विनोद-
यह पुस्तक भीलवाड़ा के इतिहासकार श्यामल दास के द्वारा लिखि गई है। इस पुस्तक के अनुसार मेवाड़ के 84 दुर्गो मे से 32 दुर्गो का निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया था। इसिलिए महाराणा कुम्भा को दुर्गो का निर्माता तथा राजस्थान स्थापत्य कला का जनक भी कहते है। राजस्थान मे कैसर-ए-हिंद श्यामल दास को कहा जाता है।

कोटिल्य (चाणक्य)-
वास्तविक नाम- विष्णुगुप्त
कोटिल्य के अनुसार राजस्थान मे दुर्गो कि श्रेणीया 4 है जैसे-
1. जल दुर्ग
2. गिरी दुर्ग
3. वन दुर्ग
4. धान्वन दुर्ग
कोटिल्य के अनुसार सर्वश्रेष्ठ किला/दुर्ग गिरी दुर्ग है

शुक्र निति-
शुक्र निति के अनुसार राजस्थान मे दुर्गो कि श्रेणीया 9 है जैसे-
1. एरण दुर्ग- वह दुर्ग जिसका रास्ता कटिली झाड़ीयो व पत्थरो से दुर्गम हो एरण दुर्ग कहलाता है
2. पारिख दुर्ग- वह दुर्ग जिसके चारो और खायी हो पारिख दुर्ग कहलाता है
3. पारिध दर्ग- वह दुर्ग जिसका प्रकोटा (दिवार) पुर्णतः इट, मिट्टी व पत्थरो से निर्मित हो पारिध दुर्ग कहलाता है
4. धान्वन दुर्ग- वह दुर्ग जो मरूस्थल मे निर्मित हो धान्वन दुर्ग कहलाता है
5. सैन्य दुर्ग- वह दुर्ग जिसके चारो और पुर्णतः सैनिको का पहरा हो सैन्य दुर्ग कहलाता है
6. सहाय दुर्ग- वह दुर्ग जो दुसरे राजे रजवाड़े कि सहायता के लिए बनाये जाता थे सहाय दुर्ग कहलाते थे
7. वन दुर्ग- वह दुर्ग जिसके चारो और वन पाये जाते हो वन दुर्ग कहलाता है
8. गिरि दुर्ग- वह दु्र्ग जो पहाड़ी पर स्थित हो गिरि दुर्ग कहलाता है
9. जल/औदुक दुर्ग- वह दुर्ग जिसके चारो और पानी हो जल दुर्ग कहलाता है
शुक्र निति के अनुसार सर्वश्रेष्ठ दुर्ग सैन्य दुर्ग है

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग-

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